रायपुर,23 मई 2025। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बस्तर अंचल के नारायणपुर जिले में मल्लखंभ जैसे पारंपरिक खेल के जरिए सामाजिक बदलाव की अद्भुत मिसाल पेश की जा रही है। ‘अबूझमाड़ मल्लखंभ अकादमी’ के संस्थापक एवं विशेष कार्यबल के अधिकारी मनोज प्रसाद और उनके प्रशिक्षु राकेश कुमार वरदा की कहानी यह दर्शाती है कि खेल न सिर्फ व्यक्तित्व को गढ़ता है, बल्कि पूरे समाज को नई दिशा देने में सक्षम है। मनोज प्रसाद, एक पूर्व राष्ट्रीय धावक, ने 2017 में नारायणपुर में अबूझमाड़ मल्लखंभ अकादमी की स्थापना की। इस अकादमी में 5 से 15 वर्ष के आदिवासी बच्चों को निःशुल्क प्रशिक्षण, आवास, भोजन और शिक्षा की सुविधा दी जाती है। इन बच्चों में से अधिकांश अत्यंत गरीब, निरक्षर और मुख्यधारा से कटे हुए परिवारों से आते हैं। प्रसाद न केवल प्रशिक्षक हैं, बल्कि इन बच्चों के लिए एक पिता के समान हैं। वे स्वयं अपनी आय से उनकी जरूरतें पूरी करते हैं। हालांकि अब पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के सहयोग से अकादमी को कुछ सहायता मिलनी शुरू हुई है।
राकेश कुमार वरदा: अबूझमाड़ से अंतरराष्ट्रीय मंच तक
अकादमी के सबसे होनहार खिलाड़ी राकेश कुमार वरदा ने खेलो इंडिया बीच गेम्स 2025 में मल्लखंभ (डेमो खेल) में स्वर्ण पदक जीतकर सबका ध्यान आकर्षित किया। राकेश नारायणपुर जिले के आदिवासी गांव कुटुल के निवासी हैं और क्षेत्र के पहले मल्लखंभ खिलाड़ी हैं। उन्होंने अब तक राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर 30 से अधिक पदक जीते हैं। राकेश ने मात्र आठ वर्ष की उम्र में मल्लखंभ की शुरुआत की थी। उनके खेल कौशल का प्रमाण 2022 में लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज है, जिसमें उन्होंने मल्लखंभ पोल पर 1 मिनट 6 सेकंड का सबसे लंबा हैंडस्टैंड किया था। 2023 में वे और उनकी टीम इंडियाज़ गॉट टैलेंट सीजन 10 के विजेता बने थे। राकेश ने हाल ही में बिहार में आयोजित खेलो इंडिया यूथ गेम्स में एक रजत और तीन कांस्य पदक जीते,जबकि इससे पूर्व पंचकुला,गोवा,उज्जैन और गुजरात के राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी अनेक पदक जीत चुके हैं।
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