तिरुवतपुरम, 09 अगस्त 2022। केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने मुख्यमत्री पिनाराई विजयन के निजी सचिव केके रागेश की पत्नी प्रिया वर्गीज की मलयालम विभाग मे एसोसिएट प्रोफेसर के रूप मे नियुक्ति मे कथित अनियमितता को लेकर कन्नूर विश्वविद्यालय के कुलपति से स्पष्टीकरण मागा है। राजभवन के करीबी लोगो ने कहा कि राज्यपाल ने उनकी नियुक्ति से सबधित दस्तावेजो की जाच की और उनकी नियुक्ति मे विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के मानदडो का चौकाने वाला उल्लघन पाया। वीसी गोपीनाथ रवीद्रन को दस दिन मे स्पष्टीकरण देने को कहा गया है।
राजभवन के करीबी लोगो ने कहा कि राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान वास्तव मे विश्वविद्यालयो मे महत्वपूर्ण पदो पर राजनीतिक हस्तक्षेप और भाई-भतीजावाद से परेशान है, उन्होने कहा कि वह इस बार वीसी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की योजना बना रहे है।
उधर, नियुक्ति पर राज्यपाल के सीधे जुड़ने से परेशानी को भापते हुए साारूढ़ माकपा ने अपने नेताओ से इस मुद्दे पर कोई टिप्पणी नही करने को कहा है। सोमवार को राज्यपाल ने 11 अध्यादेशो पर हस्ताक्षर करने से इनकार करते हुए कहा था कि यह लोकतत्र की भावना के खिलाफ है और सरकार से विधानसभा मे कानून लाने को कहा। लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रट के सयोजक ई पी जयराजन ने कहा, ‘हम राज्यपाल के साथ किसी टकराव के पक्ष मे नही है।
गौरतलब है कि पिछले नवबर मे उस समय विवाद खड़ा हो गया था जब कथित तौर पर अधिक अनुभवी और योग्य शिक्षको को दरकिनार करते हुए एसोसिएट प्रोफेसर की भर्ती के लिए आयोजित एक साक्षात्कार मे प्रिया को प्रथम रैक से सम्मानित किया गया था। एक आरोप था कि माकपा नेता की पत्नी की नियुक्ति को सुविधाजनक बनाने के लिए वीसी का चार साल का कार्यकाल पुरस्कार के रूप मे बढ़ाया गया था। हालाकि राज्यपाल ने कन्नूर वीसी को विस्तार देने पर गभीर आपçा व्यक्त की, सरकार ने कथित तौर पर उन पर पुन: नियुक्ति आदेश पर हस्ताक्षर करने के लिए दबाव डाला, जिसमे वादा किया गया था कि विश्वविद्यालय प्रशासन मे कोई राजनीतिक हस्तक्षेप नही होगा।
पिछले साल सेव यूनिवर्सिटी कैपेन कमेटी ने कई बार राज्यपाल को याचिका दी थी कि योग्य उम्मीदवारो को दरकिनार करते हुए बहुत सारी राजनीतिक नियुक्तियो की जा रही है। यूजीसी के दिशा-निर्देशो के अनुसार एसोसिएट प्रोफेसर की योग्यता पीएचडी और आठ साल का शिक्षण अनुभव है। लेकिन विश्वविद्यालय बचाओ अभियान समिति ने दावा किया कि प्रिया को पीएचडी करने के बाद केवल एक महीने का शिक्षण अनुभव था।
पिछले अप्रैल मे उच्च न्यायालय ने पार्टी विधायक ए एन शमीर की पत्नी शहाला की कन्नूर विश्वविद्यालय मे सहायक प्रोफेसर के रूप मे नियुक्ति को रद्द कर दिया था, जब एक उम्मीदवार ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था। सेव यूनिवर्सिटी कैपेन कमेटी के नेता आर एस शशि कुमार ने कहा “राजनीति इन दिनो विश्वविद्यालयो मे नियुक्तियो के लिए केवल मानदड है। अक्सर अनुभवी और अधिक योग्य इस प्रक्रिया मे दरकिनार कर दिए जाते है।”
राज्यपाल ने सीएम को लिखी थी चिट्ठी
पिछले दिसबर मे राज्यपाल ने सीएम पिनाराई विजयन को कड़े शदो मे एक पत्र भेजा जिसमे उन्होने कहा कि वह वास्तव मे उच्च शिक्षा क्षेत्र के “गिरते मानक” से आहत है और इसके लिए “बेशर्मी से राजनीतिक हस्तक्षेप” को दोषी ठहराया। उन्होने सरकार से कहा कि अगर राजनीतिक हस्तक्षेप इसी तरह जारी रहा तो वह चासलर का पद सभाले लेकिन सीएम ने उनसे इस पद पर बने रहने के अनुरोध के साथ मुलाकात की और वादा किया कि नियुक्तियो मे कोई हस्तक्षेप नही होगा। लेकिन राजभवन के अदरूनी सूत्रो ने कहा कि प्रिया वर्गीस की हालिया नियुक्ति ने उन्हे और नाराज कर दिया है।
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