नई दिल्ली, 11 अक्टूबर 2022। आम जनता के बीच नेता का मुखौटा लगाकर जनहितैषी बनने का नाटक करने वाले नेताओ के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट सख्त हो गया है। सभी प्रदेशो इन नेताओ के खिलाफ उच्च न्यायालयो मे आपराधिक मामले लबित है। उच्चतम न्यायालय ने सभी उच्च न्यायालयो को सासदो-विधायको के खिलाफ पाच साल से अधिक समय से लबित आपराधिक मामलो और उनके शीघ्र निपटारे के लिए उठाये गये कदमो समेत पूरा विवरण उपलबध कराने को कहा।
न्यायमूर्ति डीवाई चद्रचूड़ और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ ने 10 अगस्त 2021 को दिये गये न्यायालय के आदेश मे सशोधन कर दिया जिसमे यह कहा गया था कि न्यायिक अधिकारियो, जो सासदो-विधायको के खिलाफ मामले की सुनवाई कर रहे है, को अदालत की पूर्व मजूरी के बिना बदला नही जा सकता।
शीर्ष अदालत ने न्यायमित्र वरिष्ठ अधिवक्ता विजय हसारिया की दलील को सज्ञान मे लेते हुए कहा कि न्यायिक अधिकारियो द्वारा बड़ी सख्या मे आवेदन दायर किये गये है जिसमे विशेष अदालत के प्रभार से मुक्त करने की अनुमति देने की माग की गई है, क्योकि या तो उनकी प्रोन्नति हो गई है या फिर स्थानातरण हो चुका है। शीर्ष अदालत ने 10 अगस्त 2021 के आदेश मे सशोधन करते हुए कहा कि उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को यह अधिकारी होगा कि वह ऐसे न्यायिक अधिकारियो के तबादले का आदेश दे सकेगे।
शीर्ष अदालत ने कहा कि सभी उच्च न्यायालयो को चार सप्ताह के अदर एक हलफनामा दाखिल करके सासद-विधायक के खिलाफ पाच साल से अधिक समय से लबित आपराधिक मामलो की सख्या और उनके शीघ्र निपटारे के लिए उठाए गए कदमो के बारे मे बताना होगा। पीठ अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय द्वारा वर्ष 2016 मे दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमे आपराधिक मामलो मे दोषी ठहराए जाने पर राजनेताओ के चुनाव लड़ने पर आजीवन प्रतिबध लगाने की माग के अलावा सासद-विधायक के खिलाफ दर्ज मामलो मे तेज सुनवाई की माग की थी।
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