बैकु΄ठपुर @चिरमिरी शहर के सत्याग्रही पदयात्रियों ने पदयात्रा के दौरान सहयोग करने वालों को किया धन्यवाद ज्ञापित

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रवि सिंह-

बैकु΄ठपुर 12 अक्टूबर 2021(घटती-घटना)। चिरिमिरी को नवीन जिले एमसीबी का जिला मुख्यालय बनाये जाने की मांग को लेकर चिरिमिरी जिला मुख्यालय बनाओ संघर्ष मोर्चा के बैनर तले संघर्ष मोर्चा व शहरवासियों के सहयोग से चिरिमिरी शहर के ही 40 से 50 लोगों का एक दल पिछले दिनों राजधानी रायपुर प्रदेश के मुखिया मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को जिला मुख्यालय की मांग से अवगत कराने व उनकी सहमति लेने के उद्देश्य से पदयात्रा पर था। पदयात्री सत्याग्रहियों ने 13 दिनों तक रास्ते मे आने वाली कठिनाइयों को बाधाओं को चुनौती स्वरूप स्वीकार करते हुए लगातार चिरिमिरी शहर में जिले का मुख्यालय स्थापित हो इस उत्साह के साथ यात्रा जारी भी रखा। 14 वें दिन रायपुर पहुंचकर जब प्रदेश के मुख्यमंत्री से सत्याग्रही पदयात्रियों की मुलाकात हुई और परिणाम शून्य मिला तब भले ही उन्हें मायूस देखा गया लेकिन अब वापस आकर वह सभी सहयोगियों के प्रति आभार प्रकट कर रहें हैं।


शहरवासियों सहित जिला मुख्यालय बनाओ संघर्ष मोर्चा के प्रति कृतज्ञताज्ञापित की

सत्याग्रही पदयात्रियों ने सबसे पहले शहरवासियों के प्रति आभार प्रकट करते हुए कहा कि पूरी यात्रा शहरवासियों के द्वारा लगातार मनोबल बढ़ाते रहने की वजह से कठिन होकर भी सहज रही वहीं शहरवासियों सहित मोर्चा के लोगों द्वारा यात्रा के दौरान जरूरत की सभी सामग्रियों यथा दवाइयों की भी व्यवस्था की गई जिसके लिए उनका आभार है। उन्होंने यह भी कहा कि भोजन सामग्री सहित अन्य एक एक छोटी जरूरत भी शहरवासियों व मोर्चा द्वारा पूरी की जाती रहीं जो उनके चिरिमिरी शहर के प्रति प्रेम का द्योतक है और उनका यह प्रयास धन्यवाद देने का विषय।

यात्रा में सहयोग व व्यवस्था के लिए भी किया आभार प्रकट

सत्याग्रही पदयात्रियों ने चिरिमिरी के नगरवासी प्रमोद सिंह के प्रति भी आभार प्रकट करते हुए कहा कि 13 दिनों की यात्रा के दौरान यह एक ऐसे सहयोगी के रूप में साथ रहे जिनके जिम्मे भोजन सहित ठहरने की व्यवस्था की जिम्मेदारी थी जिसे उन्होंने बखूबी निभाया।सत्याग्रही पदयात्रियों ने बताया कि समय पर भोजन और यात्रा के पड़ाव पर ठहरने की व्यवस्था इन्ही के जिम्मे थी जिसके कारण किसी को दिक्कत नहीं हुई वहीं सभी कुछ समय पर उपलब्ध मिलता गया। ठहरना कहां है कभी कभी ढाबे पर भी विश्राम की व्यवस्था करते हुए इन्होंने ऐसी व्यवस्था की जिससे ढाबे का व्यवसाय भी प्रभावित हुआ लेकिन ढाबे के संचालकों ने केवल इन्ही की वजह से पदयात्रियों का स्वागत ही किया कुछ कहा नहीं।


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