दोस्तों,यह एक अजीब विडंबना है कि हमारे इर्द गिर्द जन्म से भारतीय कर्म से अंग्रेज लोग अक्सर देखने मिल जाते हैं। आज एक चटपटा किस्सा एक ऐसे ही व्यक्ति के बारे में!!बात उन दिनों की है जब मैं 12 वीं की छात्रा थी, विज्ञान मेरा विषय था, और कक्षा की सबसे धाराप्रवाह अंग्रेजी बोलने वाली विद्यार्थी मैं ही थी। एक …
Read More »संपादकीय
@11 मार्च मेले पर विशेष@हारे का सहारा हैं खाटू के श्री श्याम
राजस्थान के सीकर जिले में स्थित खाटू श्याम मंदिर बाबा श्याम जी के लिए प्रसिद्ध है। यह मंदिर भारत के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में गिना जाता है। खाटू श्याम जी को भगवान श्रीकृष्ण का कलयुगी अवतार माना जाता है। दानशीलता के कारण बर्बरीक ने बिना किसी सवाल के अपना शीश भगवान श्री कृष्ण को दान दे दिया। इसी दानशीलता के …
Read More »लेख@ राजनीति में युवाओं की भागीदारी की आवश्यकता
अगर राजनीतिक दल युवाओं को राजनीति में शामिल करने के बारे में गंभीर हैं तो उन्हें कई तरह के कदम उठाने होंगे। पहला कदम सरकार द्वारा युवा मानदंड में बदलाव करना होगा। आज 34-35 वर्ष की आयु के लोगों को भी युवा माना जाता है। इस मानदंड को कम करने की आवश्यकता होगी। अपने संगठनात्मक ढांचे में, पार्टियों को युवाओं …
Read More »लेख @सुनहरा कल वर्तमान की कठिन सीढ़ियों से चढ़कर ही बनता है…
कठिन परिश्रम का कोई विकल्प नहीहमें सदैव वर्तमान में जीना चाहिए, इतिहास से शिक्षा लेनी चाहिए और भविष्य के प्रति सकारात्मक सोच के साथ आगे सदैव अग्रसर होते रहना चाहिए। किसी भी राष्ट्र को बड़ा बनाने या समृद्ध बनाने के लिए वर्षों की मेहनत अथक प्रयास और सकारात्मक सोच के साथ संयम एवं उच्च मनोबल की आवश्यकता होती है, तब …
Read More »लेख@ पारदर्शी और कुशल नेतृत्व के धनी कैबिनेट मंत्री रणबीर गंगवा
34 साल की राजनीतिक यात्रा में इन्होने कैबिनेट मंत्री के पद तक का सफ़र तय किया है। गंगवा ने राजनीति की शुरुआत अपने गाँव गंगवा से की थी। कृषि प्रगति और ग्रामीण कल्याण सुधार के साथ इन्होंने अपना सारा ध्यान बरवाला निवासियों के मानकों को ऊपर उठाने पर केंद्रित किया है। इन्होंने ग्रामीण समुदायों के लिए विशेषकर कृषि के विकास …
Read More »लेख@ जारी है अपने हिस्से के आकाश की तलाश
आत्मनिर्भरता अपने आप में एक महत्वपूर्ण गुण है, जो मनुष्य को स्वावलंबी बनाने के साथ मानसिक तौर भी सशक्त होने का अहसास दिलाता है। महिलाओं के दृष्टिकोण से विचारें तो वित्तीय संयोजन से अभिप्राय मात्र अपने पैरों पर खड़े होने तक सीमित न होकर आर्थिक आत्मनिर्भरता, स्वतंत्रता, सुरक्षा और शक्ति के बारे में है, जो उनके व्यक्तिगत जीवन से लेकर …
Read More »लेख@ भारत में नारी का सम्मान और उनकी अग्रणी भूमिका
भारत मे नारी सदैव से अग्रणी रही है, हमारी परंपरा, संस्कृति और चिंतन में नारी सदैव ही सम्मानीय रही है। भारत में नारी का स्थान प्राचीन काल से ही अत्यंत सम्माननीय रहा है। हमारी संस्कृति में नारी को शक्ति, ज्ञान और समृद्धि का प्रतीक माना गया है। वेदों और पुराणों में नारी को माँ, देवी, सहधर्मिणी और समाज की आधारशिला …
Read More »लेख@ इस संसार में महिला होना गुनाह है क्या?
परमात्मा ने स्त्री और पुरुष इस संसार चक्र को चलाने के लिए बनाए हैं! हमारा समाज पुरुष प्रधान है! मुख्य फैसले पुरुषों द्वारा ही लिए जाते हैं! स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद बेशक हमारी समाज में जागरूकता लाने के कारण तथा महिलाओं को शिक्षा प्राप्त करने के कारण पुरुषों की तरह काम करने की आजादी मिली हुई है! लेकिन इसके बावजूद …
Read More »लेख@ सार्थक भागीदारी के बिना कैसे हल होंगे आधी दुनिया के मसले
अगर आधी आबादी से होते हुए भी महिलाएँ इस आबादी की कहानियाँ नहीं कहेंगी,तो कौन कहेगा?केवल महिला दिवस पर ही नहीं, हर रोज़ महिलाओं को लड़ाई लड़नी पड़ेगी इस बदलाव के लिए, अपने हक¸ों के लिए। छोटी शुरुआत ही सही, लेकिन शुरुआत सबको करनी पड़ेगी। ये संघर्ष का सफ़र अंतहीन है। महिलाओं के लिए समान वेतन हो, उन्हें फॉर ग्रांटेड …
Read More »@अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष@बलात्कार और हिंसा पर कब टूटेगी समाज की चुप्पी?
दुनियाभर में प्रतिवर्ष 8 मार्च को ‘अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस’ मनाया जाता है, जो सही मायनों में महिलाओं की सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक उपलब्धियों का जश्न मनाने वाला एक वैश्विक दिवस है। यह दिन लैंगिक समानता में तेजी लाने के लिए कार्रवाई के आह्वान का भी प्रतीक है। हालांकि चिंता का विषय यही है कि जिस ‘आधी दुनिया’ के प्रति …
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