पंजाब,22 दिसम्बर 2025। पंजाब के पटियाला से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। पंजाब पुलिस के पूर्व महानिरीक्षक अमर सिंह चहल ने सोमवार को संदिग्ध परिस्थितियों में खुद को गोली मार ली। इस घटना के बाद पूरे पुलिस महकमे और राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई है। आनन-फानन में उन्हें पटियाला के पार्क अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों की एक टीम उनकी जान बचाने की कोशिश कर रही है। चहल की स्थिति फिलहाल बेहद चिंताजनक बनी हुई है।
घर के भीतर चली गोली,सुसाइड नोट मिलने की चर्चा : रिटायरमेंट के बाद अमर सिंह चहल पटियाला में ही निवास कर रहे थे। सोमवार की सुबह अचानक उनके घर से गोली चलने की आवाज आई, जिससे आसपास के लोग और परिजन सन्न रह गए। सूत्रों के हवाले से खबर आ रही है कि पूर्व आईजी ने यह कदम उठाने से पहले एक सुसाइड नोट भी लिखा है। हालांकि,पुलिस प्रशासन ने अभी तक आधिकारिक तौर पर सुसाइड नोट की मौजूदगी की पुष्टि नहीं की है। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि आखिर ऐसी क्या वजह थी जिसने एक वरिष्ठ पूर्व अधिकारी को इतना आत्मघाती कदम उठाने पर मजबूर किया।
एसएसपी पटियाला का बयान और पुलिस की त्वरित कार्रवाई : पटियाला के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक वरुण शर्मा ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि जैसे ही कंट्रोल रूम को गोली चलने की सूचना मिली, पुलिस की टीमें तुरंत मौके पर पहुंच गईं। एसएसपी के मुताबिक, जब पुलिस अमर सिंह चहल के आवास पर पहुंची, तो वे खून से लथपथ और गंभीर हालत में थे। बिना समय गंवाए उन्हें पास के एक निजी अस्पताल (पार्क हॉस्पिटल) में भर्ती कराया गया।
बेअदबी और गोलीकांड
के मामलों से जुड़ा रहा है नाता
अमर सिंह चहल का नाम पिछले कुछ वर्षों से पंजाब के सबसे चर्चित और विवादास्पद मामलों में शुमार रहा है। वे 2015 में फरीदकोट में हुए बहबल कलां और कोटकपूरा गोलीकांड मामले में मुख्य आरोपियों में से एक रहे हैं। यह मामला सिखों के पवित्र ग्रंथ की बेअदबी के बाद हुए प्रदर्शनों के दौरान पुलिस द्वारा की गई फायरिंग से जुड़ा है।
चार्जशीट में शामिल थे बादल परिवार और कई दिग्गज अधिकारियों के नाम
एडीजीपी एलके यादव की अगुआई वाली विशेष जांच टीम ने जब इस मामले की जांच रिपोर्ट फरीदकोट कोर्ट में सौंपी थी, तो उसमें पंजाब की राजनीति और पुलिस प्रशासन के कई ‘बड़े चेहरों’ के नाम थे। इस चार्जशीट में पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल, पूर्व गृह मंत्री सुखबीर सिंह बादल और पूर्व डीजीपी सुमेध सिंह सैनी के साथ-साथ तत्कालीन डीआईजी अमर सिंह चहल को भी नामजद किया गया था। आरोप था कि इन अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग करने की साजिश रची या उसमें शामिल थे। कानूनी कार्रवाई का यह दबाव भी चहल के मानसिक तनाव की एक बड़ी वजह माना जा रहा है।
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