-संवाददाता-
अम्बिकापुर,01 फरवरी 2026 (घटती-घटना)। यूजीसी के नए नियमों के विरोध में 1 फरवरी को आहूत अंबिकापुर बंद का असर आंशिक रूप से देखने को मिला। स्वर्ण समाज ने सर्वसम्मति से बंद को सफल बनाने की अपील की थी। इसके समर्थन में विभिन्न सामाजिक संगठनों ने सुबह रैली के रूप में निकलकर शहर में बंद का आह्वान किया। सुबह के समय बाजार में बंद का असर स्पष्ट नजर आया।
कई प्रमुख इलाकों में दुकानें बंद रहीं और आवागमन भी सामान्य से कम रहा। हालांकि, दोपहर होते-होते स्थिति सामान्य होने लगी और अधिकांश दुकानें खुल गईं। विभिन्न सामाजिक संगठनों ने यूजीसी नियम को समाज विरोधी, राष्ट्र विरोधी और जनविरोधी बताते हुए प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में यूजीसी संशोधन कानून को तत्काल वापस लेने की मांग की गई है। ज्ञापन में कहा गया है कि भारत की परंपरा हजारों वर्षों से बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय की रही है। लेकिन यूजीसी का नया संशोधन प्रस्ताव इस मूल भावना के विपरीत प्रतीत होता है। जब भी कोई नया कानून बनाया जाता है, तो उसका उद्देश्य समाज के सभी वर्गों का हित होना चाहिए, न कि किसी वर्ग विशेष की उपेक्षा या अपमान। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि प्रस्तावित संशोधन नियमों से कथित रूप से कुछ वर्गों, विशेषकर ब्राह्मण,क्षत्रिय, वैश्य और कायस्थ समाज के प्रति दुराग्रह और उपेक्षा का भाव झलकता है। कहा गया है कि यह वही समाज है, जिसने सदियों से राष्ट्र,धर्म और संस्कृति की रक्षा में निरंतर योगदान दिया है।
समाज में विभाजन की आशंका : संगठनों का कहना है कि इस तरह के कानून से समाज में जातिगत विद्वेष बढ़ सकता है और सामाजिक एकता को नुकसान पहुंच सकता है। इससे न केवल समाज, बल्कि पूरे राष्ट्र की भावनाएं आहत होंगी और देश प्रगति के बजाय पीछे की ओर जा सकता है।
काला कानून बताकर वापस लेने की मांग : ज्ञापन के माध्यम से प्रधानमंत्री से विनम्र आग्रह किया गया है कि इस अदूरदर्शी, समाज विरोधी और जनविरोधी कानून को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए। ज्ञापन पर स्वयं को समाज और राष्ट्रप्रेमी बताने वाले लोगों के हस्ताक्षर दर्ज हैं।
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