नई दिल्ली, 09 अगस्त 2022। आगामी गुजरात विधानसभा चुनाव को लेकर तैयारी मे जुटी आम आदमी पार्टी गुजरात मे दिल्ली के विकास मॉडल को गुजरात मे भी लागू कर मुफ्त बिजली और पानी जैसी चुनावी घोषणाओ के साथ चुनावी मैदान मे उतरना चाहती है। लेकिन चुनाव के दौरान मुफ्त’ की घोषणाओ या फ्रीबीज का मुद्दा गर्माया हुआ है। इसी बीच जनहित याचिका के खिलाफ आम आदमी पार्टी ने भी सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। पार्टी की तरफ से मुफ्त बिजली और मुफ्त पानी जैसी चुनावी घोषणाओ को ‘असमानता वाले समाज’ के लिए अहम बताया गया है। हाल ही मे सुप्रीम कोर्ट ने यह पाया था किसी भी पार्टी की तरफ से ससद मे इसे लेकर बहस की सभावनाए नही है, क्योकि सभी इसे जारी रखना चाहते है।
भारतीय जनता पार्टी की दिल्ली इकाई के पूर्व प्रवक्ता अश्विनी उपाध्याय की तरफ से दायर जनहित याचिका मे राजनीतिक दलो के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माग की गई थी। इधर, आप का कहना है कि मुफ्त पानी, मुफ्त बिजली या मुफ्त परिवहन फ्रीबीज नही है, बल्कि असमाना समाज के लिए ये बेहद जरूरी है। 3 अगस्त को उपाध्याय की याचिका पर विचार करते हुए सीजेआई एनवी रमणा ने कहा था कि कोई भी सियासी दल फ्रीबीज को जाने नही देना चाहता, यहा तक कि केद्र सरकार ने भी इसे ‘आर्थिक आपदा का रास्ता’ बताया था। उन्होने भारत निर्वाचन आयोग से इस परेशानी से निपटने के लिए रास्ते तलाशने की अपील की थी।
आप ने आरोप लगाया कि याचिकाकर्ता एक विशेष राजनीतिक एजेडे को आगे बढ़ाने के लिए जनहित याचिका माध्यम का उपयोग करने का प्रयास कर रहे है। अर्जी मे कहा गया है कि याचिकाकर्ता ने किसी विशेष सत्तारूढ़ दल के साथ अपने वर्तमान या पिछले सबधो का खुलासा नही किया है और इसके बजाय खुद को एक ‘सामाजिक राजनीतिक कार्यकर्ता’ के रूप मे पेश किया है।
अर्जी मे कहा गया है, ‘याचिकाकर्ता के सत्तारूढ़ भाजपा के साथ मजबूत सबध है और वह पूर्व मे इसके प्रवक्ता और इसकी दिल्ली इकाई के नेता के रूप मे कार्य कर चुके है। जनहित के नाम पर याचिकाकर्ता की याचिकाए, अक्सर पार्टी के राजनीतिक एजेडा से प्रेरित होती है तथा पूर्व मे इस न्यायालय की आलोचना के दायरे मे आए है।
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