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अम्बिकापुर@मनरेगा नाम परिवर्तन व बदलाव को लेकर कांग्रेस का विरोध,गरीबों के अधिकार पर हमला बताया

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-संवाददाता-
अम्बिकापुर,10 जनवरी 2026 (घटती-घटना)। केन्द्र सरकार द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के नाम परिवर्तन और उसके मूल प्रावधानों में बदलाव को लेकर कांग्रेस का विरोध लगातार जारी है। शनिवार को अंबिकापुर स्थित राजीव भवन कांग्रेस कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में कांग्रेस नेता एवं पूर्व केबिनेट मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह ने इन बदलावों को गरीबों के अधिकारों को समाप्त करने वाला कदम बताया। डॉ. प्रेमसाय सिंह ने कहा कि महात्मा गांधी के ग्राम स्वरोजगार के स्वप्न को साकार करने के उद्देश्य से कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने वर्ष 2005 में मनरेगा कानून पारित किया था, जिसके तहत ग्रामीण मजदूरों को रोजगार की संवैधानिक गारंटी दी गई। योजना के लागू होने के बाद से अब तक 180 करोड़ से अधिक कार्यदिवस सृजित हुए हैं और ग्रामीण भारत में 10 करोड़ से ज्यादा परिसंपत्तियों का निर्माण किया गया है, जिनमें तालाब, सहायक संरचनाएं और अन्य आधारभूत ढांचे शामिल हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2008-09 की वैश्विक आर्थिक मंदी हो या कोविड-19 का संकट,मनरेगा ने देश की अर्थव्यवस्था को संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कैग की ऑडिट रिपोर्ट और देश-विदेश में किए गए लगभग 200 अध्ययनों से यह सिद्ध हुआ है कि यह योजना अत्यंत प्रभावी रही है। इसकी सफलता का मुख्य कारण रोजगार की संवैधानिक गारंटी थी, जिसके तहत मजदूर काम की मांग कर सकते थे और 15 दिन के भीतर काम न मिलने पर बेरोजगारी भत्ता देने का प्रावधान था। इस योजना का शत-प्रतिशत बजट केन्द्र सरकार वहन करती थी, जिससे राज्य सरकारों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ता था।
मूल प्रावधानों को किया गया है कमजोर : डॉ. सिंह ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने न केवल योजना के मूल प्रावधानों को कमजोर किया है,बल्कि महात्मा गांधी के नाम को हटाकर इसका नाम बदलकर ‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण’ कर दिया है। नई योजना में काम की संवैधानिक गारंटी समाप्त कर दी गई है। ग्राम पंचायतों के अधिकार भी छीने जा रहे हैं और काम के आवंटन का अधिकार केन्द्र सरकार अपने पास रख रही है।
न्यूनतम मजदूरी की गारंटी समाप्त
उन्होंने कहा कि नए प्रावधानों के तहत न्यूनतम मजदूरी की गारंटी भी समाप्त हो जाएगी और मजदूरी दर तय करने का अधिकार सरकार के पास होगा। साथ ही,बजट आवंटन को 60-40 के अनुपात में केन्द्र और राज्य सरकारों पर डाल दिया गया है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर राज्य इस योजना के क्रियान्वयन में रुचि नहीं लेंगे। इससे ग्रामीण रोजगार पूरी तरह समाप्त होने की आशंका है और 100 से 125 दिन रोजगार बढ़ाने का दावा भी जुमला साबित होगा। कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि नई योजना में फसल अवधि के दौरान रोजगार पर प्रतिबंध लगाया गया है, जिससे बड़ी संख्या में भूमिहीन मजदूर प्रभावित होंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि मनरेगा को कमजोर करना कारपोरेट हितों को साधने की नीति का हिस्सा है। अंत में कांग्रेस ने मांग की कि सरकार मनरेगा को मूल स्वरूप में बहाल करे, न्यूनतम मजदूरी 400 रुपये प्रतिदिन निर्धारित करे और रोजगार, मजदूरी व जवाबदेही की संवैधानिक गारंटी सुनिश्चित करे। प्रेस वार्ता में कांग्रेस जिलाध्यक्ष बालकृष्ण पाठक सहित अन्य कांग्रेस नेता शामिल रहे।


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