लखनऊ, 19 जुलाई 2022। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने बाबरी विध्वस मामले मे पूर्व उप प्रधानमत्री लालकृष्ण आडवाणी, उार प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमत्री कल्याण सिह, भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती, विनय कटियार, साध्वी ऋतभरा, बृजभूषण शरण सिह समेत सभी 32 आरोपियो को बरी किए जाने के फैसले को चुनौती देने वाली पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई की. इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने याचिका को आपराधिक याचिका मे बदलने का आदेश दिया सुनवाई की अगली तारीख 1 अगस्त तय की.
यह आदेश न्यायमूर्ति दिनेश कुमार सिह की पीठ ने दिया. हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति दिनेश कुमार सिह ने आदेश मे कहा कि सभी 32 आरोपियो को बरी करने के खिलाफ दायर पुनरीक्षण याचिका सुनवाई योग्य नही थी, इसलिए उन्होने अपने कार्यालय को सशोधन कर याचिका को आपराधिक अपील के रूप मे बदलने का निर्देश दिया. इस याचिका पर सुनवाई पहले 11 जुलाई को होनी थी, लेकिन वकीलो ने स्थगन का अनुरोध किया था. पीठ ने अनुरोध स्वीकार करते हुए इसे सोमवार के लिए सूचीबद्ध किया, साथ ही आगाह किया था कि वह सुनवाई दोबारा स्थगित नही करेगी.
पीठ अयोध्या के दो निवासियो हाजी महमूद अहमद और सैयद अखलाक अहमद की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करेगी. याचिका मे कहा गया है कि दोनो याची इस मामले मे न सिर्फ गवाह थे, बल्कि घटना के पीडि़त भी है. कारसेवको ने 6 दिसबर 1992 को बाबरी मस्जिद को गिरा दिया था. सीबीआई की विशेष अदालत ने इस मामले मे 30 सितबर 2020 को आरोपी के रुप पर नामजद सभी 32 आरोपियो को बरी कर दिया था.
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