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संपादकीय

लेख@हरियाणा के सरकारी स्कूलों में शिक्षा का अंतिम संस्कार

जब पूरी क्लास फेल होती है,तो सिस्टम अपराधी होता है… हरियाणा के 18 सरकारी स्कूलों में 12वीं का रिजल्ट शून्य प्रतिशत रहा, जो राज्य प्रायोजित शैक्षिक विफलता का संकेत है। यह केवल छात्रों की असफलता नहीं,बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र की नाकामी है—जिसमें शिक्षक नहीं,संसाधन नहीं और जवाबदेही भी नहीं। सरकार को पहले से इन स्कूलों की हालत पता थी, फिर …

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कविता@उसूलों का राही…

उसूलों पे चलने वाला कापाँव में पड़ जाता है छालाकर्ण बहिरा बन। जाता हैलव पे लटक जाता है तालादिल का सच्चा वो होता हैना होता है मन का वो कालाईष्या द्वेष की ना है फितरतसच्चा मन सच्चा दिलवालापाँव में ठोकर खा वो गिरतादिल में उम्मीदों को है पालापथ चाहे कितना मुश्किल होपार कर जाता कठिन सा नालाउसूलों पे चलने की …

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कविता@उपेक्षित नारीःविधवा…

समाज की एक उपेक्षित नारीजनमानस कहते जिनको बेवादुर्भाग्य का प्रतीक समझते जिनकोजिनके साथ जुड़े तरह-तरह की भेवाइनके प्रति होते नकारात्मक भावऔर रूढç¸वादी विचारधारासामाजिक कार्यों से होती अलगावसब खुशहाली,पर्वों से होती किनाराजैसे उनकी परछाई या स्पर्श सेअशुभ लक्षण हममें भी घिर आयेगीज्यों हुए वह खुशियों से वंचितवैसे ही हमारे जीवन को भर जायेगीमुंडन,षष्ठी,विवाह हो चाहे अन्य कारजअमांगलिक सा बर्ताव होतीअछूत सा …

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लेख@विलुप्त होती प्रजातियां:जीवन के अस्तित्व पर संकट की दस्तक

मनुष्यों की ही भांति जीव-जंतु और पेड़-पौधे भी इस धरती के अभिन्न अंग हैं लेकिन विडंबना यह है कि मनुष्य ने अपने स्वार्थों और तथाकथित विकास की दौड़ में इनके अस्तित्व पर ही संकट खड़ा कर दिया है। जंगलों की अंधाधुंध कटाई,शहरीकरण, औद्योगीकरण और अनियंत्रित मानवीय गतिविधियों के चलते वन्यजीवों के प्राकृतिक आवासउजड़ चुके हैं और वनस्पतियों की कई प्रजातियां …

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लेख@मनुज को मनुज ही क्यों खाये

मनुष्यता सच्चरित्र की कुंजी है जिसमें प्रेम,त्याग और समपर्ण की गाथा है जहाँ यह तीनों नहीं वहां समझो मनुष्यता नही पशुता है। पशुता में शाकाहारी और मांसाहारी पशु होते है,जो अपने अपने स्वभाव अनुसार भोजन ग्रहण करते है,मांसाहारी के समक्ष जो भी जीव जंतु आ जाए तो वह उसका भोजन होता है,जब भूख लगी वह उनका शिकार कर भोजन ग्रहण …

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लेख@ऑपरेशन सिंदूर:भारत की ताकत और विपक्ष की राजनीति का नया द्वंद्व

ऑपरेशन सिंदूर केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं,बल्कि भारत की आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति का एक सशक्त प्रतीक बन चुका है । इस ऑपरेशन ने न केवल सीमाओं पर बैठे दुश्मनों को सीधा संदेश दिया है,बल्कि वैश्विक स्तर पर भी भारत की स्थिति को मजबूत किया है। देशभर में इस ऑपरेशन की सराहना हो रही है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा …

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कविता@श्मशान घाट में मंडराया खतरा..

माँ का निधन हुआ बेटों ने निकाली अंतिम यात्रा,लेके गए नजदीकी श्मशान घाट मंडराया खतरा।विवाद अस्सी वर्षीय महिला छीतर रेगर के गहने,उसने जीवंत रहते ही अंतिम समय तक थे पहने।मुख्य लोगों ने शव को चिता पर रखने से पहले,श्रृंगार के गहने सेवाभावी बड़े बेटे को सौंपे रहले।माँ का निधन हुआ बेटों ने निकाली अंतिम यात्रा,लेके गए नजदीकी श्मशान घाट मंडराया …

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लेख@श्रेष्ठ सफलता के लिए चिंता नही चिंतन की आवश्यकता

निराशा और चिंता मनुष्य के जीवन की प्रगति के बड़े बाधक हैं। निराशा को तत्काल विचारों से अलग करें और चिंता को अपने मस्तिष्क में ना आने दे अन्यथा अत्यधिक चिंता व्यक्ति को चिता तक ले जाने में देर नहीं करती है अतः सकारात्मक सोच के साथ नवीन संकल्प और दृढ़ निश्चय रखकर जीवन के पथ में अग्रसर हो होंद्य …

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लेख@बेटियों की भी नैतिक जिम्मेदारी दृढ़ता से सुनिश्चित की जाए

पैतृक संपति का बंटवारा? क़ानूनी अधिकार अपनी जगह हैं,लेकिन रिश्तों की अहमियत भी समझें। पहले के समय में भाई-बहन का रिश्ता बहुत भावनात्मक और अपनापन भरा होता था। त्योहार,पारिवारिक मिलन और आपसी सहयोग रिश्तों को मज़बूत बनाते थे। लेकिन आज के दौर में, समाज और परिवार की संरचना में कई बदलाव आए हैं। आजकल लोग अपने करियर,निजी जीवन और स्वतंत्रता …

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लेख@‘सिन्दूर’ अब श्रृंगार ही नहीं,शौर्य का प्रतीक

सिन्दूर,जो प्राचीन काल से भारतीय नारी के वैवाहिक जीवन का प्रतीक रहा है,आज एक नए अर्थ में उभर रहा है। यह केवल सुहाग का प्रतीक नहीं,बल्कि नारी शक्ति, साहस और स्वाभिमान का प्रतीक बनता जा रहा है। यह बदलाव केवल एक सांस्कृतिक परिवर्तन नहीं, बल्कि एक सामाजिक क्रांति का संकेत है। भारतीय समाज में सिन्दूर का स्थान अत्यंत पवित्र माना …

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