नई दिल्ली, 01 सितम्बर 2022। प्राइवेट स्कूलो के शिक्षको के लिए अच्छी खबर आई है। बता दे कि सुप्रीम कोर्ट ने सभी प्राइवेट स्कूलो को निर्देश दिया है कि वे शिक्षको को छह सप्ताह के भीतर 3 अप्रैल 1997 से पहले की सेवा के लिए याज सहित ग्रेच्युटी का भुगतान करे। इस मामले मे मगलवार, 30 अगस्त को आए फैसले मे अदालत ने कर्मचारी के दायरे मे शिक्षको सहित ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम, 1972 मे ससद के सशोधन की वैधता को सही ठहराया और निजी स्कूलो के लिए पात्र लोगो को ग्रेच्युटी का भुगतान करना अनिवार्य कर दिया है।
अहमदाबाद निजी प्राथमिक शिक्षक सघ से सबधित मामले मे सुप्रीम कोर्ट मे जस्टिस सजीव खन्ना की अगुवाई वाली पीठ ने कानून सबधी दोष का हवाला देते हुए यह आदेश दिया। पीठ ने निजी स्कूलो को छह सप्ताह मे अधिनियम के तहत कर्मचारियो/ शिक्षको को बयाज सहित ग्रेच्युटी का भुगतान करने का आदेश जारी किया है। बता दे कि इडिपेडेट स्कूल्स फेडरेशन ऑफ इडिया की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश आया है।
निजी स्कूलो और उनसे जुड़ी सस्थाओ से सशोधन की चुनौती को खारिज करते हुए न्यायमूर्ति सजीव खन्ना और न्यायमूर्ति बेला एम. त्रिवेदी की पीठ ने कहा कि कर्मचारी के लिए ग्रेच्युटी उसके द्वारा दी जा रही सेवाओ की न्यूनतम शर्तो मे से एक है। बता दे कि इससे पहले कुछ निजी स्कूलो का दावा था कि पीएजी अधिनियम की धारा 2 (ई) मे के तहत शैक्षणिक सस्थानो या स्कूलो मे जो शिक्षक कार्य कर रहे है वो कर्मचारी की श्रेणी मे नही आते है। अदालत ने इस दावे को खारिज कर दिया है।
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