सावन की खबर अब आने लगी,
याद भोले की हमको दिलाने लगी,
साज धड़कन का फिर से बजने लगा,
मन भोले में मेरा रमनें लगा।
सावन की खबर …..
ये मौसम भी अब यूं बदलने लगे,
भोले के रंग में लगता है ढलने लगे,
दीप सारे ये तम में जलने लगे,
फूल भी सारे माटी में खिलने लगे।
सावन की खबर …..
भोलापन भोले का रास आने लगा,
सपनों में रंगोली बनाने लगा,
धुन कैसी भी साजो पे बजने लगे,
गीत होठों पर भोले का आने लगा।
सावन की खबर …….
नन्हा हनु भी हमसे ये कहने लगा,
भोले का संग मुझको भी जमने लगा,
होठों पर हंसी भी उभरने लगी,
जीवन की ये नैय्या फिर चलनें लगी।
सावन की खबर ….
माटी का कण-कण महकनें लगा,
जब मेघों से पानी बरसने लगा,
देखो भोले भी अब खिलखिलाने लगे,
चांद-तारे जमी पर आने लगे।
कार्तिकेय कुमार
गांधीनगर,इंदौर
मध्यप्रदेश
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