देहरादून, 25 सितम्बर 2022। अकिता भडारी के परिजन आखिरकार अतिम सस्कार को तैयार हो गए है। बिटिया का अब एनआईटी घाट मे अतिम सस्कार किया जाएगा। रविवार शाम को पुलिस बल और प्रदर्शनकारियो की भारी भीड़ की मौजूदगी मे अकिता के शव को मोर्चरी से बाहर निकाला गया। एबुलेस से अकिता के शव को पैतृक घाट एनआईटी ले जाया गया। भारी सख्या मे ग्रामीण भी एबुलेस के साथ घाट की ओर चले।
अकिता भडारी हत्याकाड मामले को लेकर रविवार को श्रीनगर मे लोगो का गुस्सा फूट पड़ा था। सुबह से ही मोर्चरी मे डटे आक्रोशित लोगो को जब प्रशासन की ओर से पोस्टमार्टम रिपोर्ट सार्वजनिक न करने व परिजनो के लिए मुआवजा व नौकरी की ठोस व्यवस्था करने को लेकर कोई आश्वासन नही मिला तो लोगो ने प्रात: 11 बजे मोर्चरी के बाहर बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर जाम लगा दिया।
इस दौरान लोगो ने उत्तराखंड सरकार व श्रीनगर एव पौड़ी विधायक के विरोध मे जमकर नारेबाजी की। जाम के दौरान लोगो ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट सार्वजनिक करने, अकिता भडारी के परिजनो को सरकार की ओर से एक करोड़ रूपए का मुआवजा देने व परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दिलाए जाने की माग की।
आक्रोशित लोगो ने कहा कि जब तक उन्हे इस सदर्भ मे लिखित आश्वासन नही मिल जाता है तब तक वह जाम खोलने वाले नही है। जाम के दौरान लोग हत्यारो को फासी देने व उत्तराखंड सरकार मुर्दाबाद के नारे लगाते रहे। मौके पर एसडीएम श्रीनगर अजयवीर सिह, एएसपी शेखर सुयाल व डीएम डा.विजयकुमार जोगदडे ने बारी-बारी से लोगो को समझाने का प्रयास किया। लेकिन लोग अपनी माग पर अड़े रहे।
करीब चार दौर की वार्ता होने के बावजूद शाम चार बजे तक कोई समाधान नही निकल पाया। दोपहर बाद लोगो का यहा पर बड़ी सख्या मे जमावड़ा लगने लग गया। जिसमे महिलाओ ने भी बड़ी सख्या मे भागीदारी की। गढ़वाल विवि के विभिन्न छात्र सगठनो के कार्यकर्ताओ ने बिना कुछ खाए-पीये दिन भर धरना प्रदर्शन किया।
अकिता हत्याकाड से गुस्साए लोगो के आक्रेाश को देखते हुए प्रशासन द्वारा अकिता के पिता को रोड जाम कर बैठे लोगो के समक्ष लाया गया। इस दौरान अकिता के पिता वीरेद्र सिह भडारी ने कहा कि वह पुलिस की जाच से सतुष्ट है। लेकिन वह चाहते है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट सार्वजनिक हो तभी जाकर अकिता के शव का अतिम सस्कार किया जाए। इस दौरान उन्होने लोगो से जाम खोलने की अपील भी की।
कहा इससे आने-जाने वाले लोगो को भारी दिक्कतो का सामना करना पड़ रहा होगा। साथ ही यदि जाम मे कोई गभीर बीमार आदमी फसा होगा तो उसके जीवन का भी सवाल है। इस पर लोगो ने अति आवश्यक सेवाओ जैसे एबुलेस व बीमार लोगो केा ले जाने वाले वाहनो को जाम से मुक्त रखने की बात कहते हुए जाम खोलने की अपील को ठुकरा दिया।
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