नई दिल्ली, 26 सितम्बर 2022। सुप्रीम कोर्ट ने राजीव गाधी हत्याकाड मे उम्रकैद की सजा काट रही नलिनी श्रीहरन की समय से पहले रिहाई की माग से जुड़ी याचिका पर सोमवार को केद्र और तमिलनाडु सरकार से जवाब मागा। न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना की पीठ ने केद्र और तमिलनाडु सरकार को नोटिस जारी करते हुए याचिका पर उनका जवाब मागा। शीर्ष अदालत ने मामले मे दोषी ठहराए गए आर पी रविचद्रन की याचिका पर भी नोटिस जारी किए। नलिनी ने मद्रास उच्च न्यायालय के 17 जून के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमे समय पूर्व रिहाई के उनके अनुरोध को खारिज कर दिया गया था और दोषी ठहराए गए ए. जी. पेरारीवलन की रिहाई को लेकर उच्चतम न्यायालय के आदेश का उल्लेख किया था। उच्च न्यायालय ने 17 जून को पूर्व प्रधानमत्री राजीव गाधी हत्याकाड मे दोषी श्रीहरन और रविचद्रन की याचिकाओ को खारिज कर दिया था, जिसमे राज्य के राज्यपाल की सहमति के बिना उनकी रिहाई का आदेश दिया गया था।
पेरारिवलन जेल मे 30 साल से ज्यादा की सजा काट चुके थे
उच्च न्यायालय ने उनकी याचिकाओ को खारिज करते हुए कहा था कि उच्च न्यायालयो के पास सविधान के अनुच्छेद 226 के तहत ऐसा करने की शक्ति नही है। उच्चतम न्यायालय के पास अनुच्छेद 142 के तहत विशेष शक्ति है। सविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी असाधारण शक्ति का इस्तेमाल करते हुए शीर्ष अदालत ने 18 मई को पेरारिवलन को रिहा करने का आदेश दिया था। पेरारिवलन जेल मे 30 साल से ज्यादा की सजा काट चुके थे।
नलिनी को मृत्युदड की सजा सुनाई गई थी
तमिलनाडु के श्रीपेरबुदूर मे एक चुनावी रैली के दौरान 21 मई, 1991 की रात को एक महिला आत्मघाती हमलावर द्वारा राजीव गाधी की हत्या कर दी गई थी। आत्मघाती हमलावर की पहचान धनु के रूप मे हुई थी। इस पूरी साजिश मे नलिनी को मृत्युदड की सजा सुनाई गई थी जिसे 2001 मे यह देखते हुए उम्र कैद मे बदल दिया गया था कि उसकी एक बेटी भी है।
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