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बलरामपुर/शंकरगढ़@शिक्षक से जमीन तो राजस्व रिकॉर्ड में वापस हो गई पर इतने साल तक पहाड़ी कोरवा परिवार अपने ही जमीन से वंचित रहा उसका मुआवजा कौन देगा?

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-सुदामा राजवाड़े-
बलरामपुर/शंकरगढ़, 30 मई 2025 (घटती-घटना)। जिला बलरामपुर के शंकरगढ़ से एक मामला सामने आया है जिसमें विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा से आने वाले एक परिवार की कई एकड़ जमीन दबंग व राजनीतिक पकड़ रखने वाले शिक्षक ने फर्जीवाड़ा करके उनकी जमीन अपने नाम चढ़ावा ली थी और 10-12 साल से उस जमीन पर कजा जबरदस्ती कर रखा था, उस जमीन पर वह खेती-बाड़ी करके धान भी बेच रहे थे वहीं पहाड़ी कोरवा परिवार मजदूरी करके जीवन यापन कर रहा था, जबकि उसके पास खुद की इतनी जमीन होने के बाद भी वह चाहता तो फसल लगाकर जीवन यापन कर सकता था पर दबंग शिक्षक के कब्जे में जमीन होने की वजह से उसे मजदूरी करनी पड़ रही थी, मजदूरी के चक्कर में उस परिवार का एक व्यक्ति भी स्वर्ग सिधार गया पर उन्हें लंबे समय तक न्याय नहीं मिला,अब जब भाजपा की सरकार आई है और यह लड़ाई थोड़ा तेज हुई है शिकवा शिकायत तक पहुंची है,तब जाकर दबंग शिक्षक से जमीन शासकीय रिकॉर्ड में वापस कर दी गई है,पर अभी भी न्याय की मांग हो रही है न्याय की मांग पहाड़ी कोरवा परिवार इस विषय को लेकर कर रहा है कि क्योंकि इस जमीन की वजह से उनके एक परिवार के सदस्य की मौत हो गई वहीं इतने साल तक वह जमीन पर फसल नहीं लगा पाए और उस जमीन पर कोई और फसल लगाकर उस जमीन से कमाई करता रहा उन्हें जो इतने साल तक फसल न लगाने का नुकसान हुआ उसके मुआवजा की मांग कर रहे हैं तो वहीं उनके परिवार के सदस्य की मौत जिसके कारण हुआ है उस पर आपराधिक प्रकरण दर्ज हो इसकी भी मांग उनके द्वारा की जा रही है पर अभी तक ऐसा कुछ भी नहीं हो पाया है ना ही शिक्षक पर आपराधीक प्रकरण दर्ज हुए हैं और ना ही शिक्षक के द्वारा उन परिवार को मुआवजा दिया गया है।
यह है पूरा मामला
शंकरगढ़ विकासखण्ड के ग्राम पंचायत खैरडीह में पहाड़ी कोरवाओं का जमीन फर्जी तरीके से एक शिक्षक द्वारा जमीन अपने नाम पर चढ़वाने का मामला उजागर हुआ था जिसमे आवेदको ने बलरामपुर कलेक्टर से कार्यवाही हेतु गुहार लगाई थी लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी कोई कार्यवाही नही होने से राजनीतिक पकड़ रखने वाले शिक्षक के हौसले बुलंद है। शिवबरत पिता लखनसाय जाती कोरवा उम्र 40 वर्ष,रामब्रत पिता लखनसाय जाती कोरवा उम्र 35 वर्ष बानेश्वर पिता हरिहर जाती कोरवा उम्र 41 वर्ष धनेश्वर पिता बाबू राम उम्र 36 वर्ष यह सभी राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कोरवा जाती के है और शंकरगढ़ के ग्राम पंचायत खैरडीह में निवास करते है। इन्होंने न्यायलय कलेक्टर बलरामपुर को आवेदन देकर बताया था कि इनकी जमीन फर्जी तरीके से पटवारी व बिहारी लाल भगत जो कि पेशे से शिक्षक है इनकी सेटलमेंट की जमीन को अपने नाम पर चढ़वा ली गई है और सोसायटी में उनकी जमीन का पंजीयन कराकर धान बेचा जा रहा है व खाद निकाला जा रहा है। कोरवा जाती के लोगो ने बताया है कि 13 प्लाट को लगभग 13 एकड़ जमीन पटवारी के साथ साठ-गांठ कर जमीन शिक्षक बिहारी लाल द्वारा अपने नाम पर दर्ज करा लिया गया है जो कि कोरवा जाती के सेटलमेंट की जमीन है। कोरवा जाती के लोगों ने आवेदन में बताया है कि बिहारी लाल भगत पेशे से शिक्षक है व राजनैतिक पकड़ रखते है जिस वजह से उनको जमीन के किसी कार्यवाही के लिए डराते-धमकाते भी रहते है व अनुभागीय कार्यलय तक जाने नही देते है। जबकि शिक्षक के पास खुद की पर्याप्त भूमि है फिर भी जमीन हड़प कर कोरवाओं को दबाना चाहते है। कोरवा जाती के लोगों ने बताया कि ऋ ण पुस्तिका में भी उनके पिताजी का नाम दर्ज है लेकिन ऑनलाइन बी 1 खसरा में बिहारी लाल का नाम आ रहा है यह पटवारी के साथ साठ-गांठ कर कब नाम बदल गया इसकी जानकारी इनको भी नही है। आवेदन में छल से लिया गया जमीन कोरवा जाती के लोगो का जल्द न्याय कर वापस दिलाने की गुहार लगाई है और बताया है कि जितनी राशि की धान उनके जमीन में बिक्री हुआ है उसकी राशि भी उनको दी जाए व ऐसे धांधलीबाज शिक्षक को जल्द से जल्द निलंबित किया जाए,शिकायत के दौरान बलरामपुर कलेक्टर राजेंद्र कुमार कटारा ने आश्वासन दिया था कि जल्द से जल्द जाँच करायी जाएगी व दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही भी की जाएगी लेकिन आज तक राष्ट्रपति के दाक पुत्रो को न्याय नही मिल सका है। ग्राम पंचायत खैरडीह के ग्राम धसनी में शिक्षक बिहारी लाल भगत पदस्थ है और वहाँ के लोगो ने बताया कि बिहारी लाल बहुत ही कम स्कूल आते है।
दबंग शिक्षक को आखिर किस नेता का है संरक्षण…जो कोरवा जाति के पीडि़तों की शिकायत पर राजस्व विभाग नहीं कर पा रहा है कार्रवाई?
जिस शिक्षक ने कोरबा जनजाति के चार व्यक्तियों की जमीन फर्जी तरीके से अपने नाम दर्ज कर ली है वह काफी ही राजनीतिक पकड़ के साथ दबंग व्यक्तियों में इनकी गिनती आती है यह निचले तपके के गरीब आदिवासियों को दबाकर राजनीति करते हैं। सत्ता किसी की भी रहे पर उनके विरोध करने की हिम्मत किसी की नहीं होती है यही वजह है कि 10-12 साल से अपने ही जमीन पाने के लिए अशिक्षित राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहे जाने वाली जाति के चार व्यक्ति भटक रहे हैं उन्हें शिकायत करने से भी रोक दिया जाता है और यदि शिकायत होती भी है तो कोई कार्यवाही नहीं हो पाता इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह शिक्षक कितने प्रभावशाली व्यक्ति हैं।
पीडि़त कोरवा परिवार की संभाग आयुक्त सरगुजा से मांग
पीडि़त कोरवा परिवार ने संभाग आयुक्त सरगुजा से कई मांग की है जिसमें उन्होंने यह मांग की है कि उनके हक की जमीन को वर्षों तक कजा कर अपना बनाए रखना और उसपर खेतीबाड़ी करने के आरोप में दबंग शिक्षकों पर कार्यवाही की जाए धोखाधड़ी सहित छल की कार्यवाही की जाए,दबंग शिक्षकों के विरुद्ध कानूनी कार्यवाही भी की जाए वहीं उनके विरुद्ध निलंबन की कार्यवाही भी की जाए जिससे वह दंडित हो सकें और भविष्य में किसी के साथ ऐसी धोखाधड़ी करने से पहले कई बार सोचें,कई वर्षों तक जिस जमीन पर दबंग शिक्षकों ने कब्जा जमाए रखा और उस जमीन पर खेती भी किया और उसका धान सोसाइटी में बेचा उस राशि का भी भुगतान उन्हें कराया जाए। पहाड़ी पीडि़त कोरवा परिवार ने यह भी मांग की है कि अपनी ही जमीन वापस पाने के प्रयास में उनके परिवार के एक सदस्य की जान चली गई और आरोपियों के विरुद्ध दोषियों के विरुद्ध कोई कार्यवाही नहीं हुई जिससे उन्हें भी जान का खतरा है जिसके लिए आरोपियों को दोषियों को सजा दी जाए।
संभाग आयुक्त क्या करते हैं त्वरित न्याय…क्या पहाड़ी कोरवा परिवार की मांग वह करेंगे पूरी…
अब देखना होगा कि संभाग आयुक्त सरगुजा क्या पीडि़त पहाड़ी कोरवा परिवार के आवेदन पर त्वरित न्याय करते हैं क्या उन्हें जल्द न्याय दिलाते हैं या उन्हें आगे और भटकना होगा,पीडि़त पहाड़ी कोरवा परिवार की विभिन्न मांगों को लेकर जो दोषियों के विरुद्ध कार्यवाही को लेकर की गई है में क्या निर्णय लेते हैं संभाग आयुक्त सरगुजा यह देखने वाली बात होगी क्योंकि मामला विशेष पिछड़ी जनजाति से जुड़ा हुआ है।
फर्जी तरीके से जमीन को अपने नाम करवा कर शिक्षक उसी खाते में बेच रहा था फर्जी धान
शिकायतकर्ता ने बताया कि जमीन अभी भी उनके कब्जे में है और बिना जानकारी दिए ही पटवारी व राजस्व के लोगों से मिली भगत करके वह जमीन अपने नाम करवा लिए और उसी जमीन पर पिछले कई सालों से धान खरीदी केंद्र में पंजीयन करा कर उसे जमीन पर धान बेच रहे हैं जबकि उसी जमीन पर उनके द्वारा धान लगाया ही नहीं जा रहा। यह कारनामा इनके द्वारा तब हुआ था जब सरगुजा से अलग होकर बलरामपुर जिला बना था इस दौरान उक्त शिक्षक ने अपने शिक्षित होने का लाभ उठाते हुए अशिक्षित व्यक्ति को उसके जमीन से बेदखल करने के रणनीति बना ली और फर्जी तरीके से जमीन अपने नाम चढ़ावा लिया यह और आरोप शिकायतकर्ता का है।


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