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बीजिंग@आतंकवाद से लड़ने में चीन का साथ मांगा

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पीएम मोदी ने जिनपिंग को भारत आने का न्योता दिया


बीजिंग,31 अगस्त 2025 (ए)। सात साल बाद चीन पहुंचे पीएम नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की। दोनों के बीच 50 मिनट बातचीत हुई। बातचीत के बाद मोदी ने जिनपिंग को भारत में आयोजित ब्रिक्स 2026 में आने के लिए न्योता दिया। इससे पहले उन्होंने जिनपिंग के सामने आतंकवाद का मुद्दा उठाया। रिपोर्ट्स के मुताबिक मोदी ने इसे वैश्विक मुद्दा बताया और साथ देने की मांग की। वहीं, मीटिंग में जिनपिंग ने कहा कि पीएम मोदी से मिलकर खुशी हुई। ड्रैगन (चीन) और हाथी (भारत) को साथ आना चाहिए। समिट के बाद मोदी आधिकारिक स्वागत समारोह में पहुंचे। यहां एससीओ समिट में आए सभी नेताओं ने ग्रुप फोटो खिंचाई, जिसमें पीएम मोदी के साथ पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी मौजूद थे।
शी जिनपिंग का मोदी से आह्वान, साथ चलें ड्रैगन-हाथी
शी ने कहा, ‘‘दोनों पक्षों को अपने संबंधों को रणनीतिक ऊंचाइयों और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से देखना एवं संभालना होगा ताकि हमारे द्विपक्षीय संबंधों का निरंतर, मजबूत और स्थिर विकास हो सके।’’ चीन की सरकारी समाचार एजेंसी ‘शिन्हुआ’ की खबर के अनुसार,शी ने मोदी से कहा कि चीन और भारत प्रतिद्वंद्वी नहीं बल्कि सहयोगी हैं तथा दोनों देश एक-दूसरे के लिए खतरा नहीं बल्कि विकास के अवसर हैं। उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एकतरफा नीतियों पर स्पष्ट रूप से निशाना साधते हुए कहा कि दोनों देशों को बहुपक्षवाद को बनाए रखना चाहिए।

शी ने कहा कि भारत और चीन को एक बहुध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था बनाने और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को अधिक लोकतांत्रिक बनाने के लिए भी काम करना चाहिए।
एक-दूसरे को प्रतिद्वंद्वी के बजाय भागीदार के रूप में देखना चाहिए : चिनफिंग
राष्ट्रपति चिनफिंग ने अपने भाषण में भारत-चीन संबंध सुधारने को रेखांकित करने के लिए एक बार फिर हाथी और ड्रैगन के साथ-साथ नृत्य करने की उपमा दी। पिछले दिनों जब उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को पत्र लिखा था,तो उसमें भी इसका जिक्र था। हाल में विदेश मंत्री वांग ई ने अपनी भारत यात्रा के दौरान भी यही बात कही थी। चीन की तरफ से जारी बयान के मुताबिक,राष्ट्रपति चिनफिंग ने कहा कि 70 वर्ष पहले दोनों देशों के नेताओं द्वारा प्रतिपादित पंचशील सिद्धांतों को संजोना और लागू करना आवश्यक है। उन्होंने सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति व स्थिरता बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराई, ताकि सीमा विवाद समग्र संबंधों को परिभाषित न करे। दोनों देशों को एक-दूसरे को प्रतिद्वंद्वी के बजाय भागीदार के रूप में देखना चाहिए।


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