- झुमका में साहित्य,संस्कृति और लोककला का संगम,कोसम के मंच से नियमित आयोजन का भरोसा
- 38 कवियों का काव्यपाठ,लोककला की रंगारंग प्रस्तुति…कोरिया साहित्य महोत्सव का भव्य आगाज
- कोसम के मंच से साहित्य की ताकत का संदेश, स्वास्थ्य मंत्री बोले—समाज की दिशा तय करता है साहित्य
- कोरिया साहित्य महोत्सव के चौथे संस्करण में उमड़ा साहित्यिक उत्साह, संस्कृति विभाग से जोड़ने का प्रयास
- संस्कृति विभाग के सहयोग से कोसम को नियमित आयोजन बनाने की दिशा में प्रयास का आश्वासन
- कलेक्टर ने कहा—साहित्य महोत्सव छिपी प्रतिभाओं को मंच देने का सशक्त माध्यम


-संवाददाता-
बैकुण्ठपुर,25 अक्टूबर 2026 (घटती-घटना)। कोरिया जिले की सांस्कृतिक और साहित्यिक पहचान को नई ऊंचाई देने की दिशा में आयोजित कोरिया साहित्य महोत्सव (कोसम) का चतुर्थ संस्करण शनिवार शाम झुमका ओपन थिएटर में पूरे उत्साह और उल्लास के साथ प्रारंभ हुआ,छत्तीसगढ़ शासन के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने दीप प्रज्ज्वलित कर दो दिवसीय महोत्सव का औपचारिक शुभारंभ किया,इस अवसर पर साहित्य,लोककला, संस्कृति और सामाजिक सरोकारों का ऐसा संगम देखने को मिला,जिसमें स्थापित साहित्यकारों से लेकर स्थानीय कलाकारों, विद्यार्थियों और नई पीढ़ी के रचनाकारों तक को अपनी प्रतिभा प्रस्तुत करने का अवसर मिला, महोत्सव के शुभारंभ समारोह में कोरिया जिले की कलेक्टर रोक्तिमा यादव,दक्षिण पूर्व कोयला क्षेत्र एसईसीएल बैकुण्ठपुर के महाप्रबंधक नरेश प्रसाद,अंचल के वरिष्ठ साहित्यकार वीरेंद्र श्रीवास्तव और देवेंद्र तिवारी विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए,प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे साहित्यकारों, कवियों,संस्कृतिकर्मियों, प्रशासनिक अधिकारियों और कला-साहित्य प्रेमियों की उपस्थिति ने आयोजन को व्यापक स्वरूप प्रदान किया।
कोरिया साहित्य महोत्सव का चतुर्थ संस्करण केवल साहित्यिक प्रस्तुतियों तक सीमित नहीं रहा,बल्कि शिक्षा,स्वास्थ्य और साइबर अपराध जैसे आमजन से जुड़े विषयों पर संवाद का मंच भी बना,पहले दिन 38 कवियों ने काव्यपाठ किया,स्थानीय कलाकारों और विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं तथा विषय विशेषज्ञों ने जनहित से जुड़े मुद्दों पर अपने विचार साझा किए,आयोजन के दौरान साहित्य की सामाजिक भूमिका,स्थानीय प्रतिभाओं को प्रोत्साहन और जिले की सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने पर विशेष जोर दिखाई दिया।
साहित्य केवल अभिव्यक्ति नहीं, समाज को दिशा देने का माध्यमः श्याम बिहारी जायसवाल-महोत्सव के मुख्य अतिथि स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने अपने संबोधन में कहा कि साहित्य ही समाज की दिशा का निर्धारण करता है,साहित्यकार अपनी रचनाओं के माध्यम से जनचेतना जागृत करते हैं,समाज को विचार देते हैं और लोकहित के मार्ग को प्रशस्त करते हैं,सद्साहित्य की प्रासंगिकता केवल वर्तमान तक सीमित नहीं रहती,बल्कि वह आने वाली पीढि़यों के लिए भी मार्गदर्शक की भूमिका निभाता है,मंत्री ने कहा कि साहित्य समाज का दर्पण होने के साथ-साथ उसके चिंतन और बदलाव का माध्यम भी है, किसी समाज की सांस्कृतिक चेतना,सामाजिक संवेदनशीलता और वैचारिक परिपक्वता को समझने में साहित्य की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऐसे आयोजनों से लोगों को साहित्यकारों और कलाकारों के विचारों को सुनने,समझने और उनसे जुड़ने का अवसर मिलता है,उन्होंने कोरिया साहित्य महोत्सव की सराहना करते हुए कहा कि यह आयोजन तेजी से पूरे प्रदेश में अपनी विशिष्ट पहचान बना रहा है,साहित्य के साथ लोककला और संस्कृति को एक मंच पर लाने का प्रयास उल्लेखनीय है, उन्होंने आयोजन से जुड़ी टीम अभिव्यक्ति के कार्यों की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस प्रकार की पहल स्थानीय साहित्यिक और सांस्कृतिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, स्वास्थ्य मंत्री ने संस्कृति विभाग की सहभागिता से कोरिया साहित्य महोत्सव को नियमित रूप से आयोजित कराने के लिए हरसंभव प्रयास करने का आश्वासन भी दिया,उनके इस वक्तव्य से महोत्सव को भविष्य में और व्यापक स्वरूप मिलने की उम्मीद जगी है,यदि आयोजन को निरंतर संस्थागत सहयोग मिलता है,तो इससे जिले के साहित्यकारों,लोककलाकारों,युवाओं और विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रस्तुत करने के अधिक अवसर मिल सकते हैं।
एसईसीएल ने खेल,कला और साहित्य को सहयोग देने की प्रतिबद्धता दोहराई-महोत्सव के शुभारंभ अवसर पर एसईसीएल बैकुण्ठपुर क्षेत्र के महाप्रबंधक नरेश प्रसाद ने कहा कि एसईसीएल आयोजन के प्रथम वर्ष से ही इसमें अपनी भागीदारी निभाता आ रहा है, उन्होंने कहा कि जिले में खेल,कला, संस्कृति और साहित्य से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए एसईसीएल बैकुण्ठपुर क्षेत्र हमेशा सहयोगी की भूमिका निभाने के लिए तैयार है, उन्होंने कोरिया साहित्य महोत्सव के चार वर्ष पूरे होने पर आयोजकों को बधाई और शुभकामनाएं दीं,किसी क्षेत्र में साहित्यिक और सांस्कृतिक गतिविधियों को निरंतर बनाए रखने के लिए सामाजिक संस्थाओं,प्रशासन और स्थानीय सहयोगी संगठनों की भागीदारी महत्वपूर्ण होती है,कोसम के आयोजन में एसईसीएल की सहभागिता इसी सहयोगात्मक प्रयास का हिस्सा रही है,महोत्सव के चार संस्करण पूरे होना आयोजन से जुड़े लोगों के निरंतर प्रयासों को दर्शाता है,अब संस्कृति विभाग से संभावित सहयोग के आश्वासन के बाद आयोजन के भविष्य और उसके विस्तार को लेकर भी उम्मीदें बढ़ी हैं।
38 कवियों के काव्यपाठ से सजी साहित्यिक शाम-कोरिया साहित्य महोत्सव के पहले दिन प्रदेश के 38 कवियों ने काव्यपाठ किया, कविता के माध्यम से विभिन्न भावों, विचारों और सामाजिक सरोकारों की अभिव्यक्ति ने आयोजन को साहित्यिक रंग प्रदान किया,कवियों की भागीदारी ने यह भी रेखांकित किया कि ऐसे मंच विभिन्न क्षेत्रों के रचनाकारों को एक साथ आने और साहित्य के प्रति साझा रुचि रखने वाले लोगों से संवाद करने का अवसर देते हैं,काव्यपाठ के साथ स्थानीय प्रतिभाओं को भी मंच प्रदान किया गया, पांच स्थानीय कलाकारों के अलावा सुंदरपुर विद्यालय और कन्या महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं, विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में नई ऊर्जा का संचार किया और स्थानीय कला प्रतिभाओं को सामने आने का अवसर मिला, स्थानीय कलाकारों और विद्यार्थियों की भागीदारी किसी भी साहित्यिक-सांस्कृतिक महोत्सव के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि इससे आयोजन का जुड़ाव सीधे स्थानीय समाज से बनता है,स्थापित रचनाकारों के साथ विद्यार्थियों और स्थानीय कलाकारों को स्थान मिलने से अनुभवों के आदान-प्रदान और नई प्रतिभाओं को प्रोत्साहन देने का अवसर भी तैयार होता है।
शिक्षा,स्वास्थ्य और साइबर अपराध पर विशेषज्ञों ने रखे विचार- कोरिया साहित्य महोत्सव के पहले दिन साहित्यिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ जनहित से जुड़े विषयों पर विशेष परिचर्चा सत्र आयोजित किए गए,इन सत्रों में शिक्षा,स्वास्थ्य और साइबर अपराध जैसे मुद्दों पर संबंधित विषय विशेषज्ञों ने जानकारी साझा की,शिक्षा विषय पर जितेंद्र गुप्ता ने विचार रखे,स्वास्थ्य से संबंधित परिचर्चा में सिविल सर्जन डॉ. आयुष जायसवाल शामिल हुए,जबकि साइबर अपराध के विषय पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अभिषेक सिंह ने अपनी बात रखी,विशेषज्ञों ने अपने-अपने विभागों से जुड़ी गतिविधियों की जानकारी देते हुए जनभागीदारी के महत्व पर विचार व्यक्त किए,इन परिचर्चाओं ने महोत्सव को केवल कविता,साहित्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का मंच रहने के बजाय समाज के दैनिक जीवन से जुड़े विषयों पर जानकारी साझा करने का अवसर भी बनाया, शिक्षा,स्वास्थ्य और साइबर अपराध ऐसे मुद्दे हैं,जिनसे आम नागरिक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित होते हैं,इन विषयों पर विशेषज्ञों की भागीदारी से लोगों को संबंधित गतिविधियों और जनसहभागिता के महत्व को समझने का अवसर मिला,साहित्य महोत्सव के मंच पर ऐसे विषयों को स्थान मिलना आयोजन के व्यापक स्वरूप को रेखांकित करता है, इससे साहित्य और समाज के बीच संवाद की संभावनाएं भी मजबूत होती हैं।
दुर्ग से आई टीम की लोकरंग प्रस्तुति ने बांधा समां-कार्यक्रम में दुर्ग से आईं डॉ. ऊषा साहू की टीम ने लोकरंग की प्रस्तुति दी, लोकसंस्कृति और हास्य से जुड़ी इस प्रस्तुति ने दर्शकों का मनोरंजन किया और देर रात तक कार्यक्रम स्थल पर उत्साह बनाए रखा, लोककला की प्रस्तुतियां किसी भी क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को जीवंत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, इनके माध्यम से पारंपरिक अभिव्यक्तियों को मंच मिलता है और दर्शकों को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का अवसर मिलता है,कोसम में साहित्यिक गतिविधियों के साथ लोकरंग को स्थान दिए जाने से आयोजन की विविधता सामने आई, महोत्सव के दौरान साहित्य,कविता, विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों और लोककला का एक साथ उपस्थित होना इस आयोजन की विशेषता रही, इससे अलग-अलग रुचियों वाले दर्शकों को कार्यक्रम से जुड़ने का अवसर मिला।
साहित्यकारों,अधिकारियों और संस्कृतिकर्मियों की उल्लेखनीय उपस्थिति-महोत्सव के प्रथम दिवस अविभाजित कोरिया जिले के वरिष्ठ साहित्यकार वीरेंद्र श्रीवास्तव,सतीश उपाध्याय, सुंदरलाल तिवारी और डॉ. राजकुमार शर्मा उपस्थित रहे। सूरजपुर से प्रोफेसर बृजलाल साहू और डॉ. ओंकार साहू ने भी सहभागिता की, प्रशासनिक अधिकारियों में बैकुण्ठपुर एसडीएम दीपिका नेताम,पटना तहसीलदार रोशनी तिर्की और बैकुण्ठपुर तहसीलदार प्रांजल मिश्रा सहित अन्य अतिथि मौजूद रहे,साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र से चंद्रा चर्चित,ललित शुक्ला,राजेंद्र सोनी और डॉ. एम.सी. हिमधर सहित अनेक लोग शामिल हुए, रायपुर से आशीष राज सिंघानिया,हर्षराज हर्ष,सुनील शर्मा,आयुष नामदेव,तारा पाण्डे,अलीशा शेख,भावेश देशमुख,योगेश गुप्ता,हरिकांत अग्निहोत्री,विनय तिवारी और मिराज अली सहित बड़ी संख्या में साहित्यकार,संस्कृतिकर्मी,स्थानीय कलाकार और साहित्यप्रेमी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।
छिपी प्रतिभाओं को मंच देने में
साहित्य महोत्सव की अहम भूमिका : कलेक्टर
कार्यक्रम में कलेक्टर रोक्तिमा यादव ने कहा कि साहित्य महोत्सव जैसे आयोजन अनेक छिपी हुई प्रतिभाओं को सामने लाने का अवसर प्रदान करते हैं, कई बार स्थानीय स्तर पर प्रतिभाशाली लोग अपनी कला और रचनात्मकता को व्यापक मंच तक नहीं पहुंचा पाते। ऐसे आयोजन उन्हें अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने और अपनी पहचान स्थापित करने का अवसर देते हैं, उन्होंने कहा कि कोरिया साहित्य महोत्सव में जहां ख्यातिप्राप्त साहित्यकार अपनी रचनात्मकता का प्रदर्शन करते हैं, वहीं नई पीढ़ी को भी उनसे सीखने का अवसर मिलता है, साहित्य, कला और संस्कृति से जुड़े कार्यक्रम युवाओं में रचनात्मक अभिरुचि विकसित करने के साथ उन्हें अपनी भाषा, परंपरा और सामाजिक परिवेश को समझने में मदद करते हैं, कलेक्टर ने महोत्सव के अंतर्गत विभिन्न विषयों पर आयोजित कार्यक्रमों की सराहना की और आयोजकों को शुभकामनाएं दीं, आयोजन में विद्यार्थियों की भागीदारी भी इसी उद्देश्य को मजबूत करती नजर आई कि साहित्य और संस्कृति की गतिविधियां केवल स्थापित रचनाकारों तक सीमित न रहें, बल्कि नई पीढ़ी भी उनसे सक्रिय रूप से जुड़े।
कोरिया की साहित्यिक पहचान को व्यापक मंच देने की पहल
कोरिया साहित्य महोत्सव का चतुर्थ संस्करण जिले में साहित्य,लोककला और संस्कृति से जुड़ी गतिविधियों को एक साझा मंच पर लाने का प्रयास रहा,आयोजन में प्रदेश के कवियों की भागीदारी,स्थानीय कलाकारों और विद्यार्थियों की प्रस्तुतियां तथा शिक्षा,स्वास्थ्य और साइबर अपराध जैसे विषयों पर परिचर्चा ने इसके बहुआयामी स्वरूप को सामने रखा, स्वास्थ्य मंत्री द्वारा संस्कृति विभाग की सहभागिता से महोत्सव को नियमित रूप से आयोजित कराने के लिए प्रयास करने का आश्वासन आयोजन के भविष्य के लिहाज से महत्वपूर्ण रहा,कलेक्टर ने स्थानीय प्रतिभाओं को मंच देने में ऐसे आयोजनों की भूमिका रेखांकित की,वहीं एसईसीएल ने खेल,कला,संस्कृति और साहित्य से जुड़ी गतिविधियों में सहयोग के लिए अपनी तत्परता दोहराई,कोरिया साहित्य महोत्सव का उद्देश्य साहित्यिक अभिव्यक्ति के साथ लोकसंस्कृति और स्थानीय प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करना भी है,चार संस्करण पूरे कर चुका यह आयोजन जिले के साहित्यिक-सांस्कृतिक जीवन में अपनी जगह बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है,अब इसके नियमित आयोजन और व्यापक सहयोग की संभावनाओं के बीच साहित्यप्रेमियों की निगाहें इस बात पर रहेंगी कि आने वाले समय में कोसम को किस प्रकार और अधिक व्यापक स्वरूप दिया जाता है।
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