

कोरिया-एमसीबी से सूरजपुर तक दवा व्यापारियों की एकजुटता, मरीजों की सुरक्षा को बताया सबसे बड़ा मुद्दा
ऑनलाइन फार्मेसी के खिलाफ कोरिया-एमसीबी से सूरजपुर तक मेडिकल कारोबार ठप
दवा व्यापारियों की दो टूक — “मरीजों की सुरक्षा से समझौता मंजूर नहीं”
बैकुंठपुर/मनेंद्रगढ़/सूरजपुर, 21 मई 2026 (घटती-घटना)। ऑनलाइन फार्मेसी के विरोध और दवा विक्रय व्यवस्था में सख्त एवं प्रभावी कानून लागू करने की मांग को लेकर बुधवार को कोरिया, एमसीबी और सूरजपुर जिले में निजी मेडिकल दुकानों का बंद पूरी तरह सफल रहा,ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर आयोजित इस आंदोलन में जिलेभर के दवा व्यापारियों ने एकजुटता का परिचय दिया, सुबह से देर शाम तक अधिकांश निजी मेडिकल स्टोर बंद रहे, जिससे शहरों से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक बंद का व्यापक असर देखने को मिला।
हालांकि एक दिन के सांकेतिक राष्ट्रव्यापी बंद के बाद गुरुवार से सभी मेडिकल दुकानें पुनः खुल गईं और दवा बाजार सामान्य स्थिति में लौट आया,मेडिकल स्टोर खुलने से मरीजों एवं आम नागरिकों को राहत मिली, लेकिन दवा व्यापारियों ने स्पष्ट कर दिया कि उनकी मांगें अब भी बरकरार हैं और यदि सरकार ने समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए तो आंदोलन को आगे और व्यापक रूप दिया जा सकता है।
मरीजों की सुरक्षा को बताया सबसे बड़ा मुद्दा
कोरिया-एमसीबी औषधि विक्रेता संघ के नेतृत्व में आयोजित इस आंदोलन को विभिन्न व्यापारिक संगठनों,फार्मा व्यवसायियों और सामाजिक संगठनों का भी समर्थन मिला, संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि यह आंदोलन केवल व्यापारिक हितों के लिए नहीं, बल्कि मरीजों की सुरक्षा, दवा व्यवस्था में पारदर्शिता और स्वास्थ्य प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखने के उद्देश्य से किया गया,संघ के अध्यक्ष शैलेश कुमार गुप्ता ने कहा कि ऑनलाइन माध्यम से बिना पर्याप्त चिकित्सकीय सत्यापन दवाइयों की बिक्री गंभीर चिंता का विषय बन चुकी है, उन्होंने कहा कि बिना डॉक्टर की सलाह दवाओं की उपलब्धता,एंटीबायोटिक दवाओं का अनियंत्रित उपयोग, नकली एवं अमानक दवाओं की बिक्री तथा नशीली दवाओं के दुरुपयोग की आशंका लगातार बढ़ रही है, जो भविष्य में बड़े स्वास्थ्य संकट को जन्म दे सकती है,उन्होंने केंद्र सरकार से ऑनलाइन फार्मेसी के लिए अलग एवं कठोर नियामक कानून बनाने की मांग दोहराते हुए कहा कि दवा केवल व्यापार नहीं बल्कि लोगों के जीवन से जुड़ी जिम्मेदारी है।
जिलेभर में दिखा बंद का असर
बैकुंठपुर,मनेंद्रगढ़,चिरमिरी,सोनहत,खड़गवां,पटना,चर्चा,जनकपुर सहित विभिन्न क्षेत्रों में मेडिकल दुकानें पूरी तरह बंद रहीं,कई जगह दवा व्यापारियों ने बैठक आयोजित कर सरकार तक अपनी मांगों को प्रभावी ढंग से पहुंचाने की रणनीति पर चर्चा की,व्यापारियों ने कहा कि तकनीक का विरोध नहीं है,लेकिन दवा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में बिना निगरानी के ऑनलाइन व्यवस्था लागू करना उचित नहीं है।
सोनहत में निजी क्लिनिकों ने भी दिया समर्थन
सोनहत क्षेत्र में मेडिकल दुकानों के साथ कई निजी क्लिनिक भी बंद रखे गए। स्थानीय चिकित्सकों एवं निजी स्वास्थ्य संस्थानों ने केमिस्ट संघ का समर्थन करते हुए कहा कि बिना उचित निगरानी दवा वितरण स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बन सकता है,क्षेत्र में दिनभर बंद का व्यापक असर दिखाई दिया।
दूरस्थ जनकपुर क्षेत्र में भी दिखा असर
वनांचल क्षेत्र जनकपुर में भी दवा व्यापारियों ने स्वेच्छा से अपनी दुकानें बंद रखीं,व्यापारियों ने कहा कि ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों में गलत दवा वितरण के दुष्परिणाम और भी गंभीर हो सकते हैं,क्योंकि वहां स्वास्थ्य सुविधाएं पहले से सीमित हैं,ऐसे में ऑनलाइन दवा बिक्री पर प्रभावी नियंत्रण बेहद जरूरी है।
चिरमिरी और खड़गवां में भी एकजुटता
चिरमिरी क्षेत्र में मेडिकल व्यवसायियों ने आंदोलन को सफल बनाने में सक्रिय भूमिका निभाई, व्यापारियों ने कहा कि बिना चिकित्सकीय परामर्श दवाओं की उपलब्धता गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दे सकती है,वहीं खड़गवां क्षेत्र में भी मेडिकल संचालकों ने स्वेच्छा से अपनी दुकानें बंद रखीं,व्यापारियों ने कहा कि ऑनलाइन दवा बिक्री पर प्रभावी नियंत्रण नहीं होने से नकली और अमानक दवाओं का खतरा लगातार बढ़ रहा है।
सूरजपुर में भी दिनभर बंद रहे मेडिकल स्टोर
सूरजपुर जिले में भी ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में मेडिकल स्टोर बंद रहे,सूरजपुर औषधि विक्रेता संघ के बैनर तले आयोजित इस बंद का असर जिलेभर में देखने को मिला,संघ पदाधिकारियों ने कहा कि ऑनलाइन दवा बिक्री से छोटे और मध्यम स्तर के दवा व्यवसायियों के सामने आर्थिक संकट उत्पन्न हो रहा है,साथ ही बिना उचित परामर्श दवाओं की ऑनलाइन उपलब्धता लोगों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है।
आपातकालीन सेवाओं के लिए रही विशेष व्यवस्था
बंद के दौरान आम नागरिकों को परेशानी न हो, इसके लिए रेड क्रॉस एवं जन औषधि केंद्रों को बंद से अलग रखा गया था,साथ ही केमिस्ट संघ की ओर से विभिन्न क्षेत्रों के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए गए थे,ताकि जरूरतमंद मरीजों को आपातकालीन स्थिति में दवाइयां उपलब्ध कराई जा सकें। संघ के इस निर्णय की आम नागरिकों ने भी सराहना की।
आज से फिर सामान्य हुई दवा व्यवस्था
एक दिन के राष्ट्रव्यापी बंद के बाद गुरुवार सुबह से कोरिया,एमसीबी और सूरजपुर जिले की मेडिकल दुकानें फिर से खुल गईं,बैकुंठपुर, मनेंद्रगढ़,चिरमिरी,सोनहत,खड़गवां और सूरजपुर सहित विभिन्न क्षेत्रों में दवा बाजार सामान्य रूप से संचालित होते दिखाई दिए, मेडिकल स्टोर खुलने से मरीजों और आम लोगों को राहत मिली,दवा व्यापारियों ने कहा कि बंद केवल एक दिन का सांकेतिक आंदोलन था,लेकिन उनकी मांगें अभी भी कायम हैं,यदि सरकार ने ऑनलाइन फार्मेसी और दवा विक्रय व्यवस्था को लेकर जल्द ठोस एवं प्रभावी कदम नहीं उठाए,तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा,अंत में दवा व्यापारियों ने कहा कि मरीजों की सुरक्षा,दवा व्यवस्था की विश्वसनीयता और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
दवा व्यापार नहीं,जिम्मेदारी है…
आंदोलन के दौरान दवा व्यापारियों ने एक स्वर में कहा कि दवा केवल एक उत्पाद नहीं बल्कि लोगों के जीवन से जुड़ी जिम्मेदारी है,इसलिए दवा वितरण व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियंत्रित व्यवस्था देश की स्वास्थ्य प्रणाली के लिए घातक साबित हो सकती है,व्यापारियों का कहना था कि तकनीक का विरोध नहीं है,लेकिन दवा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में बिना प्रभावी निगरानी के ऑनलाइन व्यवस्था लागू करना उचित नहीं है,उन्होंने सरकार से मांग की कि मरीजों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए जल्द ठोस और कठोर कानून लागू किए जाएं।
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