लखनऊ, 11 जून 2022। उारप्रदेश के मुख्यम΄त्री योगी आदित्यनाथ ने आजीवन सजा भुगत रहे कैदियो΄ को 60 साल से पहले रिहा करने का फैसला किया है। सीएम योगी के इस फैसले से सैकड़ो΄ कैदियो΄ को राहत मिलने वाली है। नई कारावास नीति के तहत समय पूर्व कैदियो΄ की रिहाई पर विचार किया जाएगा।
हाला΄कि इसके लिए दो शर्ते है΄। पहली शर्त ये कि कैदी को बिना छूट के दोषी ने जेल मे΄ 16 साल की सजा पूरी की हो। इसके अलावा दूसरी शर्त ये कि कैदी की रिहाई तभी होगी जब उसने छूट के साथ 20 साल की सजा पूरी की हो। इसके अलावा एक और शर्त है और वो ये कि इसका फायदा सिर्फ हत्या के मामले मे΄ दोषी कैदी को ही मिलेगा। नई कारावास नीति के तहत हत्या का दोषी जिसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है उसे समय से पहले रिहा करने पर विचार किया जाएगा। समय पूर्व रिहाई की नीति यूपी सरकार ने साल 2018 मे΄ ही तैयार कर ली थी लेकिन समय सीमा का निर्धारण नही΄ हो पाया था। अब इसपर फैसला लिया गया है।
2021 मे΄ आजीवन कारावास मामले मे΄ रिहाई की उम्र 60 साल तय की गई थी लेकिन इस नियम को पिछले महीने खत्म कर दिया गया।
इस नीति से यूपी की जेलो΄ मे΄ बढ़ रहा बोझ कम होगा। यूपी के प्रयागराज, वाराणसी, बरेली, फतेहगढ़, इटावा और आगरा के के΄द्रीय कारागार मे΄ दोष सिद्ध किए गए कैदियो΄ को रखा जाता है। यूपी की जेलो΄ मे΄ 70 हजार कैदियो΄ को रखने की क्षमता है लेकिन इस वक्त यूपी की जेलो΄ मे΄ 1.14 लाख कैदी ब΄द है΄। जेल अधिकारी के मुताबिक इनमे΄ से 30 हजार कैदियो΄ को दोषी करार दिया गया है जिनमे΄ से 12 हजार आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे है΄। यूपी कारागार प्रशासन एव΄ सुधार सेवा विभाग ने के΄द्रीय कारागारो΄ को चि_ी लिखकर उन कैदियो΄ की जानकारी मा΄गी है जो समय पूर्व रिहाई की कैटेगिरी मे΄ आते है΄।
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