अहमदाबाद,08 सितम्बर 2026। नाबालिग से दुष्कर्म और यौन उत्पीड़न के मामले में जेल की सजा काट रहे स्वयंभू धर्मगुरु आसुमल उर्फ आसाराम को गुजरात हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने उनकी ओर से दाखिल अंतरिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया। आसाराम ने यह अर्जी राजस्थान के जोधपुर हाईकोर्ट से मिली 20 दिनों की पैरोल के आधार पर दायर की थी। उनका उद्देश्य गुजरात में दर्ज यौन शोषण के मामले के चलते जेल से रिहाई में आ रही कानूनी बाधा को दूर कराना था।
पैरोल मिलने के बाद भी नहीं हो पाई रिहाई : हाल ही में जोधपुर हाईकोर्ट ने आसाराम को स्वास्थ्य संबंधी कारणों को देखते हुए 20 दिनों की पैरोल प्रदान की थी। हालांकि, पैरोल आदेश मिलने के बावजूद जेल प्रशासन ने उनकी रिहाई रोक दी। प्रशासन की ओर से गुजरात में दर्ज सूरत यौन शोषण मामले को इसकी वजह बताया गया। इस कानूनी अड़चन के चलते आसाराम पैरोल का लाभ उठाकर जेल से बाहर नहीं आ सके। जेल से बाहर आने का रास्ता साफ कराने के लिए आसाराम के वकीलों ने गुजरात हाईकोर्ट में अंतरिम जमानत की मांग की। सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार किया। इसके बाद कोर्ट ने आसाराम को फिलहाल राहत देने से इनकार करते हुए उनकी अंतरिम जमानत याचिका खारिज कर दी। फैसले के बाद उनकी जेल से बाहर आने की उम्मीदों को एक और झटका लगा है। आसाराम का पूरा नाम आसुमल सिरुमलानी हरपलानी है। उनका जन्म 17 अप्रैल 1941 को हुआ था। उन्होंने देश के अलग-अलग हिस्सों के साथ विदेशों में भी आश्रमों का नेटवर्क खड़ा किया था।
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