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लेख@यह है अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप

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किसी समय दुनिया में दो ही सुपर पावर हुआ करते थे… अमेरिका तथा यूएसएसआर…! लेकिन अमेरिका ने अपने प्रतिद्वंद्वी को कमजोर करने के लिए इसको तुड़वा दिया और इसके टुकड़े करवा के कई नए देश बनवा दिए ताकि बचा हुआ रूस इसका मुकाबला ना कर सके! लेकिन जो अमेरिका चाहता था वह नहीं हो सका और रूस‌ ने अपने आप को एक बार फिर ताकतवर बनाकर अमेरिका के सामने सुपर पावर वाली चुनौती खड़ी कर दी! अमेरिका विश्व का सबसे पुराना लोकतंत्र है और विश्व में लोकतंत्र को बढ़ावा देने के लिए प्रयत्नशील रहता है! अपने इस उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए वह आतंकवाद को भी बढ़ावा देता रहता है! अफगानिस्तान में रूस को चुनौती देने के लिए उसने पाकिस्तान को तालिबान आतंकवादी तैयार करने के लिए सहायता दी जिन्होंने अफगानिस्तान में रूस का आधिपत्य समाप्त कर दिया! बाद में अमेरिका में 9/11 आतंकवादी हमला हुआ जिसमें विश्व व्यापार केंद्र तथा पेंटागन को नुकसान पहुंचाया गया! इस बीच ओसामा बिन लादेन आतंकवादियों का सरदार बनकर उभरा जिसे पाकिस्तान में हमला करके राष्ट्रपति बराक ओबामा के समय मार दिया गया! इस समय भी विश्व के अनेक भागों में आतंकवादी समस्या भयंकर रूप ले चुकी है! इस समय डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका के 45 वें राष्ट्रपति के तौर पर दूसरी बार पद संभाला है। जब से उन्होंने पद संभाला है उनका लगभग हर एक काम विवादों से घिरा हुआ है। उनके बारे में निश्चित तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता। उन्होंने अमेरिका की आमदनी बढ़ाने तथा खर्च कम करने का दृढ़ निश्चय कर रखा है। अमेरिकन लोगों को कहा है कि वह अपने देश की आमदनी इतनी बढ़ा देंगे कि किसी को भी इनकम टैक्स न देना पड़े। पद संभालते ही उन्होंने विश्व के अनेक देशों के साथ टैरिफ वार शुरू कर दी। उन्होंने कहा वह रिसिप्रोकल टैरिफ लगाएंगे। अपने 11 साल के शासन में प्रधानमंत्री मोदी ने कम से कम 11 बार अमेरिका का दौरा किया, उनके द्वारा ट्रंप के साथ गलबहियां करते हुए भारतीय टीवी चैनलों ने यह दिखाने की कोशिश की कि राष्ट्रपति ट्रंप और भारत के प्रधानमंत्री,मोदी एक दूसरे के घनिष्ठ मित्र हैं। लेकिन अफसोस की बात यह है कि जब ट्रंप दूसरी बार राष्ट्रपति बने तो उन्होंने अपने शपथ ग्रहण समारोह में अपने विरोधी चीन के राष्ट्रपति,जिनपिंग को तो आमंत्रित किया लेकिन मोदी साहब को नहीं बुलाया। फिर जब जैसे कैसे मोदी जी ट्रंप साहब से मिलने गए तो उन्होंने पता नहीं क्या जादू चलाया कि भविष्य में भारत अमेरिका से तेल खरीदेगा,युद्ध पोतक विमान खरीदेगा, हथियार खरीदेगा,भारत अमेरिका का व्यापार बढ़ेगा, और भारत और अमेरिका में रिसिप्रोकल टैरिफ नीति अपनाई जाएगी। मोदी की उपस्थिति में ट्रंप ने कहा कि उन्होंने नरेंद्र मोदी को भारत में चुनाव को लेकर 182 करोड रुपए की राशि दी थी! इन सब बातों के बावजूद भी मोदी साहब चुप रहे! अब सवाल पूछा जाता है कि जब भारत को रूस से विश्व बाजार की कीमतों के मुकाबले में 30 प्रतिशत कम कीमतों पर तेल मिल रहा था तो मोदी साहब ऊंची कीमतों पर अमेरिका से तेल खरीदने के लिए क्यों राजी हुए! इसके अलावा राष्ट्रपति ट्रंप ने यह घोषणा की कि भारतीय विद्यार्थियों को अमेरिका में पढ़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इतना ही नहीं उन्होंने मोबाइल फोन एप्पल के मालिक को कहा कि वह भारत में मोबाइल फोन न बनाएं। अगर उन्होंने ऐसा किया तो एप्पल फोन के अमेरिका में आने पर 25त्न टैरिफ लगाया जाएगा। पहलगाम‌ में जब पाकिस्तानी आतंकवादियों ने 26 लोगों की हत्या कर दी और भारत ने बदले की कार्रवाई करते हुए जब पाकिस्तान में आतंकवादी ठिकानों पर हमला करके लगभग 150 आतंकवादी मार दिए और कई एयरबेस नष्ट कर दिए और पाकिस्तान के द्वारा भारत के ऊपर आक्रमण करने के लिए 500 से भी ज्यादा ड्रोन नष्ट कर दिए तो ट्रंप साहब ने दोनों युद्धरत देशों में युद्ध विराम की घोषणा कर दी। उनका कहना है कि ऐसा उन्होंने इसलिए किया ताकि दोनों देशों में परमाणु युद्ध ना हो जाए और इसके बदले में अमेरिका दोनों देशों के साथ व्यापार कर सके। हैरानी की बात यह है कि पाकिस्तान ने भारत में आतंकवादी वारदात की और ट्रंप भारत और पाकिस्तान को एक समान मानकर दोनों देशों में कश्मीर समस्या हल
करने के लिए मध्यस्थता की बात कर रहे हैं। जबकि भारत का कहना है कि युद्ध रोकने के लिए पाकिस्तान ने ही भारत से प्रार्थना की थी और इस बीच व्यापार की कोई बात नहीं हुई। भारतीय विदेश मंत्री डॉ जयशंकर ने भी यही कहा है कि दोनों देशों के बीच व्यापार की कोई बात नहीं हुई और ऑपरेशन सिंदूर के तहत युद्ध बंदी की घोषणा पाकिस्तान की प्रार्थना पर की गई! और कि कश्मीर भारत-पाकिस्तान का द्विपक्षी मामला है इसमें किसी की मध्यस्थता की जरूरत नहीं । यह तो ठीक-ठाक नहीं बताया जा सकता कि सच कौन बोल रहा है अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप या फिर भारतीय विदेश मंत्री! ऐसा लगता है जैसे अमेरिका के राष्ट्रपति मोहम्मद तुगलक की तरह है! अभी तक वह लगभग 32 फैसला अपने बदल चुके हैं! शपथ ग्रहण से पहले ही ट्रंप ने कह दिया था कि वह रूस और यूक्रेन में युद्ध समाप्त करवा देंगे लेकिन अभी तक वह युद्ध नहीं रुकवा सके! शांति वार्ता के लिए यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की के साथ व्हाइट हाउस में उनका व्यवहार शोभनीय नहीं था। कभी वह यूक्रेन को धमकी देते हैं, कभी रूस को धमकी देते हैं और कभी चीन को धमकी भी देते हैं और कभी 97000 व्यापारिक संबंध सुधारने की बात भी कहते हैं, व्यापारिक समझौते को लेकर सऊदी अरेबिया जाते हैं और कतर के शेख से बहुत बड़े व्यापारिक समझौते करते हैं और कभी सीरिया के आतंकवादियों को अभय दान देते हैं, कभी इजरायल की हमास तथा हूती आतंकवादियों को नष्ट करने के लिए मदद करते हैं,कभी ईरान के साथ आणविक समझौता न होने की स्थिति में उस पर आक्रमण करने की धमकी देते हैं। ट्रंप का व्यवहार बहुत ही अजीब रहा है जिससे अमेरिका की छवि धूमल हो रही है और विश्व के अनेक देशों के साथ उसके संबंध बिगड़ रहे हैं। पता नहीं क्या सोच कर उन्होंने विश्व स्वास्थ्य संगठन को आर्थिक सहायता बंद कर दिया है। उनका कहना है जिन विश्वविद्यालयों इसराइल के विरुद्ध तथा हमास और हूती के पक्ष में विचार रखने वाले विद्यार्थी हैं उन्हें अमेरिका से निकाल देना चाहिए और ऐसे विश्वविद्यालयों‌ को उन्होंने आर्थिक सहायता देनी बंद कर दी है। उन्होंने आदेश दिया है कि हर साल लगभग 3 लाख भारतीय जो अमेरिका में शिक्षा प्राप्त करने के लिए आते हैं उन्हें वीजा नहीं दिया जाएगा। जिस तरह से ट्रंप के विचार हैं उनको लेकर कभी भी तीसरा विश्व युद्ध हो सकता है। उन्होंने अपने संबंध यूरोपीय देशों के साथ भी बिगाड़ लिए हैं। अभी तक भारत के लोग यह समझते थे कि ट्रंप मोदी साहब के अच्छे मित्र हैं परंतु उनके अब तक के व्यवहार ने यह साबित कर दिया है कि वह किसी के मित्र नहीं।


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