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संपादकीय

लेख@ मैनेजमेंट के मखमली पर्दे के पीछे दम तोड़ती पत्रकारिता

पीआर मैनेजमेंट के चंगुल में फंसा आज का कलमकार, मैनेजर जी रहे लग्जरी लाइफ, पत्रकार टूटी बाइक पर…आज की पत्रकारिता एक गहरे संकट से गुजर रही है,जहाँ कलमकार हाशिए पर हैं और पीआर मैनेजमेंट का बोलबाला है। पत्रकार,जो कभी सच की आवाज थे,अब टूटी बाइक पर सवार होकर अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं,जबकि मैनेजरों की जिंदगी लग्जरी में …

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लेख@हिंसा और नफरत की बुनियाद पर बैठा पाकिस्तान

पाकिस्तान के अस्तित्व पर प्रश्न चिन्हकिसी बात से असहमत होना और उसका हिंसात्मक विरोध करना दोनों अलग-अलग पहलू है। पर पाकिस्तान ऐसा देश है जिसकी पैदाइश ही नफरत और हिंसा के आधार पर हुई है। स्वतंत्रता के बाद जिन्ना ने पाकिस्तान में आतंकवाद का बीज बोया था। पाकिस्तान का यह बड़ा दुर्भाग्य रहा है कि वहां 18 निर्वाचित प्रधानमंत्री में …

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लेख@ मजदूर दिवस: एक दिन सम्मान,साल भर अपमान

मजदूर दिवस केवल एक तारीख नहीं,श्रमिकों की मेहनत,संघर्ष और हक की पहचान है। 1 मई को मनाया जाने वाला यह दिन उस आंदोलन की याद है जिसने काम के सीमित घंटे,सम्मान जनक वेतन और श्रम अधिकारों की लड़ाई लड़ी। लेकिन भारत जैसे देशों में मजदूर आज भी असंगठित,असुरक्षित और उपेक्षित हैं। महिला श्रमिकों की स्थिति और भी दयनीय है। एक …

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लेख@ बाहरी स्वच्छता से पहले आंतरिक शुद्धता जरूरी

हिन्दू होकर हम हिंदू नहीं,फिर वो हमेंहिंदू क्यों मानेंपहलगाम में आतंकियों द्वारा 26 पर्यटकों की हत्या की घटना इन दिनों अन्तर्राष्ट्रीय स्तर तक चर्चा में है। इस घटना के परिणाम भविष्य में क्या रहेंगे। इस बारे में अभी कुछ कहा नहीं जा सकता। इस मामले में भारत सरकार का क्या रुख रहेगा? अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत को इस बारे में …

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लेख@ नेताओं की देशभक्तिकी अग्निपरीक्षा सेना में बेटा भेजो,पेंशन लो

भारत में एक बार विधायक या सांसद बन जाना आजीवन पेंशन की गारंटी बन चुका है, चाहे उनका संसदीय रिकॉर्ड शून्य क्यों न हो। वहीं, सीमाओं पर तैनात सैनिक हर रोज़ जान जोखिम में डालते हैं, लेकिन उनके परिवारों को न्यूनतम सुविधाएं भी संघर्ष से मिलती हैं। सवाल उठता है क्या नेताओं की देशभक्ति सिर्फ भाषणों और नारों तक सीमित …

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@1 मई,अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस@बालश्रम एक बड़ी समस्या,श्रमिकों का उद्धार कब होगा

संविधान के अनुसार 18 साल से कम उम्र का बच्चा यदि घरेलू कामों से अलग अन्य कार्यों जैसे कारखाना,होटल हलवाई या अन्य जगह कार्य करता है तो उसे बाल श्रमिक माना जाता है। कानूनी रूप से बाल श्रम पर प्रतिबंध लगाया गया है। पर पूरे भारत सहित अन्य विकासशील देशों में बाल श्रम की बहुतायत पाई गई है। बाल श्रमिकों …

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लेख@ श्रमिक शक्ति ही है भारत की असली ताकत

श्रमिक:देश की रीढ़ मगर हाशिये पर…ड्प्रतिवर्ष 1 मई का दिन ‘अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस’ अथवा ‘मजदूर दिवस’ के रूप में मनाया जाता है, जिसे ‘मई दिवस’ भी कहा जाता है। यह दिवस समाज के उस वर्ग के नाम है, जिसके कंधों पर सही मायनों में विश्व की उन्नति का दारोमदार है। इसमें कोई दो राय नहीं कि किसी भी राष्ट्र की …

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@01 मई मजदूर दिवस पर विशेष @मजदूरों के महत्व को दर्शाता मजदूर दिवस

मजदूर दिवस मजदूरों के महत्व को दर्शाने का एक महत्वपूर्ण उत्सव है। भारत सहित दुनिया के बहुत से देशों में एक मई को मजदूर दिवस मनाया जाता है। जिसका मुख्य उद्देश्य उस दिन मजदूरों की भलाई के लिए काम करने व मजदूरों में उनके अधिकारों के प्रति जागृति लाना होता है। मगर ऐसा हो नहीं पाया है। भारत में 90 …

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लेख@ आज है मजदूरों का दिवस ‘अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस’

उत्पादन के चार साधन होते हैं…भूमि,श्रम,पूंजी और उद्यम। लेकिन इन चारों में श्रम सबसे अधिक महत्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि श्रमिक ही अपने परिश्रम के द्वारा भूमि का प्रयोग करता है, पूंजी का संचय करता है तथा उद्यमकर्ता का निर्माण करता है। किसी भी देश का विकास उस‌ देश में उपलब्ध श्रमिकों की मात्रा,उनके प्रशिक्षण, ज्ञान तथा कार्य कुशलता पर निर्भर …

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लेख@ सिविल सेवाओं से इस्तीफे:युवा अधिकारियों की निराशा और प्रशासनिक संकट

@ भारत में इस्तीफा देने वाले आईएएस और आईपीएस अधिकारियों का संकट@ सिविल सेवा का संकट: इस्तीफों के बढ़ते सिलसिले के कारण और प्रभाव@ सिविल सेवा में इस्तीफों का मंथन:राजनीति, प्रशासन और मानसिक तनाव का समीकरण@ नौकरशाही के दिग्गजों का पलायन:भारत की सिविल सेवा में बदलाव की आहट@ सिविल सेवाओं से इस्तीफे: युवा अधिकारियों की निराशा और प्रशासनिक संकटभारत में …

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