विधायक रहते फिर दिखाई स्वास्थ्य सेवाओं की चिंता,बैकुण्ठपुर जिला अस्पताल में अब 1.5 टेस्ला एमआरआई की तैयारी
SECL ने CSR मद से मंजूर किए 18.65 करोड़ रुपये,मशीन से लेकर जनरेटर,सिविल और विद्युत व्यवस्था तक का खर्च शामिल
-रवि सिंह-
बैकुण्ठपुर,21 अगस्त 2026 (घटती-घटना)। कोरिया जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए 18 अगस्त 2026 का दिन एक महत्वपूर्ण दस्तावेज छोड़ गया,साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड यानी SECL ने बैकुण्ठपुर जिला चिकित्सालय में 1.5 टेस्ला एमआरआई मशीन स्थापित करने के लिए अपने सीएसआर मद से 18 करोड़ 65 लाख रुपये की स्वीकृति जारी कर दी है, यह मंजूरी केवल मशीन खरीदने की अनुमति नहीं है,बल्कि मशीन की आपूर्ति,स्थापना, कमीशनिंग,जनरेटर,सिविल और विद्युत व्यवस्था सहित पूरी परियोजना के लिए है। इस पूरी पहल के पीछे बैकुण्ठपुर विधायक एवं पूर्व मंत्री भैयालाल राजवाड़े की लगातार दिखाई देने वाली स्वास्थ्य संबंधी सक्रियता भी सामने आती है, विधायक की ओर से स्श्वष्टरु के समक्ष जिला चिकित्सालय में एमआरआई सुविधा उपलब्ध कराने की मांग रखी गई थी, उनके पत्र में जिला चिकित्सालय बैकुण्ठपुर में एमआरआई मशीन जैसी सुविधा को जनहित में आवश्यक बताया गया था, जिला प्रशासन की ओर से भी मांग और प्रक्रिया आगे बढ़ी और अंततः स्श्वष्टरु ने परियोजना को वित्तीय स्वीकृति दे दी, यही वजह है कि क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर भैयालाल राजवाड़े को ‘इलाज वाले बाबा’ कहने वालों को एक बार फिर अपनी बात कहने का मौका मिल गया है। मंत्री रहते हुए स्वास्थ्य को लेकर सक्रियता दिखाना एक बात थी, लेकिन मंत्री पद पर नहीं होने के बावजूद विधायक के रूप में उसी विषय को प्राथमिकता देना इस पहल को अलग महत्व देता है।
स्वास्थ्य को विकास के सामान्य एजेंडे से अलग मानते हैं राजवाड़े
राजनीति में विकास की चर्चा अक्सर सड़क, पुल,बिजली,पानी और भवन निर्माण के आसपास घूमती है,लेकिन स्वास्थ्य का सवाल ऐसा है जिसमें किसी परिवार की पूरी आर्थिक स्थिति एक बीमारी के सामने बदल सकती है,गंभीर बीमारी के मरीज को जांच के लिए दूसरे शहर ले जाना पड़े तो बीमारी के साथ यात्रा,वाहन,जांच,रहने और खाने का खर्च भी परिवार के सामने खड़ा हो जाता है,बैकुण्ठपुर जैसे क्षेत्र में यह चुनौती और बड़ी हो जाती है, जिले के दूरस्थ इलाकों से मरीज को जिला मुख्यालय तक लाना ही कई परिवारों के लिए आसान नहीं होता,इसके बाद यदि एमआरआई जैसी विशेष जांच के लिए अंबिकापुर,बिलासपुर या रायपुर जाना पड़े तो इलाज की प्रक्रिया लंबी और खर्चीली हो जाती है,इसी बिंदु पर जिला अस्पताल में एमआरआई की सुविधा का महत्व समझ में आता है,सुविधा शुरू होने के बाद गंभीर मरीजों को जांच के लिए हर बार बड़े शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा। चिकित्सकों को भी मरीज की स्थिति का अधिक विस्तृत परीक्षण स्थानीय स्तर पर कराने का अवसर मिलेगा।
1.5 Tesla एमआरआई का मतलब क्या है?- यहां एक तथ्य स्पष्ट करना जरूरी है,स्वीकृति पत्र में जिस 1.5 Tesla एमआरआई का उल्लेख है,उसमें ‘Tesla’ किसी कंपनी का नाम नहीं है,यह एमआरआई के चुंबकीय क्षेत्र की शक्ति को बताने वाली इकाई है, इसलिए इसे किसी ‘टेस्ला कंपनी की मशीन’ के रूप में देखना सही नहीं होगा, 1.5Tesla एमआरआई आधुनिक चिकित्सा संस्थानों में इस्तेमाल होने वाली एमआरआई प्रणालियों की महत्वपूर्ण श्रेणी में आती है, इससे मस्तिष्क,रीढ़ की हड्डी,नसों,जोड़ों,मांसपेशियों तथा शरीर के कई अन्य हिस्सों की विस्तृत इमेजिंग में चिकित्सकों को मदद मिल सकती है, इस परियोजना की वास्तविक उपलब्धि मशीन के किसी ब्रांड से ज्यादा यह है कि जिला अस्पताल को 1.5 Tesla स्तर की एमआरआई जांच सुविधा मिलने जा रही है,मशीन की उपयोगिता उसके कॉन्फिगरेशन,तकनीकी स्टाफ,सर्विस सपोर्ट और नियमित संचालन पर भी निर्भर करेगी।
जनरेटर की व्यवस्था भी,ताकि बिजली गई तो जांच न रुके-एमआरआई जैसी अत्याधुनिक मशीन के लिए बिजली की स्थिर और सुरक्षित आपूर्ति महत्वपूर्ण होती है, इसी वजह से परियोजना में 250AMF कंट्रोल ष्ठत्र सेट के लिए भी राशि स्वीकृत की गई है, यह व्यवस्था इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि जिला अस्पताल में बिजली आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में आवश्यक सेवाओं को प्रभावित होने से बचाना जरूरी है,परियोजना में विद्युत आपूर्ति,अर्थिंग,यूपीएस और सुरक्षा वायरिंग जैसे कार्यों के लिए अलग से राशि रखी गई है। स्थापना के समय मशीन की तकनीकी विद्युत आवश्यकताओं और निर्माता की संचालन शर्तों का पालन भी महत्वपूर्ण होगा, यानी स्श्वष्टरु की स्वीकृति में मशीन खरीदने के साथ उसके संचालन के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे को भी ध्यान में रखा गया है।
सीटी स्कैन से सबक, इस बार खरीद और गुणवत्ता पर भी निगाह-बैकुण्ठपुर जिला अस्पताल को इससे पहले भी SECL के सीएसआर से अत्याधुनिक जांच सुविधा मिल चुकी है,SECL की वार्षिक रिपोर्ट में जिला अस्पताल बैकुण्ठपुर में 64-स्लाइस सीटी स्कैन मशीन की खरीद एवं स्थापना का उल्लेख मिलता है,ऐसे में एमआरआई की स्वीकृति जिले की डायग्नोस्टिक सुविधाओं में एक और बड़ा विस्तार है,करोड़ों रुपये की मशीन आने के साथ जिम्मेदारी भी उतनी ही बड़ी होगी,इस बार मशीन की खरीद से लेकर उसके स्पेसिफिकेशन, वारंटी,्रAMC,सर्विस सपोर्ट, तकनीकी स्टाफ और वास्तविक उपयोग तक हर स्तर पर पारदर्शिता जरूरी होगी,किसी पूर्व मशीन की गुणवत्ता या खरीद को लेकर बिना दस्तावेज आरोप लगाना उचित नहीं होगा,लेकिन इतना जरूर कहा जा सकता है कि करोड़ों रुपये की स्वास्थ्य परियोजना की सफलता का पैमाना यह होना चाहिए कि मशीन लगातार मरीजों के काम आए।
SECL का स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग नया नहीं-बैकुण्ठपुर में एमआरआई के लिए स्श्वष्टरु का सीएसआर सहयोग अचानक सामने आया मामला नहीं है,कंपनी के पुराने सीएसआर रिकॉर्ड में भी जिला अस्पताल बैकुण्ठपुर के लिए स्वास्थ्य संबंधी सहायता का उल्लेख मिलता है, SECL की 2015-16 की वार्षिक रिपोर्ट में जिला अस्पताल बैकुण्ठपुर में स्वास्थ्य संबंधी उपकरणों के लिए वित्तीय सहायता दर्ज है,हाल के सीएसआर रिकॉर्ड में भी बैकुण्ठपुर जिला अस्पताल के लिए 64-स्लाइस सीटी स्कैन मशीन की स्थापना दर्ज है,इससे यह संकेत मिलता है कि SECL के सीएसआर संसाधनों के जरिए क्षेत्र की स्वास्थ्य अधोसंरचना को मजबूत करने का सिलसिला पहले से चलता रहा है,अब एमआरआई की स्वीकृति इस कड़ी को और आगे ले जाती है।
सिर्फ मशीन नहीं,स्वास्थ्य व्यवस्था की दिशा बदलने का अवसर-जिला अस्पताल में एमआरआई आने से अस्पताल की तस्वीर तभी बदलेगी जब इसके साथ पूरी व्यवस्था मजबूत की जाए,मशीन के लिए प्रशिक्षित तकनीशियन,रेडियोलॉजिस्ट की उपलब्धता,मरीजों की समयबद्ध जांच,रिपोर्टिंग की व्यवस्था और नियमित रखरखाव जरूरी होंगे,यदि मशीन कुछ दिनों के बाद तकनीकी खराबी के कारण बंद रहने लगे या विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं हों,तो करोड़ों रुपये का निवेश अपने उद्देश्य को पूरा नहीं कर पाएगा, इसके उलट यदि मशीन नियमित रूप से चले और मरीजों को समय पर रिपोर्ट मिले,तो यह सुविधा कोरिया जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए वास्तविक परिवर्तन साबित हो सकती है।
भैयालाल राजवाड़े के लिए भी यह एक राजनीतिक उपलब्धि-विधायक के लिए किसी विकास परियोजना को कागज से निकालकर स्वीकृति तक पहुंचाना राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण उपलब्धि होती है,खासकर तब, जब परियोजना सीधे जनता के स्वास्थ्य से जुड़ी हो,भैयालाल राजवाड़े पहले मंत्री रह चुके हैं,अब वे विधायक हैं,पद बदला है,लेकिन स्वास्थ्य के मुद्दे पर सक्रियता बनाए रखने का दावा इस परियोजना के साथ फिर सामने आया है,हालांकि किसी भी जनप्रतिनिधि के प्रयास का अंतिम मूल्यांकन जनता तब करती है,जब घोषणा और स्वीकृति के बाद काम वास्तव में जमीन पर दिखाई देता है। इसलिए एमआरआई परियोजना में भी राजनीतिक श्रेय से ज्यादा महत्वपूर्ण उसका समय पर पूरा होना होगा।
अब जिले की नजर—मशीन कब आएगी और कब शुरू होगी?-18.65 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिल चुकी है, परियोजना का दायरा तय है,मशीन 1.5 भ्द्गह्यद्यड्ड की होगी, जनरेटर,सिविल और विद्युत कार्यों के लिए भी बजट स्वीकृत है,जिला प्रशासन क्रियान्वयन एजेंसी है और स्वास्थ्य विभाग को परियोजना के क्रियान्वयन एवं रखरखाव की जिम्मेदारी दी गई है,अब अगला सवाल यही है कि मरीजों को इस सुविधा के लिए कितना इंतजार करना पड़ेगा,बैकुण्ठपुर के लिए यह केवल एक नई मशीन नहीं है,यह उस पुराने सवाल का जवाब बनने की कोशिश है कि क्या गंभीर बीमारी की जांच के लिए जिले के मरीजों को हर बार बड़े शहर जाना पड़ेगा? यदि यह परियोजना समय पर पूरी होती है और मशीन नियमित रूप से संचालित होती है,तो इस सवाल का जवाब काफी हद तक ‘नहीं’ हो सकता है।
‘इलाज वाले बाबा’ की अगली परीक्षा मशीन के चालू होने पर-भैयालाल राजवाड़े की पहल से एमआरआई की स्वीकृति मिलना निश्चित तौर पर बड़ी उपलब्धि है, लेकिन अब इस उपलब्धि का अगला अध्याय अस्पताल में लिखा जाना है,जिस दिन बैकुण्ठपुर जिला अस्पताल में पहला मरीज 1.5 Tesla एमआरआई के अंदर जांच के लिए जाएगा,उसी दिन कागज पर लिखी 18.65 करोड़ रुपये की परियोजना जमीन पर दिखाई देगी,फिलहाल ‘इलाज वाले बाबा’ की कहानी का पहला अध्याय पूरा हुआ है—मांग से मंजूरी तक, दूसरा अध्याय अब शुरू होना है—मंजूरी से मशीन तक,और सबसे महत्वपूर्ण तीसरा अध्याय होगा—मशीन से मरीज तक,क्योंकि स्वास्थ्य व्यवस्था में असली उपलब्धि किसी पत्र पर लगी मुहर नहीं,बल्कि उस मुहर से निकली सुविधा है जो जरूरत के समय मरीज के काम आए,18.65 करोड़ रुपये की यह स्वीकृति सिर्फ एक मशीन की कीमत नहीं है; यह कोरिया की स्वास्थ्य व्यवस्था को जिला स्तर पर अधिक सक्षम बनाने का अवसर है, अब निगाह इस बात पर रहेगी कि यह अवसर कितनी तेजी से हकीकत बनता है, और शायद यही वह वजह है कि भैयालाल राजवाड़े को स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर ‘इलाज वाले बाबा’ कहने वालों को एक बार फिर अपनी बात कहने का मौका मिल गया है,मंत्री पद हो या विधायक की कुर्सी—कम से कम स्वास्थ्य के मामले में उनका एजेंडा फिलहाल बदला हुआ दिखाई नहीं देता।
18.65 करोड़ रुपये की मंजूरी में क्या-क्या शामिल है?
SECL के सीएसआर विभाग द्वारा जारी स्वीकृति पत्र में परियोजना की कुल लागत 1865 लाख यानी 18.65 करोड़ निर्धारित की गई है, इसमें सबसे बड़ा हिस्सा एमआरआई मशीन की आपूर्ति, स्थापना और कमीशनिंग के लिए है। स्वीकृति के अनुसार एमआरआई मशीन की आपूर्ति, स्थापना और कमीशनिंग के लिए 1800 लाख यानी 18 करोड़ रुपये रखे गए हैं, 250 ्रAMF कंट्रोल वाले DG सेट के लिए 30.75 लाख, आवश्यक सिविल कार्यों के लिए 18.96 लाख और विद्युत कार्यों के लिए 15.29 लाख निर्धारित किए गए हैं, इससे स्पष्ट है कि परियोजना को केवल मशीन खरीदने तक सीमित नहीं रखा गया है, मशीन को अस्पताल में स्थापित करने के लिए जिस बुनियादी ढांचे की जरूरत होगी, उसका खर्च भी स्वीकृति में शामिल किया गया है।
एमआरआई के लिए दूसरे शहर जाने की मजबूरी होगी कम-
अब तक यदि किसी मरीज को एमआरआई जांच की आवश्यकता होती थी और जिला अस्पताल में सुविधा उपलब्ध नहीं होती थी, तो उसे बाहर जाना पड़ता था, अंबिकापुर, बिलासपुर या रायपुर जैसे शहरों में जांच कराने के लिए मरीज और उनके परिजनों को अतिरिक्त समय, परिवहन और अन्य खर्च उठाना पड़ता था, कई बार गंभीर मरीज को लंबी दूरी तक ले जाना भी अपने आप में चुनौती होता है, आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए जांच की कीमत से ज्यादा बोझ कई बार आने-जाने और ठहरने का खर्च बन जाता है, बैकुण्ठपुर जिला अस्पताल में एमआरआई सुविधा शुरू होने के बाद इस स्थिति में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है। जिले के मरीजों को अपने ही जिला मुख्यालय पर अत्याधुनिक जांच की सुविधा उपलब्ध होगी, इससे समय और आर्थिक दोनों स्तरों पर राहत मिलने की संभावना है, हालांकि वास्तविक लाभ तभी पूरा होगा जब मशीन नियमित रूप से चले और रिपोर्टिंग की व्यवस्था भी समयबद्ध हो।
‘स्वीकृति’ से ‘मरीज की जांच’ तक कई पड़ाव
किसी भी सरकारी परियोजना में स्वीकृति पहला बड़ा कदम होती है,अंतिम नहीं,अब मशीन की खरीद,आवश्यक निर्माण कार्य,विद्युत व्यवस्था,स्थापना,परीक्षण और अंततः मरीजों के लिए सेवा शुरू करने की प्रक्रिया पूरी करनी होगी, जिलेवासियों की नजर अब इस बात पर रहेगी कि 18.65 करोड़ रुपये की यह स्वीकृति कितनी तेजी से अस्पताल में वास्तविक सुविधा में बदलती है,मशीन कब स्थापित होती है,संचालन के लिए प्रशिक्षित तकनीकी स्टाफ की व्यवस्था कैसे होती है,रेडियोलॉजी रिपोर्टिंग की व्यवस्था कैसी रहती है और मरीजों को जांच की सुविधा कब से मिलती है—ये सवाल आने वाले दिनों में महत्वपूर्ण होंगे, क्योंकि स्वास्थ्य व्यवस्था में असली उपलब्धि आदेश जारी होने से नहीं,बल्कि तब मानी जाती है जब अस्पताल की मशीन मरीज के काम आने लगे और नियमित रूप से चलती रहे।
विधायक की पहल,लेकिन अब प्रशासन की परीक्षा
बैकुण्ठपुर विधायक भैयालाल राजवाड़े की ओर से SECL के समक्ष एमआरआई सुविधा उपलब्ध कराने की मांग रखी गई थी,विधायक के पत्र में जिला चिकित्सालय बैकुण्ठपुर में एमआरआई मशीन एवं अन्य आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की आवश्यकता का उल्लेख किया गया था,इसके बाद जिला प्रशासन की मांग औरSECL की सीएसआर प्रक्रिया के जरिए आर्थिक स्वीकृति का रास्ता साफ हुआ है, इस उपलब्धि का राजनीतिक श्रेय किसे कितना मिलता है, यह अलग बहस का विषय हो सकता है, लेकिन स्वीकृति पत्र से यह स्पष्ट है कि परियोजना के लिए SECL ने 18.65 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है और इसका क्रियान्वयन जिला प्रशासन कोरिया के माध्यम से किया जाना है, स्वीकृति पत्र में जिला स्वास्थ्य विभाग को परियोजना के क्रियान्वयन और रखरखाव की जिम्मेदारी भी दी गई है, अब असली परीक्षा स्वीकृति के बाद शुरू होगी।
घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur