भारत में भाषा शिक्षा को लेकर चर्चा अभी भी जारी है। तमिलनाडु में तीन-भाषा नीति के प्रति कड़ा विरोध भाषाई पहचान और केंद्र सरकार की नीतियों के बारे में महत्त्वपूर्ण चिंताओं को उजागर करता है। वास्तविक शैक्षिक सुधार के लिए भाषा शिक्षण की गुणवत्ता को बढ़ाना आवश्यक है, न कि केवल नीतिगत ढाँचों पर ध्यान केंद्रित करना। केंद्र और राज्य …
Read More »संपादकीय
घुमन्तु गीत सीरीज… @पुलिसिया इनकाउंटर
कल मैं एक समारोह में गयी हुई थी, वहां एक पुरानी सहेली से मिलना भी तय था, और मैं बेसब्री से उसके लिए प्रतीक्षारत थी। अचानक मैंने देखा वो ज़ोरदार ठहाके लगाते हुए अकेले ही दौड़ती हुई मेरी ओर बढ़ी आ रही है।मैंने कहा, अरे अब कौन सी लाफ्टर गैस सूंघ ली, जो इतना हंसती जा रही हो?वो कुछ कहने …
Read More »लेख@ बच्चों में बढ़ता डिप्रेशन:क्या खराब पेरेंटिंग है जिम्मेदार?
आज की युवा पीढ़ी एक अजीब सी मानसिक उलझन में फंसी हुई है। एक ओर वे अपने करियर को लेकर अत्यधिक चिंतित हैं, तो दूसरी ओर उनका झुकाव भौतिकतावादी जीवनशैली की ओर बढ़ता जा रहा है। माता-पिता और बच्चों के बीच की दूरी बढ़ रही है, जिसके चलते बच्चे सही मार्गदर्शन से वंचित रह जाते हैं। नैतिक मूल्यों में गिरावट, …
Read More »लेख@ पच्चास साल बाद होने वाली परिसीमन को लेकर चिंताएँ
राजकोषीय संघवाद और संस्थागत ढांचे को मज़बूत करके, हम यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि राजनीतिक निष्पक्षता जनसांख्यिकीय परिवर्तनों के साथ मिलीजुली हो, जिससे एक सुसंगत और एकजुट भारत को बढ़ावा मिले। लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने से नागरिकों को बेहतर प्रतिनिधित्व मिलेगा, जिससे निर्वाचन क्षेत्रों का आकार छोटा होगा और शासन में सुधार होगा। संसदीय सीटों को 543 से …
Read More »लेख@ वन्यजीवों के अस्तित्व पर संकट और उनके संरक्षण की आवश्यकता
वन्य जीव हमारी धरती के अभिन्न अंग हैं लेकिन अपने निहित स्वार्थों तथा विकास के नाम पर मनुष्य ने उनके प्राकृतिक आवासों को बेदर्दी से उजाड़ने में बड़ी भूमिका निभाई है और वनस्पतियों का भी सफाया किया है। धरती पर अपना अस्तित्व बनाए रखने के लिए मनुष्य को प्रकृति प्रदत्त उन सभी चीजों का आपसी संतुलन बनाए रखने की जरूरत …
Read More »लेख@ न्यायालयों में अनसुलझे मामलों की बढ़ती हुई संख्या
विलंब के कारण न्याय से वंचितभारतीय न्यायालयों में अनसुलझे मामलों का मुद्दा एक बड़ी चुनौती है, जिसने न्याय प्रणाली को गहराई से प्रभावित किया है। लंबित मामलों की बढ़ती संख्या न्याय प्रदान करने के लिए डिज़ाइन की गई वर्तमान प्रणाली की प्रभावशीलता और दक्षता पर गंभीर सवाल उठाती है। ऐसी देरी का कानूनी ढांचे पर हानिकारक और व्यापक प्रभाव पड़ता …
Read More »लेख@ जीवन में वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत
विज्ञान मानव को जीवन जीने की एक दृष्टि देता है। चिंतन की आधारभूमि भेंट कर चलने को उजास भरा पथ प्रदान करता है। वास्तव में विज्ञान जीवन से जडता, अविद्या, अंधविश्वास, अतार्किता एवं संशय से मुक्ति का नाम है। विज्ञान व्यक्ति को तर्कशील एवं प्रयोगधर्मी बनाकर सवाल खड़े करने की सामर्थ्य पैदा करता है। विज्ञान मानवीय मेधा का उच्चतम आदर्श …
Read More »लेख@ कामुकता को स्वछन्द करती पॉप संस्कृति
आजकल, हमारी इच्छाएँ और धारणाएँ अक्सर çफ़फ ल्मो और टेलीविजन पर दिखाई जाने वाली छवियों और कथाओं से प्रभावित होती हैं। ये चित्रण प्रायः रूढि़वादिता की ओर अधिक झुके होते हैं। उदाहरण के लिए, पारंपरिक रूप से आकर्षक महिलाओं पर ज़ोर देने से लड़कियों और महिलाओं में उन जैसा दिखने की भावना पैदा हो सकती है। पॉप संस्कृति के उपभोक्ताओं …
Read More »लेख@ महान साहित्य के पीछे शब्द शक्ति और सामर्थ्य
सत-साहित्य से समृद्ध होता समाज शब्दों की महिमा को अपरंपार और अक्षर को नश्वर बताया गया है ।वैसे तो शब्दों की तीव्रता तलवार से ज्यादा नुकीली और भाले से ज्यादा चुभने वाली होती है। तलवार की धार से मनुष्य एक बार बच भी सकता है पर मुंह से बोले गए शब्द व्यक्ति को मृत्यु सा मूर्छित कर देते है। इसीलिए …
Read More »लेख@ क्यों क्रूर बदमाशी का रूप ले रही है रैगिंग?
रैगिंग को अक्सर एक संस्कार के रूप में प्रस्तुत किया जाता है जो नए छात्रों को उच्च शिक्षा संस्थानों में परिसर में जीवन को समायोजित करने में सहायता करता है। हालाँकि जूनियर कैंपस के रीति-रिवाजों को सीख सकते हैं और वरिष्ठों के साथ सकारात्मक बातचीत के माध्यम से एक सहायक समुदाय बना सकते हैं, लेकिन जब इसके परिणामस्वरूप उत्पीड़न, अपमान …
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