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संपादकीय

लेख@ जंगलों पर छाया इंसानों का आतंक:एक अनदेखा संकट

हाल ही में एक प्रमुख अखबार की हेडलाइन ने ध्यान खींचा—शहर में बंदरों और कुत्तों का आतंक। यह वाक्य पढ़ते ही एक गहरी असहजता महसूस हुई। शायद इसलिए नहीं कि खबर गलत थी, बल्कि इसलिए कि वह अधूरी थी। सवाल यह नहीं है कि जानवर शहरों में क्यों आ गए, बल्कि यह है कि वे जंगलों से क्यों चले आए? …

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लेख @ मीडिया और सोशल मीडिया का मायाजाल

आज के समय में सोशल मीडिया की चकाचौंध ने लोगों को बहुत प्रभावित किया है। लोग अक्सर वास्तविकता और कल्पना के बीच का अंतर भूल जाते हैं और भ्रम के मायाजाल में फंस जाते हैं।लोगों को मीडिया साक्षरता के बारे में शिक्षित करना जरूरी है, ताकि वे जानकारी को सहीमीडिया और सोशल मीडिया की चकाचौंध एक मृग मरीचिका की तरह …

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लेख@ यूपी में इसलिये नहीं बन पाया वक्फ कानून के खिलाफ माहौल

देश का सबसे बड़े सूबे और यहां के सबसे समृद्ध वक्फ बोर्ड और उससे जुड़े उत्तर प्रदेश के करोड़ों मुसलमानों ने वक्फ अधिनियम 1995 में मोदी सरकार द्वारा किये गये बदलाव के खिलाफ कोई मुखरता नहीं दिखाकर पूरे मुल्क को हैरान कर दिया है। छिटपुट विरोध की जो खबरें आईं भी तो उससे कोई बड़ा राजनैतिक संदेश नहीं निकला। यूपी …

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लेख@ गोपालगंज का इतिहास

बिहार के 38 जिला में,एक जिला गोपालगंज भी है, जो गंडक नदी पश्चिमी तट पर स्थित है। गोपालगंज जिला उत्तर दिशा में चम्पारण जिला से घिरा हुआ है दक्षिण दिशा में सिवान जिला से घिरा हुआ है और पश्चिमोत्तर में उत्तरप्रदेश राज्य के देवरिया जिला से घिरा हुआ है।गोपालगंज जिला का इतिहास समृद्ध और विधित है। सारण जिला से अलग …

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लेख@ चिंता और चिंतन के अंतर को समझने का महत्व

आशावादी दृष्टिकोण से सफलतानिराशा और चिंता मनुष्य के जीवन की प्रगति के बड़े बाधक हैं। निराशा को तत्काल विचारों से अलग करें और चिंता को अपने मस्तिष्क में ना आने दे अन्यथा अत्यधिक चिंता व्यक्ति को चिता तक ले जाने में देर नहीं करती है । अतः सकारात्मक सोच के साथ चिंतन, नवीन संकल्प और दृढ़ निश्चय रखकर जीवन के …

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लेख@भारत में गर्मी का जल्दी आना और लू का बढ़ना

बढ़ते तापमान से कृषि,जल संकट, सार्वजनिक स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। फरवरी में असामान्य रूप से अधिक गर्मी, रात के तापमान में वृद्धि, समुद्री तापमान का असर और शहरी हीट आइलैंड प्रभाव इस समस्या को और गंभीर बना रहे हैं। इसका असर शिक्षा, श्रम उत्पादकता और खाद्य सुरक्षा पर भी पड़ रहा है।भारत में लू की …

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लेख@ प्राकृतिक संसाधन की सुरक्षा हमारी नैतिक जिम्मेदारी

धरा में नदियों को स्वर्ग के समान आनंद प्रदाता समझा जाता है,और वास्तव में प्रकृति ने पूरे जैव समुदाय को एक अनुपम उपहार नदी भेंट किया है। नदी की पवित्र बहती कल-कल जल धारा धरती की सुंदरता पर चार चांद लगाता है। जहां जहां से होकर नदी गुजरती है उस स्थान को हर दृष्टि कोण से समृद्ध करती है,और वहां …

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लेख@ जल संकट पर सोचने का वक्त

विश्व आर्थिक मंच की रिपोर्ट के अनुसार,वर्ष 2025 से 2027 के बीच जल आपूर्ति की कमी भारत के लिए सबसे गंभीर जोखिम के रूप में उभर सकती है। इससे पहले नीति आयोग ने चेतावनी दी थी कि देश की लगभग 60 करोड़ आबादी उच्च जल तनाव का सामना कर रही है। वास्तव में भारत गंभीर जल संकट की ओर बढ़ …

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लेख@ रंगमंच पर जाति का खेल:कितना जायज़?

कला का काम समाज को जागरूक करना है, उसकी विविधताओं को सम्मान देना है,और उस आईने की तरह बनना है जिसमें हर वर्ग खुद को देख सके। लेकिन जब कला सिर्फ कुछ खास वर्गों या समूहों की महिमा गाने लगे, और बाकी समाज की पीड़ा, संघर्ष और उपस्थिति को नज़रअंदाज़ कर दे, तो वह कला नहीं रहती — वह प्रचार …

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लेख@ लोकतांत्रिक भारत:हमारा कर्तव्य,हमारी जिम्मेवारी जनतंत्र की जान: सजग नागरिक और सतत भागीदारी

लोकतंत्र केवल अधिकारों का मंच नहीं, बल्कि नागरिकों के कर्तव्यों और जिम्मेदारियों का साझेधार भी है। भारत जैसे विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र में नागरिकों की भूमिका केवल वोट देने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। उन्हें न्याय, समानता, संवाद, स्वच्छता, कर भुगतान, और संस्थाओं के प्रति सम्मान जैसे क्षेत्रों में भी सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। लोकतंत्र की मजबूती सत्ता पर …

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