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अंबिकापुर@राजाकटेल में पंडो जनजाति की जमीन पर कब्जे का आरोप,150 घरों की बसाहट से मचा हड़कंप

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सरगुजा में PVTG पंडो परिवारों की पुश्तैनी भूमि पर अवैध कब्जे का मामला गरमाया…

  • 12 पंडो परिवारों की जमीन पर कब्जे का दावा,संभागायुक्त ने दिए जांच के निर्देश
  • आदिवासी जमीन विवाद ने पकड़ा तूल,राजाकटेल में बड़े पैमाने पर बसाहट का आरोप
  • पंडो समाज ने लगाई गुहार : जमीन बचाओ, सुरक्षा दो…
  • सरगुजा में विशेष पिछड़ी जनजाति की भूमि पर अवैध निर्माण का आरोप,प्रशासन हरकत में
  • राजाकटेल में भूमि विवाद बना संवेदनशील मुद्दा,कलेक्टर को सौंपी गई जांच…
  • पुश्तैनी जमीन पर बाहरी कब्जे का आरोप,पंडो समाज में आक्रोश…

-न्यूज डेस्क-
अंबिकापुर,27 फरवरी 2026 (घटती-घटना)। सरगुजा जिले के लखनपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत माजा के राजाकटेल बस्ती में पंडो विशेष पिछड़ी जनजाति की पुश्तैनी जमीन पर बाहरी लोगों द्वारा अवैध कब्जा कर बड़े पैमाने पर बसाहट किए जाने का मामला अब प्रशासनिक स्तर पर पहुंच गया है,नगर पालिक निगम अंबिकापुर के पार्षद आलोक दुबे द्वारा इस संबंध में संभागायुक्त सरगुजा को विस्तृत शिकायत पत्र सौंपा गया है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि 12 पंडो परिवारों की जमीन पर बाहरी व्यक्तियों ने कब्जा कर लगभग 150 घर बना लिए हैं, संभागायुक्त कार्यालय,अंबिकापुर से 20 फरवरी 2026 को जारी पत्र (क्रमांक 267848/फाइल नंबर क्कख्क्र/538/2026) के माध्यम से कलेक्टर सरगुजा को मामले की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
शिकायत में क्या लगाए गए आरोप?
शिकायत पत्र के अनुसार राजाकटेल बस्ती में पंडो जनजाति के लोग कई पीढि़यों से निवास करते आ रहे हैं और उनकी कृषि भूमि पर बाहरी राज्यों—झारखंड, बिहार एवं अन्य क्षेत्रों—से आए लोगों ने अवैध कब्जा कर लिया है, आरोप है कि इन कब्जों के बाद वहां स्थायी निर्माण कर लगभग 150 घरों की बसाहट कर दी गई है, शिकायत में यह भी कहा गया है कि कुछ मामलों में भूमि क्रय-विक्रय की प्रक्रिया संदिग्ध रही है और कमजोर आदिवासी परिवारों को बहला-फुसलाकर या दबाव बनाकर जमीन लिखवाने के आरोप भी सामने आए हैं, ज्ञापन में 12 प्रभावित पंडो परिवारों के नाम और उनके भूमि रकबे का उल्लेख करते हुए जांच की मांग की गई है।
अखबार की खबर भी संलग्न
शिकायत के साथ 12 फरवरी 2026 को प्रकाशित एक समाचार की प्रति भी संलग्न की गई है, जिसमें शीर्षक था—‘राजाकटेल में पंडो जनजाति के 12 लोगों की जमीन पर कब्जा, 150 घरों की बसाहट ‘,समाचार में दावा किया गया था कि प्रभावित परिवारों ने प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है और भूमि संरक्षण की मांग की है।
थाना लखनपुर
में भी दिया गया आवेदन

इसी प्रकरण को लेकर पंडो समाज के लोगों ने थाना लखनपुर में भी आवेदन प्रस्तुत कर सुरक्षा की मांग की है,आवेदन में आरोप लगाया गया है कि भूमि विवाद को लेकर मारपीट,धमकी और सामाजिक तनाव की स्थिति बन रही है,आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि बच्चों को स्कूल जाने में बाधा और जान से मारने की धमकी जैसी घटनाओं का भय बना हुआ है,समाज के प्रतिनिधियों ने आशंका जताई है कि यदि समय रहते प्रशासन हस्तक्षेप नहीं करता तो क्षेत्र में शांति भंग हो सकती है।
संवैधानिक संरक्षण का मुद्दा
पंडो जनजाति विशेष पिछड़ी जनजाति वर्ग में शामिल है,जिन्हें भारतीय संविधान और विभिन्न भूमि संरक्षण कानूनों के तहत विशेष सुरक्षा प्रदान की गई है, ऐसे में यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला केवल भूमि विवाद तक सीमित नहीं रहेगा,बल्कि आदिवासी अधिकारों और संवैधानिक संरक्षण से जुड़ा गंभीर विषय बन सकता है, विशेषज्ञों का मानना है कि आदिवासी भूमि का हस्तांतरण या कब्जा यदि नियमों के विपरीत हुआ है,तो संबंधित धाराओं के तहत कठोर कार्रवाई संभव है।
प्रशासन की अगली कार्रवाई पर नजर…
संभागायुक्त कार्यालय द्वारा मामले को गंभीर बताते हुए कलेक्टर को जांच के निर्देश दिए जाने के बाद अब निगाहें जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं,जांच में यह स्पष्ट होगा कि भूमि हस्तांतरण वैध प्रक्रिया के तहत हुआ या नहीं, कथित कब्जा वास्तविक है या विवादित स्वामित्व का मामला,प्रभावित परिवारों को किस प्रकार की कानूनी सुरक्षा उपलब्ध कराई जानी चाहिए,यदि आरोप प्रमाणित होते हैं तो अवैध कब्जा हटाने, दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई और प्रभावित पंडो परिवारों को संरक्षण देने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है, फिलहाल,यह मामला सरगुजा जिले में आदिवासी भूमि अधिकार,प्रशासनिक जवाबदेही और सामाजिक समरसता के संदर्भ में गंभीर चर्चा का विषय बन चुका है।


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