बैकु΄ठपुर@फर्जी मृत्यू प्रमाण का मामला,कोरिया जिला प्रशासन पर उठा बड़ा सवाल

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थाने में आकर वृद्ध ने कहा साहब मैं जिंदा हूं,दस महीने बीते पुलिस नहीं कर सकी एफआईआर दर्ज

62 साल पहले मरा आदमी…2020 में मरने का बना प्रमाण पत्र…अब जिंदा आदमी लगा रहा न्याय की गुहार

  • रवि सिंह-

बैकु΄ठपुर अक्टूबर 2021 (घटती-घटना)। 80 वर्षीय निःसंतान वृद्ध ने जब फर्द बंटवारा के लिये उप तहसील पटना में आवेदन लगाया तो पक्षकार ने उस जिंदा व्यक्ति का मृत्यू प्रमाण पत्र पेश करते हुये आपत्ति दर्ज कर दिया। जिंदा आदमी जब अपने ही उपनाम का मृत्यू प्रमाण पत्र देखा तो उसकी आंखे फटी रह गयी। जिंदा आदमी मृत्यू प्रमाण पत्र की छायाप्रति लेकर थाना पहुंचा और कहा साहब मैं जिंदा हूं। और मेरे मरने का प्रमाण पत्र बन गया। उक्त बातें जनवरी 2021 में पुलिस के संज्ञान में आयी पर दस महिने बीतने को है अब तक इस मामले में कोई एफआईआर तक नहीं हो सकी। प्रार्थी द्वारा बार-बार पुलिस थाने के चक्कर लगाने पड़ रहे है और पुलिस का हर बार यही कहना है कि जांच चल रही है।
मिली जानकारी के अनुसार पटना थाना के अंतर्गत ग्राम पंचायत बुढ़ार के सचिव रामलखन राजवाड़े ने एक जीवित व्यक्ति कालीचरण उर्फ विपता का मृत्यू प्रमाण पत्र दिनांक 14.03.2020 को जारी कर दिया। मामले का खुलासा तब हुआ जब कालीचरण अपने भूमि के फर्द बंटवारा के लिये तहसील में आवेदन किया और आपत्तिकर्ता ने यह कहकर उसके फर्द बंटवारें में रोक लगा दी कि यह व्यक्ति मृत हो गया है इसके एवज में उसने ग्राम पंचायत बुढ़ार द्वारा जारी किया गया मृत्यू प्रमाण पत्र पेश कर दिया। जिसे देख पिçड़त हैरान रह गया और वह अब वह यह साबित कर रहा है कि वह जिंदा है। उसका फर्द बंटवारा होना चाहिए पर उसके मृत्यू प्रमाण पत्र की बात की जाये तो उसके अनुसार उसकी मृत्यू 16.03.1958 में हो गयी है। इसके बाद तहसील, एसडीएम, कलेक्टर कार्यालय से लेकर पुलिस थाने के चक्कर काटते हुये 10 महिने बीतने को पर आज तक यह जिंदा आदमी अपने आप को यह साबित नहीं कर सका कि वह जिंदा है।
हांलाकि इस पूरे मामले में कालीचरण उर्फ विपता के नाती लखन कुमार यादव ने कहा कि मेरे बाबा अपना ही मृत्यू प्रमाण पत्र लेकर न्याय आस में घुम रहा है और यह बता रहा कि मैं जिंदा हूं। इस बीच मेरे बाबा ने कई बार विधानसभा, लोकसभा, ग्राम पंचायत, जनपद से लेकर स्थानीय चुनावों में अपना मत भी दे चुका है। यहां तक कि पुलिस थाना पटना द्वारा 09.04.2021 को नोटिस मिली की आपको जिंदा होने का साक्ष्य प्रस्तुत करना होगा तो हमने पटना थाना में आकर यह बताया कि मेरे बाबा अब तक जिंदा है और जीवित होने का हर साक्ष्य भी प्रस्तुत किया। इसके बाद भी पुलिस अब तक जांच कर रही है और सम्बन्धित आरोपी भी अब तक पुलिस के हत्थे नहीं चढ़े और न ही इस बात की पुष्टि हुयी की मेरे बाबा अब तक जीति है।

फजी मृत्यू प्रमाण पत्र कालीचरण के उपनाम से बनना प्रशासन पर सवालिया निशान

बुढ़ार निवासी शिवरतन के दो पुत्र एक का नाम स्व. रामचरण दूसरे का नाम कालीचरण उर्फ विपता है। पहले बेटे की मृत्यू हो चुकी है जिनका पुत्र श्यामलाल यादव वहीं कालीचरण के कोई संतान नहीं उसकी पत्नी मानकुंवर है। जिस वजह से फर्द बंटवारे का मामला नायब तहसील पटना में लगा तो वहां पर कालीचरण के उपनाम विपता के नाम से मृत्यू प्रमाण पत्र लगा मिला। लगाने वाले का पता नहीं पर कागज न जाने कहां से आया और किसने बनाया इसकी भी कोई पुख्ता जानकारी नहीं है पर सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब कालीचरण के सारे दस्तावेज के सारे भूअभिलेख में दो भाईयों का नाम दिखा रहा है स्व. रामचरन व कालीचरण पर यदि यह मान लिया जाये कि विपता कोई तीसरा है तो तमाम भूअभिलेख में तीसरा नाम विपदा अंकित होना चाहिए पर ऐसा नहीं है। वहीं विपता नाम कालीचरण का उपनाम है। इसी नाम को लेकर बने मृत्यू प्रमाण पत्र ने फर्द बंटवारे पर रोक लगा दी है। इस मृत्यू प्रमाण पत्र को लेकर कई सवाल प्रशासन के कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा रहे है।

इस मामले में पुलिस का रवैया ढुलमुल

कालीचरण उर्फ विपता के नाती लखन कुमार यादव ने पुलिस के कार्यप्रणाली पर सवाल करते हुये कहा कि मेरे बाबा की उम्र 80 वर्ष हो गयी है और यह मामला लगभग 10 माह पहले प्रकाश में आयी अब तक इस पूरे मामले में पुलिस का रवैया समझ के परे है कहीं ऐसा तो नहीं कि फजी मृत्यू प्रमाण पत्र बनाने वाले पुलिस को अपने नियंत्रण रखे है या फिर पुलिस मेरे बाबा के सचमुच मृत होने के इंतजार में है। आखिर हमें न्याय कब मिलेगी, हर बार पुलिस थाना जाने से अलग-अलग बाते सामने आती है और पता चलता है कि जांच चल रही आखिर ऐसा कौन सा जांच पुलिस कर रही है कि जिंदा आदमी को जिंदा नहीं बता पा रही।



शिकायत मिली है कि जीवित व्यक्ति का मृत्यू प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया है जो जांच का विषय है जिसकी जांच की जा रही है। एफआईआर तभी होगा जब तमाम डाक्यूमेंट की जांच हो जायेगी। एक ही व्यक्ति के दो नाम होने से बिना जांच के एफआईआर नहीं हो सकता।

सौरव द्विवेदी थाना प्रभारी पटना


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