दोनो मोर्चो पर दिखाई समझदारी
नई दिल्ली, 19 सितम्बर 2022। शघाई सहयोग सगठन सम्मेलन भले ही खत्म हो गया है लेकिन इसकी गूज अब भी बरकरार है। इसमे पीएम नरेन्द्र मोदी ने जिस तरह से यूक्रेन युद्ध पर राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के सामने अपनी प्रतिक्रिया जाहिर की है उसने भारत को लेकर इस मुद्दे पर स्थिति को काफी स्पष्ट कर दिया है। भारत ने इस सम्मेलन मे दिए पीएम मोदी के भाषण के बाद यूएन मे भी यूक्रेन का साथ देते हुए उसके पक्ष मे वोटिग की।
यूक्रेन का दिया साथ
ये वोटिग इस आम सभा मे यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेस्की के वर्चुअल भाषण को लेकर हुई थी। गौरतलब है कि यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद भारत ने इस बात का पूरा ध्यान रखा है कि रूस से उसके सबध खराब न हो। यही वजह थी कि भारत ने यूएन सुरक्षा परिषद मे हर बार रूस के खिलाफ हुई वोटिग से बाहर रहना ही स्वीकार किया।
भारत ने बेहतर कूटनीति का दिया परिचय
भारत ने दरअसल, इस मोर्चे पर जिस कूटनीति का परिचय दिया है वो वास्तव मे तारीफ के ही काबिल है। इस दौरान जब रूस पर आर्थिक प्रतिबधो के चलते विश्व के कई देशो ने उससे कन्नी काट ली थी तब भारत ने न सिर्फ रूस से सस्ती दरो पर तेल खरीदा बल्कि उसकी हिस्सेदारी भी बढ़ाई। सरकारी आकड़े इस बात की तस्दीक कर रहे है। इस तरह से भारत ने रूस को दो मोर्चो पर एक साथ साधने मे सफलता हासिल की। इस दौरान रूस से हुए व्यापार की वजह से भारत को मुनाफा भी हुआ है। ये मुनाफा सस्ती दर पर तेल खरीद से हुआ है।
रूस से खरीदा सस्ती कीमत पर तेल
रूस पर लगे प्रतिबधो के बाद भारत ने रूस से तेल खरीदना जारी रखा। इस तरह से रूस के लिए चीन के बाद भारत उसके तेल का दूसरा सबसे बड़ा खरीददार बन गया। इस युद्ध की शुरुआत के दौरान भारत अपने कुल आयात का सिर्फ 1 फीसद तेल ही रूस से खरीद रहा था। लेकिन प्रतिबधो के बाद ये बढ़कर बीते सात माह मे करीब 12 फीसद तक हो गया है। इस वर्ष जुलाई मे सऊदी अरब के बाद रूस भारत का दूसरा सबसे बड़ा तेल निर्यातक बन गया था।
भारत को तेल निर्यात करने वाला तीसरा सबसे बड़ा सप्लायर बना रूस
अगस्त मे इसमे कुछ गिरावट जरूर दिखाई दी थी जिसके चलते रियाद दूसरे और रूस तीसरे नबर पर भारत के लिए सबसे बड़ा तेल सप्लायर बन गया था। सरकार के आकड़ो के मुताबिक अप्रैल से जुलाई के बीच भारत ने रूस से बीते साल की इसी अवधि के मुकाबले 8 गुना अधिक का तेल आयात किया है। भारत ने रूस पन लगे प्रतिबधो का पूरा फायदा उठाया जिसकी वजह से उसको सस्ता तेल मिला। बता दे कि भारत अपनी जरूरत का करीब 80 फीसद से अधिक तेल बाहरी दुनिया से आयात करता है।
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