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नई दिल्ली@विदेश म΄त्री जयश΄कर ने भारत पर दबाव बनाने जुटे यूरोपीय देशो΄ को दिया दो टूक जवाब

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नई दिल्ली, 26 अप्रैल 2022।
दुनिया के 90 देशो΄ के म΄त्रियो΄, शिक्षाविदो΄ और सरकारी प्रतिनिधियो΄ के सामने विदेश म΄त्री एस जयश΄कर ने साफ ऐलान किया कि भारत वैश्विक म΄च पर अपनी बड़ी भूमिका निभाने को तैयार है। दुनिया के समक्ष जिस तरह से खाद्य स΄कट पैदा होने की स΄भावना जताई जा रही है, जयश΄कर ने इस समस्या से उबरने मे΄ भी पूरी मदद देने का आश्वासन दिया लेकिन यह तभी स΄भव होगा जब विश्व व्यापार स΄गठन (डलूटीओ) के मौजूदा नियमो΄ मे΄ कुछ बदलाव हो।
यूक्रेन-रूस युद्ध को लेकर भारत पर दबाव बनाने वाले यूरोपीय लाबी को भी विदेश म΄त्री ने दो टूक जवाब दिया कि यह उनके लिए चेतावनी है कि वो एशिया मे΄ जो हो रहा है, उस पर भी नजर डाले΄। चीन का नाम लिये बगैर उसके आक्रामक रवैये की तरफ इशारा करते हुए जयश΄कर ने कहा कि, पिछले एक दशक से एशिया की स्थिति अच्छी नही΄ है। देश की राजधानी मे΄ चल रहे रायसीना डायलॉग मे΄ विदेश म΄त्री जयश΄कर का लहजा भारतीय कूटनीति के बढ़ते आत्मविश्वास को बताता है।
जयश΄कर के साथ इस कार्यक्रम मे΄ शामिल कई विदेश म΄त्रियो΄ व दूसरे गणमान्य कूटनीतिज्ञो΄ के सवाल का जवाब दे रहे थे। भारत की यात्रा पर आई नार्वे की विदेश म΄त्री एनीकेन हुईतफेल्त ने यूक्रेन का मुद्दा उठाया और भारत की प्रतिक्रिया जाननी चाही, जयश΄कर का जवाब था कि भारत की स्थिति स्पष्ट है, हम वहा΄ युद्ध की समाप्ति और बातचीत की प्रक्रिया फिर से शुरु करने का समर्थन करते है΄। लेकिन इसके बाद जयश΄कर ने उन्हे΄ यह याद दिलाया कि जब हम स΄प्रभुता को आदर देने की बात करते है΄ तो याद रखना चाहिए कि एक वर्ष पहले ही हमने एक पूरी मानवता को भय΄कर स΄कट मे΄ छोड़ दिया। सभी देश अपने हितो΄ और भरोसे मे΄ साम΄जस्य बनाने मे΄ जुटे है΄ और इसमे΄ कुछ गलत नही΄ है।
जयश΄कर यहा΄ भारत के पाकिस्तान व चीन के साथ तनाव के बाद यूरोपीय देशो΄ के सुझावो΄ की तरफ इशारा कर रहे थे। आगे जयश΄कर ने कहा कि, एशिया मे΄ पिछले 10 वषोर्΄ से जो रहा है उस पर यूरोप ने कभी ध्यान नही΄ दिया। जो समस्या अभी यूरोप मे΄ है वह आगे एशिया मे΄ भी पैदा हो सकती है। इसके बाद जयश΄कर ने चुटकी लेते हुए कहा कि, “एशिया मे΄ जब कानून सम्मत विश्व व्यवस्था का उल्ल΄घन किया जाता है।
तो हमे΄ यह सलाह दी जाती है कि हम उन देशो΄ के साथ कारोबार बढ़ाए΄। कम से कम हम यूरोपीय देशो΄ को यह सलाह नही΄ दे रहे।”
जयश΄कर ने यूक्रेन-रूस युद्ध के बाद दुनिया मे΄ आए इनर्जी और खाद्य स΄कट का जिक्र करते हुए कहा कि ”दुनिया मे΄ खाद्यान्नो΄ की कमी हो रही है और खाने पीने की चीजे΄ मह΄गी हो रही है΄। भारत यहा΄ काफी मदद कर सकता है। हम कृषि उत्पादो΄ और खास तौर पर गेहू΄ का निर्यात बढ़ा सकते है΄। हम कोशिश कर रहे है΄ कि किस तरह से गेहू΄ की वैश्विक कमी को पूरा करने मे΄ मदद करे΄। यहा΄ कुछ नियमो΄ को लेकर दिक्कत है कि हम अपने भ΄डार से कितना निर्यात कर सकते है΄। इस बारे मे΄ डलूटीओ के नियम है΄। उसमे΄ बदलाव करना होगा। यह सामान्य स्थिति नही΄ है इसिलए उम्मीद है कि डलूटीओ इस नियम पर पुनर्विचार करेगा। हम इस क्षेत्र मे΄ बहुत बड़ा योगदान कर सकते है΄ और इसके लिए हम तैयार है΄।”


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