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नई दिल्ली@SIR की डेडलाइन 7 दिन बढ़ाई गई

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12 राज्यों में वोटर वेरिफिकेशन 11 दिसंबर तक चलेगा


नई दिल्ली,30 नवम्बर 2025। चुनाव आयोग ने 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिविजन की समय सीमा एक सप्ताह बढ़ा दी है। आयोग ने रविवार को कहा कि अब अंतिम मतदाता सूची 14 फरवरी 2026 को प्रकाशित की जाएगी। मतदाता जोड़ने-हटाने का एन्यूमरेशन पीरियड यानी वोटर वेरिफिकेशन अब 11 दिसंबर तक चलेगा, जो पहले 4 दिसंबर तक तय था। वहीं, पहले ड्राफ्ट लिस्ट 9 दिसंबर को जारी होनी थी, लेकिन अब इसे 16 दिसंबर को जारी किया जाएगा। दरअसल बिहार के बाद देश के 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में एसआईआर 28 अक्टूबर से शुरू हुआ है। इस प्रोसेस में वोटर लिस्ट का अपडेशन होगा। नए वोटरों के नाम जोड़े जाएंगे और वोटर लिस्ट में सामने आने वाली गलतियों को सुधारा जाएगा।
99.53′ फॉर्म लोगों तक पहुंचे
चुनाव आयोग ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि 51 करोड़ मतदाताओं के लिए बनाए गए गणना फॉर्म में से 99.53′ फॉर्म लोगों तक पहुंचा दिए गए हैं। इनमें से लगभग 79′ फॉर्म का डिजिटलीकरण भी पूरा हो चुका है। यानी यानी घर-घर से बीएलओ जो फॉर्म भरकर लाते हैं, उनमें लिखे नाम, पते और अन्य विवरण को ऑनलाइन सिस्टम में दर्ज किए जा चुके हैं।
कांग्रेस का आरोप-एसआईआर
प्रक्रिया में बीएलओ की मौत मर्डर है…

एसआईआर प्रक्रिया को लेकर लगातार विपक्ष हमलावर हैं। कांग्रेस ने प्रक्रिया के दौरान काम के दबाव के चलते जान गंवाने वाले बीएलओ की मौत को मर्डर बताया था। कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा था कि 20 दिनों में 26 बीएलओ की मौत दिनदहाड़े मर्डर जैसी है। सुप्रिया ने गोंडा के बीएलओ विपिन यादव का जिक्र करते हुए कहा कि उनके परिवार ने बताया है कि उन पर वोटर लिस्ट से पिछड़े वर्ग के लोगों के नाम हटाने का दबाव था। सुप्रिया ने कहा था कि यह कोई कहानी नहीं बल्कि देश के सामने एक कड़वा सच है। इतनी जल्दी क्या है? थोड़ा समय लेकर एसआईआर करवाओ। एसआईआर का मामला कोई छोटा मामला नहीं है। यह वोट चोरी का सबसे ताकतवर तरीका है, और इसीलिए इसका इतने खुलेआम इस्तेमाल किया जा रहा है।
चुनाव आयोग का ऐलान
बीएलओ को मिलेगी डबल सैलरी

चुनाव आयोग ने बूथ लेवल ऑफिसर्स की सैलरी 6000 से बढ़ाकर 12000 रुपए सालाना कर दी है। इसके अलावा वोटर रोल तैयार करने और उनमें बदलाव करने वाले बीएलओ सुपरवाइजर की सैलरी भी 12000 से बढ़ाकर 18000 रुपए कर दी गई है। जिस सरकारी कर्मचारी को बीएलओ का काम दिया गया है उसे यह पैसा उसकी सैलरी के अलावा अलग से दिया जाता है। आयोग ने जारी एक रिलीज में कहा कि पिछला ऐसा बदलाव 2015 में किया गया था। पहली बार इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स और असिस्टेंट इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स को भी मानदेय दिया जाएगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक देश के 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चल रही मौजूदा एसआईआर प्रक्रिया में कुल 5.32 लाख बीएलओ काम कर रहे हैं। हर एक बीएलओ के पास करीब 956 वोटर्स के लिस्ट रिवीजन का काम है।
आयोग बोला- एसआईआर
के लिए स्पेशल इंसेंटिव भी मिलेगा

चुनाव आयोग ने लिखा है…प्योर इलेक्टोरल रोल डेमोक्रेसी की नींव हैं। इलेक्टोरल रोल मशीनरी, जिसमें इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर , असिस्टेंट इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर,बीएलओ सुपरवाइजर और बूथ लेवल ऑफिसर शामिल हैं। ये सभी बहुत मेहनत करते हैं और बिना किसी भेदभाव के और ट्रांसपेरेंट इलेक्टोरल रोल तैयार करने में अहम भूमिका निभाते हैं। इसलिए कमीशन ने बीएलओ की सालाना सैलरी दोगुनी करने और इलेक्टोरल रोल तैयार करने और उनमें बदलाव करने वाले बीएलओ सुपरवाइजर की सैलरी बढ़ाने का फैसला किया है। आयोग ने लिखा कि कमीशन ने बिहार से शुरू होने वाले स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) के लिए बीएलओ के लिए 6,000 रुपए के स्पेशल इंसेंटिव को भी मंजूरी दी है।


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