मौजुदा सरकार की रेत व शराब दोनो ही क्षेत्र के लिये परेशानी
रवि सिंह-
बैकु΄ठपुर 26 अक्टूबर 2021 (घटती-घटना)। मौजुदा सरकार भले ही अपने आप को अच्छी सरकार बता रही है पर जमीनी हकीकत तो कुछ और ही बंया कर रही है। रेत का ठेका और उसके ठेकेदार सरकार के ही छवि को मटियामेट कर रहे है। वहीं शराबबंदी का वादा अधूरा है जमकर प्रदेश में पानी मिलाकर शराब बेचने की शिकायत सरकारी शराब दुकान में मिल रही है और इन दोनों मुद्दो पर सरकार को अपनी अच्छीखासी छवि को जनता के सामने खराब होती दिख रही है। पर सरकार बैकफुट पर है इस बात का इन्हें जरा भी एहसास नहीं। सम्पूर्ण छत्तीसगढ़ में सरकार की रेत नीति और सरकारी शराब दुकानों में मिल रही शराब मामले में लगातार शिकायतें हो रही है वहीं इन दोनों ही मामलों में जिनमे सरकार को बड़े स्तर पर राजस्व की प्राप्ति होती है। सरकार का सकारात्मक रुख उपभोक्ताओं और आम जनता के प्रति न होकर ठेकेदारों व प्लेसमेंट एजेंसियों की तरफ ज्यादा है। जो साफतौर पर देखा भी जा सकता है।
कोरिया जिले की बात करें तो रेत मामले में लगातार सुर्खियां बटोर रहा है, रेत ठेकेदार व उसके गुर्गों सहित जिला खनिज, पुलिस व आबकारी विभाग की जुगलबंदी जिस प्रकार जिले की रेत का दोहन किया जा रहा है वहीं किस तरह ठेकेदार रेत बाहरी राज्यों में भेजकर अपनी जेबें गर्म कर रहा है यह बात किसी से भी अब छुपी हुई नहीं है। रेत को ही लेकर प्रदेश सहित जिले की आम जनता किस कदर परेशान है, ठेकेदारों व उसके गुर्गों से किस तरह प्रताçड़त है, यह प्रतिदिन कहीं न कहीं खबर जरूर आती है। वहीं जिले के सरकारी शराब दुकानों में शराब की मिलावटी की चर्चाऐं भी कोई कम नहीं है। इस दोनों मसले में सरकार की छवि धूमिल हो रही है जिसे मौजुदा सरकार समझनी चाहिऐ। रेत खदानों को अपने अधिकार में पाने वाले ठेकेदारा न तो रेत का मूल्य ही बिक्री पर्चियों में अंकित कर रहे और न ही नियमानुसार रेत खदानों में दाम चस्पा किया जा रहा है। खनिज विभाग भी इस पर कोई संज्ञान लेने के बजाये ठेकेदार की जी हुजुरी में लगे है।
मदिरा प्रेमियों को भी मिल रहा शराब की बोतलों में पानी
जिला ही नहीं पूरा प्रदेश के सरकारी शराब दुकान आबकारी विभाग की देखरेख में है। मदिरा प्रेमीयों के मामले में, सरकारी शराब दुकानों से जो शराब बेची जा रही है उसके ब्रांड व पैकिंग को लेकर काफी शिकायतें हैं। जिस तरह से शराब की बोतलों में शराब दुकान संचालक पानी या अन्य कोई तरल पदार्थ मिलाकर बेच रहे हैं उससे इस बात का अंदेशा बना हुआ है कि कहीं किसी दिन प्रदेश या जिले में कहीं कोई बड़ी घटना न घट जाए जो मिलावटी या जहरीली शराब मामले का हो और तब की विकराल उत्तपन्न होने वाली स्थिति का अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकता। छत्तीसगढ़ में सबसे ज्यादा राजस्व देने वाले आबकारी विभाग के अधीन जिले में संचालित शराब दुकानों में किसी भी शराब की बोतल में एक चौथाई भाग पानी का होता है यह शिकायत आम हो गई है, शराब दुकान संचालक एक-एक खाली शीषी का भी 20 रुपये से 50 रुपये तक दाम देने को तैयार हैं जो कि ब्रांड अनुसार तय है, अब शराब की मिलावट का अंदाजा भी इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक खाली शीषी के लिए दुकानदार 20 से 50 रुपये खर्च कर रहा है क्योंकि वह उसमे मिलावट कर नकली शराब या पानी मिली शराब का कारोबार कर सके। वहीं मदिरा प्रेमियों के सेहत पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा यह न तो शराब बेचता दुकानदार समझने की कोशिश कर रहा है और न विभाग।
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