मुफ्त की सौगाते’ बाटने वाले केस को 3 जजो की बेच के पास भेजा
नई दिल्ली , 26 अगस्त 2022। राजनीतिक पार्टियो द्वारा ‘फ्रीबीज‘ यानी मुफ्त की सौगाते बाटने पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला सामने आया है। कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के लिए केस को तीन जजो की बेच को पुनर्विचार के लिए ट्रासफर कर दिया है। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मसले पर विशेषज्ञ कमिटी का गठन करना सही होगा। लेकिन उससे पहले कई सवालो पर विचार करना जरूरी है। 2013 के सुब्रमण्यम बालाजी फैसले की समीक्षा भी जरूरी है। हम यह मामला तीन जजो की विशेष बेच को सौप रहे है। अगली सुनवाई दो हफ्ते बाद होगी।
सुप्रीम कोर्ट के वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर अदालत का यह फैसला आया है। कोर्ट ने कहा कि ‘फ्रीबीज’ टैक्सपेयर का महत्वपूर्ण धन खर्च किया जाता है। हालाकि सभी योजना पर खर्च फ्रीबीज नही होते। यह मसला चर्चा का है और अदालत के दायरे से बाहर है।
अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि सरकार को ऑल पार्टी मीटिग बुलाकर चर्चा करनी चाहिए। इसके लिए कमेटी बनाना अच्छा रहेगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘कुछ सवाल है जैसे कि न्यायिक हस्तक्षेप का दायरा क्या है? क्या अदालत किसी भी योजना को लागू करने योग्य आदेश पास कर सकती है? समिति की रचना क्या होनी चाहिए? कुछ पार्टी का कहना है कि सुब्रमण्यम बालाजी 2013 के फैसले पर भी पुनर्विचार की जरूरत है।’
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि फ्रीबिज एक ऐसी स्थिति पैदा कर सकती है, जहा राज्य को दिवालिया होने की ओर धकेल दिया जाता है। उन्होने कहा कि ऐसी मुफ्त घोषणा का इस्तेमाल पार्टी की लोकप्रियता बढ़ाने के लिए किया जाता है। यह राज्य को वास्तविक उपाय करने से वचित करता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निर्वाचन लोकतत्र मे निर्वाचक मडल के पास सच्ची शक्ति है।
इस मामले की पिछली सुनवाई मे कोर्ट सरकार से सर्वदलीय बैठक के जरिए एक राय बनाने की बात कह चुका है। चुनाव आयोग ने भी कहा कि इस बाबत नियम कायदे और कानून बनाने का काम उसका नही, बल्कि सरकार का है। वही, सरकार ने कहा कि कानून बनाने का मामला इतना आसान नही है। कुछ विपक्षी पार्टिया इस मुफ्त की घोषणाए करने को सविधान प्रदा अभिव्यक्ति के अधिकार का अग मानती है।
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