‘परसाई होने का अर्थ और परसाई की आवश्यकता’ विषय पर होगी परिचर्चा,साहित्यप्रेमियों से शामिल होने की अपील

-संवाददाता-
अम्बिकापुर,21 अगस्त 2026 (घटती-घटना)। हिंदी के सुप्रसिद्ध व्यंग्यकार हरिशंकर परसाई की जयंती के अवसर पर सरगुजा हिंदी साहित्य परिषद द्वारा आज शाम 6 बजे भारतेन्दु भवन,स्टेडियम परिसर अंबिकापुर में विशेष साहित्यिक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम में परसाई के साहित्य, उनके व्यंग्य की धार और वर्तमान सामाजिक परिवेश में उनकी प्रासंगिकता पर विचार-विमर्श होगा। कार्यक्रम में ‘परसाई होने का अर्थ और परसाई की आवश्यकता’ विषय पर डॉ. रामकुमार मिश्र एवं प्रभु नारायण वर्मा अपने विचार रखेंगे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. कामिनी करेंगी।
आज भी प्रासंगिक हैं परसाई के व्यंग्य : परसाई ने अपने व्यंग्य साहित्य के माध्यम से समाज में मौजूद विसंगतियों, पाखंड, भ्रष्टाचार, सामाजिक असमानता और व्यवस्था की कमियों पर तीखा प्रहार किया। उनकी लेखनी ने पाठकों को केवल हंसाया नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों पर गंभीरता से सोचने के लिए भी मजबूर किया। बदलते सामाजिक परिवेश में परसाई की रचनाओं और उनके विचारों की प्रासंगिकता पर चर्चा को लेकर साहित्यप्रेमियों में इस कार्यक्रम को लेकर उत्सुकता है।
साहित्यप्रेमियों से कार्यक्रम में पहुंचने की अपील : सरगुजा हिंदी साहित्य परिषद के सचिव रमेश द्विवेदी ने कार्यक्रम की जानकारी देते हुए अंबिकापुर के साहित्यकारों,लेखकों, विद्यार्थियों एवं साहित्यप्रेमियों से अधिक से अधिक संख्या में भारतेन्दु भवन पहुंचकर कार्यक्रम में सहभागिता करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि ऐसे साहित्यिक आयोजन समाज में पठन-पाठन, विचार-विमर्श और स्वस्थ वैचारिक संवाद को बढ़ावा देने के साथ नई पीढ़ी को हिंदी साहित्य के महत्वपूर्ण रचनाकारों से जोड़ने का माध्यम भी बनते हैं।
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