नई दिल्ली, 21 सितम्बर 2022। आज भी भारत मे कई प्रथाए ब्रिटिश हुकूमत के समय से चली आ रही है। आजाद हिदुस्तान मे भी इनको ढोया रहा है। इसी के मद्देनजर प्रधानमत्री नरेन्द्र मोदी के निर्देशो के अनुरूप जनरल मनोज पाडे के नेतृत्व मे भारतीय सेना ने औपनिवेशिक काल की प्रथाओ और इकाइयो व रेजिमेटो के नामो से छुटकारा पाने की प्रक्रिया शुरू की है।
भारत मे अब भारतीय सेना पुराने नियमो और नीतियो की समीक्षा करने जा रही है। ये नियम और नीतिया ब्रिटिश काल से चली आ रही है। इस बैठक मे यूनिटो और रेजीमेटो के नामो की भी समीक्षा की जाएगी। भारतीय सेना की तरफ से आए बयान मे कहा गया कि कुछ विरासत प्रथाओ की समीक्षा की आवश्यकता होती है, जैसे औपनिवेशिक और पूर्व-औपनिवेशिक काल से रीति-रिवाज, परपराए, सेना की वर्दी
सेना की ओर से कहा गया कि सदियो पु्राने चली आ रही चीजो को बदलाव की आवश्यकता होती है. सेना की कुछ इकाइयो के अग्रेजी नाम, नाम बदलना इमारतो, प्रतिष्ठानो, सड़को, पार्को सहित सभी की समीक्षा की जाएगी। सेना मानद कमीशन और बीटिग रिट्रीट और रेजिमेट सिस्टम जैसे समारोहो की भी समीक्षा करेगी। सेना ने कहा कि पुरानी और अप्रभावी प्रथाओ से दूर जाना आवश्यक है। यूनिट मे नाम और प्रतीक चिन्ह, औपनिवेशिक काल के शिखर के साथ-साथ अधिकारियो की मेस प्रक्रियाओ और परपराओ और रीति-रिवाजो की भी समीक्षा होगी।
आज होने जा रही है अहम बैठक
सूत्रो के मुताबिक सेना के एडजुटेट जनरल लेफ्टिनेट जनरल सी बसी पोनप्पा की अध्यक्षता मे आज बैठक होने वाली है। आज इस इस आतरिक बैठक मे इस मुद्दे पर विस्तृत बातचीत हो सकती है। जानकारी के मुताबिक यह प्रयास अमृत काल के तहत हो रहा है। 2021 मे प्रधानमत्री नरेद्र मोदी ने भारत की आजादी के 75वे वर्ष को आजादी का अमृतकाल कहा था। इसके तहत भारत मे आजादी का अमृत महोत्सव भी मनाया गया था।
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