MedLEaPR-CCTNS मॉड्यूल पर 19 डॉक्टरों को दिया प्रशिक्षण…MLR और pmr ऑनलाइन भेजने की प्रक्रिया समझाई
-संवाददाता-
अम्बिकापुर,21 अगस्त 2026 (घटती-घटना)। पुलिस विवेचना में मेडिकल रिपोर्ट और पोस्टमार्टम रिपोर्ट हासिल करने में होने वाली देरी को कम करने के लिए सरगुजा पुलिस और स्वास्थ्य विभाग ने डिजिटल प्रक्रिया की ओर कदम बढ़ाया है। MedLEaPR एवं CCTNS मॉड्यूल से संबंधित एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर पुलिस अधीक्षक कार्यालय के सभाकक्ष में आयोजित किया गया। इसमें जिले के विभिन्न शासकीय अस्पतालों में पदस्थ 19 डॉक्टरों को नई ऑनलाइन प्रक्रिया की जानकारी दी गई। प्रशिक्षण शिविर का आयोजन डीआईजी एवं एसएसपी सरगुजा राजेश अग्रवाल के निर्देशन में किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य अस्पतालों और थानों के विवेचना अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के साथ मेडिकल रिपोर्टिंग की प्रक्रिया को अधिक तेज, सुरक्षित और व्यवस्थित बनाना है।
थाने से अस्पताल और अस्पताल से थाने ऑनलाइन पहुंचेगी रिपोर्ट : MedLEaPR एक सुरक्षित ऑनलाइन प्रणाली है, जिसके माध्यम से पुलिस और शासकीय अस्पतालों के बीच मेडिको-लीगल रिपोर्टिंग को डिजिटल किया जाता है। यह प्रणाली CCTNS से एकीकृत है। नई व्यवस्था के तहत थानों में CCTNS केस ऑनलाइन के माध्यम से रूरुक्र MLR (Medico-Legal Report) और क्करूक्र PMR (Post-Mortem Report) संबंधित शासकीय अस्पताल को MedLEaPR पोर्टल पर भेजे जाएंगे। अस्पताल की ओर से तैयार रिपोर्ट भी इसी पोर्टल के माध्यम से संबंधित थाने के CCTNS सिस्टम पर ऑनलाइन भेजी जाएगी। इससे रिपोर्ट के लिए कागजी प्रक्रिया और अनावश्यक आवागमन कम होगा। साथ ही विवेचना अधिकारियों को मेडिकल रिपोर्ट समय पर उपलब्ध होने से जांच प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है।
विवेचना में तेजी लाने की कोशिश : अपराध की जांच में मेडिकल रिपोर्ट और पोस्टमार्टम रिपोर्ट महत्वपूर्ण साक्ष्य होते हैं। इनके लिए पुलिस और अस्पताल के बीच पत्राचार तथा दस्तावेजों के आदान-प्रदान में लगने वाला समय कई बार विवेचना को प्रभावित करता है। MedLEaPR और CCTNS के एकीकरण से इसी प्रक्रिया को डिजिटल और तेज बनाने का प्रयास किया जा रहा है। इससे रिपोर्ट भेजने से लेकर प्राप्त करने तक की प्रक्रिया ऑनलाइन ट्रैक की जा सकेगी और संबंधित अधिकारियों के बीच समन्वय बेहतर होगा।
19 डॉक्टरों ने लिया प्रशिक्षण : प्रशिक्षण शिविर में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रितेश चौधरी,डॉ. संटू बाघ,डॉ. रवि किरण तिर्की सहित जिले के विभिन्न शासकीय अस्पतालों में पदस्थ 19 डॉक्टर उपस्थित रहे। इसके अलावा आरक्षक प्रदीप केरकेट्टा एवं महिला आरक्षक प्रिया रानी भी प्रशिक्षण में शामिल रहे। पुलिस एवं चिकित्सा विभाग के बीच यह डिजिटल समन्वय व्यवस्था लागू होने के बाद मेडिकल रिपोर्टिंग को अधिक तेज, सुरक्षित और पारदर्शी बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
मैनुअल प्रक्रिया में देरी और त्रुटि की संभावना होगी कम
प्रशिक्षण के दौरान डॉक्टरों को पोर्टल पर रिपोर्ट तैयार करने, भेजने और नई प्रक्रिया के तहत आवश्यक कार्रवाई की विस्तार से जानकारी दी गई। पुलिस अधिकारियों के अनुसार डिजिटल प्रणाली से रिपोर्टिंग में पारदर्शिता और सटीकता बढ़ाने में मदद मिलेगी। डीआईजी एवं एसएसपी राजेश अग्रवाल ने प्रशिक्षण के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि डिजिटल प्रक्रिया से मैनुअल त्रुटियों की संभावना कम होगी और मेडिकल रिपोर्ट से संबंधित डेटा को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी। उन्होंने अस्पताल एवं पुलिस के विवेचना अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
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