
समस्याओं का ‘तत्काल समाधान’ और मंच से विकास का महाउत्सव
चंदौरा शिविर में मंत्री बोले-हर पात्र तक पहुंचेगी योजना,ग्रामीण बोले-बस हमारी बारी भी आ जाए!
सूरजपुर,21 मई 2026 (घटती-घटना)। सुशासन तिहार 2026 के तहत प्रतापपुर जनपद पंचायत के ग्राम चंदौरा में आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर एक बार फिर सरकारी व्यवस्थाओं, घोषणाओं और मंचीय विकास मॉडल का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया, मंच सजा था, माइक गरज रहे थे, विभागीय स्टॉल चमक रहे थे, अधिकारी फाइलों के साथ गंभीर मुद्रा में घूम रहे थे और जनता अपनी समस्याओं के आवेदन लेकर लाइन में खड़ी थी, कार्यक्रम में सूरजपुर जिले के प्रभारी एवं खाद्य मंत्री दयालदास बघेल मुख्य आकर्षण रहे, उनके साथ छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम अध्यक्ष रामसेवक पैकरा, विधायक शकुंतला पोर्ते, कलेक्टर रेना जमील सहित तमाम जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे, सरकार का दावा था कि ‘जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ हर पात्र व्यक्ति तक पहुंचाना’ उद्देश्य है, ग्रामीणों की उम्मीद थी कि शायद इस बार उनकी समस्या भी ‘पात्र’ मान ली जाए।
घोषणाओं का मौसम भी गर्मी की तरह चरम पर : शिविर में आदिवासी संस्कृति संरक्षण के नाम पर शैला एवं कर्मा दलों को 20-20 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की गई, साथ ही ग्राम चंदौरा में 10 लाख रुपये की लागत से सामुदायिक भवन निर्माण की भी घोषणा हुई,घोषणा सुनते ही ग्रामीण खुश हो गए, क्योंकि गांवों में घोषणाएं ही वह चीज हैं जो सबसे तेजी से पहुंचती हैं,काम कब शुरू होगा, कब पूरा होगा और किस गुणवत्ता का होगा — यह भविष्य के गर्भ में सुरक्षित रहता है।
सुशासन का उत्सव या विभागीय प्रदर्शनी?- शिविर में अलग-अलग विभागों ने अपने स्टॉल लगाए थे, कृषि विभाग खाद-बीज समझा रहा था, स्वास्थ्य विभाग बीमारियों से बचने की जानकारी दे रहा था, परिवहन विभाग हेलमेट पहनने की सलाह दे रहा था,पुलिस विभाग साइबर फ्रॉड से सावधान कर रहा था, ऐसा लग रहा था मानो पूरा प्रशासन एक दिन के लिए गांव में उतर आया हो, ग्रामीण भी स्टॉल घूम-घूमकर योजनाओं की जानकारी ले रहे थे, हालांकि कई लोग यह समझने की कोशिश कर रहे थे कि योजना लेने के लिए आवेदन देना है, दस्तावेज जमा करना है, ऑनलाइन करना है या फिर ‘सही जगह संपर्क’ करना है।
सड़क सुरक्षा पर भाषण, सड़क की हालत पर मौन-पुलिस विभाग ने लोगों को हेलमेट पहनने और यातायात नियमों का पालन करने की सलाह दी,यह अच्छी बात है लेकिन ग्रामीणों के मन में शायद यह सवाल भी रहा होगा कि जिन सड़कों पर गड्ढे ज्यादा और डामर कम हो, वहां हेलमेट सड़क से ज्यादा किससे बचाएगा? हालांकि ऐसे सवाल मंचीय कार्यक्रमों में आमतौर पर पूछे नहीं जाते।
जनता की समस्या बनाम प्रशासन की प्रक्रिया-सुशासन तिहार का उद्देश्य निश्चित रूप से लोगों तक शासन पहुंचाना है, लेकिन सवाल यह भी है कि यदि समस्याओं का समाधान नियमित व्यवस्था में समय पर हो जाए, तो फिर लोगों को शिविरों में आवेदन लेकर क्यों पहुंचना पड़े? ग्रामीणों की सबसे बड़ी परेशानी यही है कि छोटे-छोटे कामों के लिए महीनों दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं, फिर एक दिन शिविर लगता है, मंच सजता है, आवेदन जमा होते हैं और व्यवस्था यह संदेश देती है कि ‘सरकार आपके द्वार’ पहुंच गई है।
अंतिम सवाल :- सुशासन तिहार निश्चित रूप से प्रशासन और जनता के बीच संवाद का माध्यम है,लेकिन असली सुशासन तब माना जाएगा जब लोगों को आवेदन लेकर लाइन में न लगना पड़े, समस्याएं शिविर के इंतजार में न रहें, घोषणाएं जमीन पर भी उसी तेजी से उतरें जिस तेजी से मंच से बोली जाती हैं, फिलहाल चंदौरा में शिविर सफल रहा, मंच संतुष्ट रहा, अधिकारी सक्रिय दिखे और जनता उम्मीद लेकर घर लौट गई कि शायद अगली बार उसका आवेदन भी ‘मौके पर निराकृत’ हो जाए।
319 आवेदन आए…114 का मौके पर समाधान… बाकी आवेदन उम्मीद के भरोसे
शिविर में कुल 319 आवेदन प्राप्त हुए, इनमें से 114 आवेदनों का मौके पर ही निराकरण कर दिया गया, बाकी आवेदनों को संबंधित विभागों को ‘शीघ्र कार्रवाई’ के निर्देश देकर सरकारी प्रक्रिया की उस पवित्र परंपरा में शामिल कर दिया गया, जिसमें आवेदन पहले घूमता है, फिर फाइल बनता है,फिर टिप्पणी होती है और अंत में आवेदक यह सोचता रह जाता है कि उसका आवेदन आखिर गया कहां, हालांकि मंच से यह भरोसा जरूर दिलाया गया कि शासन गांव-गांव पहुंचकर समस्याओं का समाधान कर रहा है।
मंच से विकास,मैदान में धूप और जनता लाइन में…
चंदौरा शिविर में मंचीय ऊर्जा देखने लायक थी,भाषणों में विकास दौड़ रहा था,योजनाएं बह रही थीं और घोषणाएं उड़ रही थीं,प्रभारी मंत्री दयालदास बघेल ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में सरकार का संकल्प है कि हर जरूरतमंद तक योजना पहुंचे,किसानों के लिए धान खरीदी, गरीबों के लिए राशन, महिलाओं के लिए महतारी वंदन, ग्रामीणों के लिए आवास,युवाओं के लिए रोजगार,किसानों के लिए खाद-बीज और हर घर के लिए नल-जल — मंच से ऐसा लगा मानो समस्याएं अब सिर्फ इतिहास बनने वाली हैं,ग्रामीणों ने भी तालियां बजाईं,क्योंकि गांव में उम्मीद आज भी सबसे बड़ी सरकारी योजना है।
‘खुशियों की चाबी’ मिली,मगर कई घर अब भी इंतजार में…
कार्यक्रम में हितग्राहियों को राशन कार्ड,आयुष्मान कार्ड, ऋण पुस्तिका,पेंशन स्वीकृति,प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत ‘खुशियों की चाबी ‘,मत्स्य विभाग के जाल और आइस बॉक्स तथा कृषि विभाग के धान बीज वितरित किए गए, मंच पर फोटो खिंचे, प्रमाण पत्र बांटे गए और योजनाओं की सफलता का संदेश दिया गया, हालांकि गांवों में आज भी ऐसे कई परिवार हैं जो वर्षों से आवास, पेंशन और मूलभूत सुविधाओं की प्रतीक्षा कर रहे हैं, लेकिन सरकारी कार्यक्रमों की खूबी यही है कि मंच पर सब कुछ व्यवस्थित दिखता है।
कलेक्टर की अपील : पौधा लगाइए,आधार बनवाइए,बीमारी से बचिए….
कलेक्टर रेना जमील ने ग्रामीणों से आधार कार्ड, आयुष्मान कार्ड बनवाने,टीबी,सिकल सेल और कुष्ठ जैसी बीमारियों के प्रति जागरूक रहने की अपील की,उन्होंने बाल विवाह रोकने,पौधारोपण करने और राजस्व मामलों का समय पर निराकरण करने की बात भी कही,सरकारी शिविरों की सबसे बड़ी खूबी यही होती है कि यहां एक ही मंच से स्वास्थ्य,शिक्षा,पर्यावरण,सामाजिक सुधार,रोजगार,खेती,सुरक्षा और विकास — सबका समाधान पैकेज में मिल जाता है।
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