वाराणसी, 25 जून 2022। कोरोना सक्रमण की रोकथाम के लिए केद्र सरकार की ओर से कोरोना टीके की दूसरी खुराक देने के बाद अब बूस्टर डोज की आवश्यकता पड़ने लगी है और लोगो को बूस्टर डोज दी जा रही है। लेकिन कोरोना सक्रमण से बचाव मे कारगर एटीबॉडी लोगो के शरीर मे कम हो रही है? डॉयट के 66 फीसदी लोगो मे एटीबॉडी खत्म होने के कगार पर है। इनमे 25 फीसदी वे कर्मचारी भी है जिन्हे विधानसभा चुनाव मे ड्यूटी लगने के कारण बूस्टर डोज लगी थी।
वाराणसी के सारनाथ स्थित जिला शिक्षा एव प्रशिक्षण केद्र (डायट) मे बीएचयू के जीव विज्ञान के रिसर्च स्कॉलर रुद्र पाडेय और उनकी टीम ने मई मे 165 लोगो का एटीबॉडी चेक किया था। उनमे स्टाफ, छात्र और आस-पास के लोग शामिल थे। जाच रिपोर्ट के अनुसार 66 फीसदी लोगो की एटीबॉडी खत्म होने के कगार पर है। इसमे 40 वे लोग शामिल है जिन्हे हाल ही मे हुए विधानसभा चुनाव के दौरान बूस्टर डोज लगी थी।
डायट के प्रवक्ता गोविद चौबे ने बताया कि जिन्हे बूस्टर डोज लगी थी, उनकी एटीबॉडी 100 यूनिट से कम हो गई। जबकि वैक्सीन लगने के दौरान एटीबॉडी करीब पाच हजार यूनिट होती है। वही जीन वैज्ञानिक प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे के अप्रैल मे हुए अध्ययन मे भी यह तथ्य सामने आया था कि तीन महीने बाद 76 फीसदी लोगो की एटीबॉडी खत्म हो जाएगी। उस क्रम मे डॉयट की रिपोर्ट चौकाने वाली है।
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