बैकु΄ठपुर@राज्यपाल से मुलाकात कर जिले की अस्मिता बचाने रखी गई मांग

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रवि सिंह-

बैकु΄ठपुर 24 अक्टूबर 2021 (घटती-घटना)। जिले से रायपुर पहुंचे भाजपा पदाधिकारियों ने पूर्व मंत्री भइयालाल राजवाड़े के नेतृत्व में प्रदेश की राज्यपाल से भी मुलाकात कर जिले की अस्मिता को लेकर मांग रखी। कोरिया जिले में खड़गवां बैकुंठपुर सोनहत विकासखण्ड शामिल हो यह उनकी मांगों में प्रमुख मांग रही।
आवेदन के माध्यम से मुलाकात पहुचे अनिल शर्मा, शैलेष शिवहरे, संजय गुप्ता, विजय सिंह ने राज्यपाल छत्तीसगढ़ महामहिम सुश्री अनुसुईया उइके जी को बतया की भारतीय संविधान की पांचवी अनुसूचि के अनुच्छेद 244 (1) के निहित प्रावधानों के विपरीत अनुसूचित जिला कोरिया का विभाजन किये जाने से परेशानी बढ़ी है। जिला विभाजन की घोषण छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के द्वरा 15 अगस्त 2021 किया गया था, अनुसूचित जिला कोरिया जो पूर्व में सरगुजा जिले से विभाजित होकर दिनांक 25 मई 1998 में अस्तित्व में आया एवं इस जिले का नाम यहां के धरोधर कोरियागढ़ को क्षेत्र की आस्था के केन्द्र के रूप में मान्यता देते हुए रखा गया था। उक्त अनुसूचित जिला कोरिया की कुल जनसंख्या 6,58,917 एवं मतदाताओं की कुल संख्या 4,49,368 व 03 विधानसभा क्षेत्र है जिसमें ग्राम पंचायतों की संख्या 363 तथा विकासखण्डों की संख्या 05 है एवं कोरिया जिले का क्षेत्रफल 5978 वर्ग किलोमीटर है। इस जिले में त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था के अनुसार जिला पंचायत भी स्थापित है जिसमें जिला पंचायत सदस्यों की संख्या 10 है। सरगुजा जिले से विभाजन किया जाकर कोरिया जिला बनाया गया था जिसमें आज दिनांक तक जिले के मानक प्राक्कलन के अनुसार क्षेत्र के रहवासियों को प्रशासनिक एवं शासन के द्वारा कार्य विधि की सेवा प्राप्त नहीं हो पा रही है। वर्तमान शासन के माननीय मुख्यमंत्री के द्वारा दिनांक 15 अगस्त 2021 को कोरिया जिले का विभाजन कर एक अन्य जिला मनेन्द्रगढ़ बनाने की घोषणा की गई है जिससे क्षेत्र के लोग अत्यधिक व्यक्ति एवं चिंतित है कि कोरिया जिला सरगुजा जिले से विभाजित होकर बना है जिसका आज तक पूर्ण रूप से जिले का स्वरूप भी नहीं बन पाया है और मौजूदा शासन के द्वारा अपूर्ण जिले का विभाजन कर मात्र राजनैतिक स्वार्थ पूर्ति का प्रयास किया जा रहा है। उक्त अनुसूचित जिले में पदस्थ प्रशासनिक एवं शासन के द्वारा मनमानी कार्यविधि की जा रही है। छ.ग. के अनुसूचित क्षेत्रों के प्रशासन पर राज्यपाल का प्रतिवेदन वर्ष 2016-17 के दर्शित बिन्दुओं के अनुसार भारतीय संविधान की पांचवी अनुसूथि के अनुच्छेद 244 (1) में निहित प्रावधानों के अंतर्गत जिले के प्रशासनिक तंत्र की कार्यवाही नहीं की जा रही है। अनुसूचित क्षेत्रों और अनुसूचित जनजातियों के प्रशासन एवं नियंत्रण के संबंध में संविधान का 7 वां संशोधन अधिनियम 1956 की धारा 29 और अनुसूचि द्वारा या राज्य प्रमुख शब्दों का लोप किया गया जिसमें अनुसूचित क्षेत्र है, प्रतिवर्ष जब भी राष्ट्रपति इस प्रकार अपेक्षा करें उस राज्य के अनुसूचित क्षेत्रों के संबंध में राज्यपाल प्रतिवेदन देंगे और संघ की कार्यपालिक शक्ति विस्तार राज्य को उक्त क्षेत्र के प्रशासन के बारे में निर्देश देगा तभी विस्तारीकरण किया जा सकता है तथा लोक अधिसूचना द्वारा निर्देश दे सकेगा कि संसद या उस राज्य के विधान मंडल का कोई विशिष्ट अधिनियम उस राज्य या अनुसूचित क्षेत्र के किसी भाग पर लागू नहीं होगा। क्षेत्र में ऐसे किसी भी नियमों के बनाने में राज्यपाल उस राज्य के विधान मंडल के अधिनियम का विद्यमान विधि का जो प्रश्न-गत क्षेत्र में तत्समय लागू है, को निरस्त या संशोधन कर सकेगा। यह कि पांचवी अनुसूचि के भाग (ख) में अनुसूचित क्षेत्रों वाले प्रत्येक राज्य में जनजातीय, सलाहकार परिषद (टीएसी) के गठन का प्रावधान है टीएसी का कर्तव्य अनुसूचित, जन-जातियों के कल्याण और उन्नति से संबंधित मामलों पर सलाह देना जैसा कि राज्यपाल द्वारा उन्हें संदर्भित किया जा सके एवं भारत सरकार के अधिनियम 1935 के अनुसार गर्वनर अनुसूचित क्षेत्रों में प्रत्यक्ष या अपने अभिकर्ताओं के माध्यम से नीति निर्धारित कर सकेगा। कोरिया जिले के रहवासियों की ओर से सादर निवेदन है कि कोरियागढ़ की विरासत अनुसूचित जिला कोरिया को विभाजित न किया जाये तथा अनुसूचित क्षेत्रों के संवैधानिक नियमों के तहत उक्त क्षेत्रों की कार्यविधि संचालित करायी जावे ताकि क्षेत्र के रहवासियों के द्वारा संविधान एवं संवैधानिक पदों पर आसीन माननीयों के प्रति आस्था एवं विश्वास दृढ़ता पूर्वक बना रहे।


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