-डॉ. राजकुमार मिश्र-
अहमदाबाद, ,10 नवंबर 2022(ए)। गुजरात मे सत्ताविरोधी लहर का सामना करने से पहले ही भाजपा के मुख्यमंत्री समेत करीब तीन दर्जन मंत्रियों व विधायकों ने खुद ही आग्रह करके हाईकमान से चुनाव मैदान से दूर रहने की मंजूरी हासिल कर ली है।आज घोषित उम्मीदवारों की लिस्ट में उक्त सभी अनिच्छुक जनप्रतिनिधियों को दरकिनार करके उनकी सीटों पर नए चेहरों पर दांव लगाया गया है भले ही उक्त बदलाव के लिए स्वेच्छा को कारण बताकर पल्ला झाड़ लिया गया मगर इससे गुजरात के आम लोगों में यह चर्चा भी चल पड़ी है कि खुद मुख्यमंत्री तक अगर अन्य कई प्रतिनिधियों की तरह आगे बढ़कर अपनी सीट पर किसी दूसरे को खड़ा कर देने का आग्रह करें तो इसका यह अर्थ भी हो सकता है कि वे सभी मोदी जी के नेतृत्व का अब कोई भविष्य नहीं देख पा रहे हैं।अब वे अपने निर्वाचन क्षेत्र में बनी बनाई साख और धाक की मिट्टी पलीद होते नही देखना चाहते।
गुजरात मे अपने काम और राज्य स्तर के किसी भी नेता के नाम की बजाय सिर्फ और सिर्फ मोदीजी के चेहरे को आगे रखकर विधान सभा मे बहुमत के साथ वापसी का सपना पूरा करने की राह को स्वेच्छा से हथियार डालकर मैदान से बाहर हो चुके कल तक के शूरमा कितनी आसान या कठिन बना पाते हैं यह तो चुनाव परिणाम से ही स्पष्ट होगा।
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