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मणिपुर@मणिपुर मे जेडीयू को झटका

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6मे से 5 विधायक बीजेपी मे शामिल सुशील मोदीबोले-पार्टी के पास विलय या विलीन यही दो विकल्प बचे है
मणिपुर, 03 सितम्बर 2022।
बीजेपी को छोड़कर हाल ही मे बिहार मे नीतीश कुमार की अगुवाई मे महागठबधन की सरकार सत्ता पर काबिज हुई है. इस झटके के बाद से बीजेपी भी राष्ट्रीय स्तर पर पूरी तरह सक्रिय नजर आ रही है और एक के बाद एक नीतीश कुमार की जेड़ीयू को तगड़े झटके भी दे रही है. बता दे कि अरुणाचल प्रदेश के बाद अब मणिपुर मे भी जेडीयू विधायको ने नीतीश कुमार का साथ छोड़कर बीजेपी का दामन थाम दिया है.छ्वष्ठ के 6 मे से 5 विधायक बीजेपी मे शामिल हो गए है. इस दलबदल से जेडीयू सकते मे है तो बिहार मे बीजेपी काफी खुश नजर आ रही है.
इसी सिलसिले मे एबीपी न्यूज ने बीजेपी सासद और बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम सुशील मोदी से बात की. सुशील मोदी ने कहा कि नीतीश कुमार को टेशन है कि मणिपुर और अरूणाचल प्रदेश मे उनकी पार्टी (जेडीयू) विलीन हो गई है. . जदयू का या तो विलय होगा या पार्टी विलीन हो जाएगी. जदयू के पास विलय या विलीन यही दो विकल्प बचे भी है.
तोड़ने मे विश्वास नही करते है- सुशील मोदी
सुशील मोदी ने इस दौरान कहा कि हमने आज तक किसी को भी न तोड़ा है न तोड़ने मे विश्वास करते है. जदयू के लोगो ने बीते 15 सालो मे काग्रेस, राजद के लोगो को तोड़ने का काम किया है. उन्होने नीतीश कुमार पर तज कसते हुए कहा कि अगर कोई पीएम के उम्मीदवार बन जाए तो उनको मुबारक….. ये नरेद्र मोदी का मुकाबला नही कर सकते है. इनकी समाज मे क्रेडिबिलिटी नही है. जिस दल ने 10 साल मे 7 बार अपने सहयोगी दलो को बदल दिया कभी इनके, कभी पुराने, कभी नए… बिहार मे इनकी कोई विश्वसनियता नही है. सुशील मोदी ने ये भी कहा कि दावेदारी करने क्या लगते है? ये जो दिन मे सपना देख रहे है…. कभी केसीआर को बुलाते है… कभी किसी को… सपना चूर चूर हो जाएगा।
जेडीयू के विधायक पहले भी बीजेपी मे हो चुके है शामिल
ऐसा पहली बार नही हुआ जब जेडीयू के विधायक पार्टी छोड़कर बीजेपी मे शामिल हुए है. इसे लेकर जेडीयू ने नाराजगी भी जाहिर की है लेकिन विधायको का पार्टी छोड़ने का सिलसिला थमने का नाम नही ले रहा है. इससे पहले साल 2019 मे जेडीयू के एनडीए मे रहते हुए अरुणाचल प्रदेश मे जेडीयू ने 7 सीटो पर जीत हासिल की थी. इनमे से 6 विधायक बीजेपी मे शामिल हो गए थे.
फिलहाल जेडीयू विधायको के दलबदल को लेकर पार्टी काफी चितित है और इस मुद्दे को गभीरता से लेते हुए चितन और मथन भी शुरू हो चुका है।


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