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अंबिकापुर/रायपुर@दस साल एक ही जगह, फिर प्रमोशन और मनचाही पोस्टिंग! खाद्य एवं औषधि प्रशासन की व्यवस्था कटघरे में

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  • 10 साल से एक ही जगह पदस्थ अधिकारी कौन? पदोन्नति के बाद पोस्टिंग ने बढ़ाई खाद्य एवं औषधि प्रशासन की मुश्किलें
  • एक ही जगह 10 साल, प्रमोशन के बाद भी पसंदीदा ठिकाना! खाद्य एवं औषधि प्रशासन में पोस्टिंग सिस्टम पर सवाल
  • खाद्य विभाग में ‘दस साल वाली परंपरा’! एक ही जगह लंबे समय से जमे अधिकारियों की नाम ने मचाई हलचल
  • एक ही संभाग में वर्षों से जमे अधिकारियों की सूची ने खोली पदस्थापना व्यवस्था की परतें,पदोन्नति के बाद भी पसंदीदा जगह मिलने पर उठे सवाल…
  • अभिहित अधिकारी से लेकर वरिष्ठ खाद्य सुरक्षा अधिकारी तक के नाम आए सामने…
  • धमतरी में 10 साल से अधिक पदस्थापना का दावा, अनुसूचित और मैदानी क्षेत्र के अनुपात पर भी सवाल…


-न्यूज डेस्क-
अंबिकापुर/रायपुर,08 सितम्बर 2026 (घटती-घटना)। खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग में अधिकारियों की पदस्थापना को लेकर उठ रहे सवाल अब केवल स्थानांतरण तक सीमित नहीं रह गए हैं,विभाग में लंबे समय से एक ही संभाग अथवा क्षेत्र में पदस्थ रहने वाले अधिकारियों को लेकर सामने आई सूची ने पूरी पदस्थापना व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं, खासकर ऐसे समय में जब विभाग में पदोन्नति के बाद अधिकारियों की नई पदस्थापनाएं की गई हैं,यह सवाल महत्वपूर्ण हो गया है कि क्या पदोन्नति के बाद वास्तव में रोटेशन की नीति लागू हुई या कई मामलों में अधिकारी फिर अपने परिचित क्षेत्र के आसपास ही बने रहे?
सूत्रों से सामने आई जानकारी में अभिहित अधिकारी, वरिष्ठ खाद्य सुरक्षा अधिकारी और खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के नाम तथा उनकी पूर्व और वर्तमान पदस्थापना का विवरण शामिल है,इसी सूची में एक अधिकारी के धमतरी में दस वर्ष से अधिक समय से पदस्थ रहने का दावा भी सामने आया है,मामला इसलिए गंभीर है क्योंकि खाद्य एवं औषधि प्रशासन सीधे आम आदमी की थाली,खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़ा विभाग है,ऐसे संवेदनशील विभाग में अधिकारियों की लंबे समय तक एक ही क्षेत्र में पदस्थापना को लेकर पारदर्शिता,रोटेशन और प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
10 साल वाले अभिहित अधिकारियों की सूची में सामने आए नाम-सूत्रों से प्राप्त पदस्थापना सूची के अनुसार अभिहित अधिकारियों के संबंध में निम्न विवरण सामने आया है,उमेश वर्मा बलौदाबाजार से महासमुंद, सवैरा यादव रायपुर से धमतरी,अक्षय सोनी धमतरी से बलौदाबाजार,मोहित बेहरा बिलासपुर से जांजगीर-चांपा, सुधा चौधरी सारंगढ़ से रायगढ़,मुकेश साहू कवर्धा से कवर्धा सूत्रों से मिली सूची में इन नामों के साथ पूर्व एवं वर्तमान पदस्थापना स्थल का उल्लेख किया गया है,इनमें मुकेश साहू का कवर्धा से कवर्धा दर्ज होना अलग से ध्यान आकर्षित करता है,यदि पदस्थापना में स्थान वही है तो विभागीय आदेश में इसके पीछे दर्ज प्रशासनिक कारण क्या हैं,यह जानना जरूरी हो जाता है,क्या पद में परिवर्तन हुआ? क्या दायित्व बदला गया? क्या प्रशासनिक आवश्यकता के कारण उसी स्थान पर रखा गया? इन सवालों का जवाब संबंधित पदस्थापना आदेश से ही स्पष्ट हो सकता है।
पदोन्नति के बाद भी पोस्टिंग पर सवाल-विभाग में पदोन्नति के बाद हुई पदस्थापनाओं को लेकर भी चर्चा तेज है,सूत्रों का कहना है कि लंबे समय से एक ही संभाग में काम कर रहे कुछ अधिकारियों को पदोन्नति के बाद नई जिम्मेदारी मिली और उनके स्थान बदले गए,लेकिन कई मामलों में यह सवाल बना हुआ है कि नई पदस्थापना किस आधार पर तय की गई,यही वजह है कि अब केवल वर्तमान पदस्थापना देखने के बजाय अधिकारियों की पिछले दस वर्षों की पूरी पोस्टिंग हिस्ट्री सामने लाने की जरूरत महसूस की जा रही है,किस अधिकारी ने किस जिले में कितने वर्ष बिताए? कितनी बार स्थानांतरण हुआ? कितने समय तक अतिरिक्त प्रभार रहा? पदोन्नति से पहले कहां पदस्थ थे? पदोन्नति के बाद कहां भेजे गए? क्या पदोन्नति के बाद भी उसी संभाग में रखा गया? यदि इन सभी सवालों का जवाब एक साथ सामने आ जाए तो पदस्थापना व्यवस्था की वास्तविक तस्वीर स्वतः स्पष्ट हो सकती है।
अनुसूचित क्षेत्र बनाम मैदानी क्षेत्र…अनुपात पर भी सवाल-सूत्रों से प्राप्त जानकारी में अनुसूचित क्षेत्र और मैदानी क्षेत्र में पदस्थापना के अनुपात को लेकर भी सवाल उठाया गया है,कहा गया है कि दोनों क्षेत्रों के बीच पदस्थापना का अनुपात संतुलित नहीं है,साथ ही यह भी सवाल उठाया गया है कि प्रथम पदोन्नति के पूर्व निर्धारित अनुपात का पालन हुआ या नहीं,यह विषय इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यदि शासन अथवा विभाग ने अनुसूचित क्षेत्र और मैदानी क्षेत्र में अधिकारियों की पदस्थापना को लेकर कोई निर्धारित नीति या अनुपात तय किया है,तो उसका पालन सभी अधिकारियों के मामले में समान रूप से होना चाहिए, यदि अनुपात का पालन नहीं हुआ तो इसकी वजह क्या रही? क्या विभाग के पास इसका कोई प्रशासनिक आदेश है? क्या सक्षम स्तर से छूट दी गई? यदि छूट दी गई तो किन परिस्थितियों में? इन सवालों का जवाब विभागीय रिकॉर्ड से ही मिलना चाहिए।
‘दस साल’ केवल एक आंकड़ा नहीं, व्यवस्था का आईना-किसी अधिकारी का लंबे समय तक एक ही जगह पदस्थ रहना अकेले में किसी अनियमितता का प्रमाण नहीं माना जा सकता,प्रशासनिक आवश्यकता, पद की प्रकृति,अधिकारियों की उपलब्धता और शासन के आदेश जैसे कई कारण हो सकते हैं,लेकिन जब एक विभाग में लंबे समय तक पदस्थ रहने वाले अधिकारियों की सूची सामने आती है और उसी विभाग में स्थानांतरण व पदोन्नति के बाद की पोस्टिंग को लेकर सवाल उठते हैं, तब पूरी व्यवस्था की समीक्षा जरूरी हो जाती है, खाद्य एवं औषधि प्रशासन में अधिकारियों की भूमिका केवल कार्यालय तक सीमित नहीं है,खाद्य प्रतिष्ठानों का निरीक्षण, नमूने लेना,मिलावट के मामलों में कार्रवाई,जांच प्रक्रिया और न्यायालयीन प्रकरणों की निगरानी जैसे महत्वपूर्ण दायित्व भी इसी व्यवस्था का हिस्सा हैं, ऐसे में लंबे समय तक एक ही क्षेत्र में रहने वाले अधिकारियों की पदस्थापना का रिकॉर्ड सार्वजनिक होना पारदर्शिता के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकता है।
सबसे बड़ा सवाल…क्या विभाग में पोस्टिंग का कोई ‘रोटेशन सिस्टम’ है?-पूरे मामले का सार यही है कि खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग में अधिकारियों की पदस्थापना के लिए यदि स्पष्ट और समान रोटेशन नीति है तो उसे सार्वजनिक किया जाए,यदि नीति है तो पिछले वर्षों में उसका कितना पालन हुआ,यह भी बताया जाए,यदि किसी अधिकारी को दस वर्ष से अधिक समय तक एक ही क्षेत्र में रखा गया तो उसके पीछे क्या कारण था,यह भी स्पष्ट किया जाए,और यदि पदोन्नति के बाद किसी अधिकारी को उसी क्षेत्र में रखा गया तो उस निर्णय का प्रशासनिक आधार क्या था,यह भी सामने आना चाहिए, क्योंकि सवाल किसी एक अधिकारी का नहीं है—सवाल उस व्यवस्था का है,जिसमें एक संवेदनशील विभाग के अधिकारी वर्षों तक एक ही क्षेत्र में पदस्थ रह सकते हैं और फिर पदोन्नति के बाद उनकी नई पोस्टिंग को लेकर भी सवाल उठते हैं, अब जरूरत आरोप-प्रत्यारोप की नहीं, बल्कि दस वर्षों का पदस्थापना रिकॉर्ड सामने रखकर व्यवस्था की पारदर्शिता साबित करने की है।
वरिष्ठ खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की सूची भी सवालों में…
सूत्रों से सामने आई जानकारी केवल अभिहित अधिकारियों तक सीमित नहीं है,वरिष्ठ खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की सूची में भी तीन नाम दर्ज हैं विजेंद्र भारती रायपुर से बलौदाबाजार,ऋचा शर्मा दुर्ग से दुर्ग,साधना चंद्राकर रायपुर से राजनांदगांव,यहां ऋचा शर्मा का दुर्ग से दुर्ग दर्ज होना भी पदस्थापना व्यवस्था को लेकर सवाल पैदा करता है,यदि अधिकारी का पद या दायित्व बदला है और प्रशासनिक आदेश के तहत उन्हें उसी स्थान पर रखा गया है तो वह आदेश ही पूरी स्थिति स्पष्ट कर सकता है, सवाल यह नहीं कि किसी अधिकारी को एक ही जिले में रखना गलत है या सही,असली सवाल यह है कि क्या विभाग के सभी अधिकारियों के लिए एक समान पदस्थापना नीति लागू होती है?
धमतरी में दस साल से अधिक…सबसे बड़ा सवाल…
इस पूरी सूची में सबसे गंभीर जानकारी फनेश्वर पिथौरा के संबंध में सामने आई है,उपलब्ध जानकारी में उनके धमतरी में दस साल से अधिक समय से पदस्थ होने का उल्लेख किया गया है,यदि विभागीय सेवा अभिलेखों से यह तथ्य सही साबित होता है तो यह निश्चित रूप से प्रशासनिक समीक्षा का विषय है, एक अधिकारी यदि दस वर्ष या उससे अधिक समय तक एक ही क्षेत्र में पदस्थ रहता है तो स्वाभाविक रूप से कई सवाल पैदा होते हैं क्या विभाग में अधिकारियों के लिए रोटेशन नीति है? क्या लंबे समय से एक ही जगह पर पदस्थ अधिकारियों की समय-समय पर समीक्षा होती है? क्या ऐसी लंबी पदस्थापना के लिए सक्षम स्तर से अनुमति आवश्यक है? यदि अनुमति दी गई थी तो उसके कारण क्या थे? और सबसे बड़ा सवाल…क्या विभाग के सभी अधिकारियों को समान अवसर और समान स्थानांतरण नीति का लाभ मिलता है? इन सवालों का जवाब किसी आरोप या बयान से नहीं, बल्कि विभागीय सेवा अभिलेख और पदस्थापना आदेश से मिलना चाहिए।
सूचना सार्वजनिक हो तो कई सवाल अपने आप खत्म होंगे
विभाग चाहे तो इस पूरे विवाद को आसानी से समाप्त कर सकता है, इसके लिए पिछले दस वर्षों का संभागवार पदस्थापना रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जा सकता है,रिकॉर्ड में प्रत्येक अधिकारी के लिए पहली नियुक्ति और पदस्थापना,जिलेवार पदस्थापना अवधि,संभागवार कार्यकाल,स्थानांतरण आदेश, अतिरिक्त प्रभार,पदोन्नति की तारीख,पदोन्नति के बाद मिली पदस्थापना,वर्तमान पदस्थापना,अनुसूचित एवं मैदानी क्षेत्र में बिताई गई अवधि जैसी जानकारी सामने रखी जा सकती है,इसके बाद यह बहस अनुमान और चर्चाओं से निकलकर दस्तावेजों पर आ जाएगी।
नाम सामने आए हैं,अब रिकॉर्ड सामने आना चाहिए
सूत्रों से मिली सूची में उमेश वर्मा,सवैरा यादव,अक्षय सोनी,मोहित बेहरा,सुधा चौधरी,मुकेश साहू,नितेश मित्रा,विजेत भारती,ऋचा शर्मा,साधना चंद्राकर और फनेश्वर पिथौरा के नाम सामने आए हैं,वहीं फोरवर पियौरा के धमतरी में दस वर्ष से अधिक समय से पदस्थ रहने की जानकारी भी दी गई है,इनमें से किसी अधिकारी की पदस्थापना अवधि या स्थानांतरण को अपने आप में अनियमितता मानना उचित नहीं होगा। वास्तविक स्थिति विभागीय सेवा अभिलेख, शासन के स्थानांतरण आदेश और लागू नियमों की जांच के बाद ही सामने आएगी,लेकिन सवाल अब उठ चुका है और वह भी सीधे पदस्थापना व्यवस्था को लेकर।


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