तमिलनाडु से जुड़ी एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें एक्ट्रेस और पूर्व नर्स रह चुकी जूली ने चौंकाने वाले आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया है कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और एक्टर विजय के समर्थकों और उनकी पार्टी तमिलगा वेट्ट्री कझगम के सोशल मीडिया ट्रोलिंग अभियान के कारण उनका मिसकैरेज हो गया। इस आरोप के बाद मामला राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। जूली ने इस संबंध में चेन्नई पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है और सोशल मीडिया पर हो रही कथित ट्रोलिंग और ऑनलाइन हैरेसमेंट पर गंभीर आपत्ति जताई है। उन्होंने आरोप लगाया कि लगातार मानसिक दबाव और ऑनलाइन उत्पीड़न के कारण उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर गंभीर प्रभाव पड़ा, जिसके चलते उन्हें गर्भपात का सामना करना पड़ा। मीडिया से बातचीत में उन्होंने बताया कि उन्होंने पहली बार मार्च में कथित ऑनलाइन उत्पीड़न के मामले में पुलिस से संपर्क किया था और आठ लोगों के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी। उनके अनुसार, शिकायत दर्ज कराने के बाद भी उन्हें अपेक्षित कार्रवाई नहीं मिली और मामले को अलग दिशा में देखा गया। जूली ने यह भी दावा किया कि बाद में उन्हें एक नोटिस मिला, जिसमें कहा गया कि उनका मामला सिविल मानहानी के तहत आता है, न कि क्रिमिनल डिवीजन में। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया को लेकर उन्हें स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई और उन्हें प्रशासनिक स्तर पर भ्रम की स्थिति का सामना करना पड़ा। इसके अलावा उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राजनीतिक बदलाव के बाद, जब राज्य में ष्ठरू्य की जगह भ्ङ्क्य से जुड़े राजनीतिक माहौल बना, तो उनके मामले में नए नोटिस जारी किए गए। हालांकि, उन्होंने इस पर विस्तृत जानकारी न होने की बात कही। एक्ट्रेस ने यह भी दावा किया कि इन घटनाओं के बाद उनके खिलाफ 15 लाख रुपये के कथित किडनी स्कैम से जुड़े आरोप भी सामने आए, जिससे उनकी स्थिति और अधिक जटिल हो गई है। उनका कहना है कि यह सभी घटनाएं एक सुनियोजित तरीके से उन्हें मानसिक रूप से परेशान करने के लिए की जा रही हैं। इस पूरे मामले में तमिलगा वेत्त्री कझगम की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं पुलिस सूत्रों के अनुसार, शिकायत की जांच की जा रही है और सभी पहलुओं पर ध्यान दिया जा रहा है। यह मामला सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग, ऑनलाइन उत्पीड़न और उसके प्रभावों को लेकर एक बार फिर बहस का विषय बन गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बढ़ती नफरत और ट्रोलिंग को रोकने के लिए सख्त निगरानी और प्रभावी कानूनी कार्रवाई की आवश्यकता है।
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