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नई दिल्ली@सुप्रीम कोर्ट : वैवाहिक दुष्कर्म पर अदालत सख्त,कहा- शादी के बाद पत्नी की सहमति का अधिकार खत्म नहीं होता है

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नई दिल्ली,09 सितम्बर 2026। शादी के बाद पत्नी की सहमति के बिना यौन संबंध बनाने को दुष्कर्म के दायरे में लाया जा सकता है या नहीं,इस बेहद अहम सवाल पर सुप्रीम कोर्ट अब विस्तार से सुनवाई करेगा। अदालत ने साफ किया है कि शादी का मतलब किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वायत्तता खत्म होना नहीं है। हालांकि,मामला केवल सामाजिक सोच का नहीं,बल्कि आपराधिक कानून और संविधान की कसौटी का भी है। सुप्रीम कोर्ट पहले कर्नाटक हाईकोर्ट से जुड़े उस मामले की अपील सुनेगा,जिसमें पत्नी को कथित तौर पर यौन गुलाम की तरह रखने के आरोप में पति पर दुष्कर्म का मुकदमा चलाने की अनुमति दी गई थी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना शामिल हैं। पीठ ने कहा कि वह सबसे पहले कर्नाटक हाईकोर्ट के उस फैसले से जुड़ी अपील पर सुनवाई करेगी, जिसमें पत्नी के साथ कथित यौन हिंसा के मामले में पति के खिलाफ दुष्कर्म का मुकदमा चलाने की अनुमति दी गई थी। वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह पत्नी की ओर से पेश हुईं। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट ने इस मामले में पत्नी को लगभग यौन गुलाम की तरह रखे जाने की स्थिति को देखते हुए मुकदमा चलाने की अनुमति दी थी। उनका तर्क है कि मौजूदा कानून की व्याख्या के जरिए भी ऐसे मामले में मुकदमा चलाया जा सकता है,यानी वैवाहिक दुष्कर्म के अपवाद को तुरंत खत्म करना जरूरी नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के सामने इस मामले में दो बड़े सवाल हैं। पहला,क्या मौजूदा वैवाहिक दुष्कर्म अपवाद की सीमित व्याख्या करके कुछ मामलों में पति के खिलाफ दुष्कर्म का मुकदमा चलाया जा सकता है।


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