मां एक ऐसा शब्द है जिसमें पूरा ब्रम्हांड समा जाए। जब हम मां बोलने के लिए मुंह खोलते हैं तो शब्द के उच्चारण के साथ ही पूरा मुंह भर जाता है। मां ममता की मूरत होती है। पूरी दुनिया के सभी धर्मों नेमां के रिश्ते को सबसे पवित्र माना गया है। अपने बच्चों के प्रति मां का प्यार,दुलार,समर्पण और त्याग …
Read More »संपादकीय
लेख@ सफलता-असफलता जीवन के दो अनिवार्य पहलू
धर्म के साथ कर्म से सफलतामनुष्य को धर्म के साथ ही कर्म की वेदी पर अपने श्रम की की आहुति देनी चाहिए,जिससे मानवीय जीवन अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है। जीवन में लक्ष्य की प्राप्ति और सफलता के लिए मनुष्य को निरंतर कर्म,धर्म की प्रधानता रखकर संयम तथा मनोबल भी रखना होगा। इसके अलावा मनुष्य अपनी इच्छाओं का दास …
Read More »@बाल कहानी@ क्रोध का परिणाम
कुणाल के माता-पिता मध्यम वर्गीय परिवार से थे। कुणाल उनकी इकलौती संतान थी। जिसके कारण वे उसे बहुत लाड प्यार करते थे। उसे किसी भी चीज की कमी ना हो इस बात का पूरा ख्याल रखते थे; उसके कुछ मॉंगने के पहले ही उसकी हर जरूरत को पूरा कर देते थे। माता-पिता के इसी परवरिश ने कुणाल को जिद्दी बना …
Read More »@विश्व रेडक्रॉस दिवस…8 मई पर विशेष@आपदा के समय भरोसेमंद दोस्त रेडक्रॉस
रेडक्रॉस की स्थापना महान् मानवता प्रेमी जीन हेनरी डयूनेंट द्वारा की गई थी, इसीलिए उनके जन्मदिन के अवसर पर प्रतिवर्ष विश्वभर में 8 मई का दिन ‘अंतर्राष्ट्रीय रेडक्रॉस दिवस’ के रूप में मनाया जाता है और संस्था की गतिविधियों से आम आदमी को अवगत कराने के प्रयास किए जाते हैं। रेडक्रॉस की स्थापना वर्ष 1863 में हुई थी और अंतर्राष्ट्रीय …
Read More »लेख@ रवींद्रनाथ टैगोर शांति के लिए हमेशा याद किए जाएंगे
रवींद्रनाथ टैगोर का जन्म 7 मई, 1861 को कोलकाता, भारत में हुआ था। रवींद्रनाथ ठाकुर (7 मई 1861 – 7 अगस्त 1941) एक बंगाली बहुश्रुत थे,जिन्होंने बंगाल पुनर्जागरण के कवि, लेखक, नाटककार, संगीतकार, दार्शनिक, समाज सुधारक और चित्रकार के रूप में काम किया। उन्होंने 19वीं सदी के अंत और 20वीं सदी की शुरुआत में प्रासंगिक आधुनिकता के साथ बंगाली साहित्य …
Read More »@7 अप्रैल विश्व स्वास्थ्य दिवस पर विशेष @स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहना होगा
आज दुनिया भर में मनुष्य के स्वास्थ्य को लेकर चिंता व्यक्त की जा रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन भी दुनिया के देशों को समय-समय पर चेतावनी देता रहता है। कुछ वर्ष पूर्व आई कोरोना महामारी ने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया था। मगर वैज्ञानिकों की तत्परता से वैक्सीन निर्माण होने के चलते वह नियंत्रण में आ गई थी। …
Read More »लेख@ दम तोड़ती प्याऊ की परंपरा
किसी समाज या समूह में लंबे समय से चली आ रही किसीपरंपरा का अंत हो जाना कई बार खुशियां देता है,पर कई बार यह भीतर से रुला देता है। परंपराओं का प्रारंभ और अंत विकासशील समाज के लिए आवश्यक भी है। परंपराएं टूटने के लिए ही होती हैं, पर कुछ परंपराएं ऐसी होती हैं, जिनका टूटना मन को दुखी कर …
Read More »@घुमंतू गीत सीरीज@कहानी@ स्वयं सिद्धा
ट्रेन की खिड़की से आती गर्म हवा दिल्ली की ओर बढ़ते सफर की थकान को थोड़ा कम कर रही थी। मैं अपनी सीट पर शांत बैठी थी—मन में अगले दिन के सरकारी काव्यपाठ और सम्मान समारोह की हल्की-सी तैयारी और उतनी ही सहजता। तभी एक महिला मेरे सामने वाली सीट पर आकर बैठीं। उम्र रही होगी कोई सत्तर के आस-पास। …
Read More »लेख@ शिक्षा में अर्थ स्वावलंबन अनिवार्य
किसी भी देश की सामाजिक आर्थिक और मानवीय विकास का मूल उस देश की शिक्षा और शिक्षा नीति होती है। शिक्षा का विकास उस देश की संस्कृति और सभ्यता से होती है पर हमारे भारत का विडम्बना है की आज भी हमारे भारतीय शिक्षा पद्धति पर लार्ड मैकाले का प्रभाव नहीं गया है। मैकाले अच्छी तरह जानता था की किसी …
Read More »लेख@ केसीसी के नाम पर चालबाज़ी:निजीबैंकों की शिकारी पूँजी और किसानों की लूट
निजी बैंक किसानों को केसीसी योजना के तहत ऋण देते समय बीमा और पॉलिसियों के नाम पर चुपचाप उनके खातों से पैसे काट लेते हैं। हाल ही में राजस्थान में एक्सिस बैंक की ऐसी ही करतूत उजागर हुई जब एक किसान ने वीडियो बनाकर सच्चाई सामने रखी। यह केवल एक घटना नहीं, बल्कि पूरे बैंकिंग तंत्र में फैली एक भयावह …
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