भूखंड खरीदने से पहले कालोनाइजर का पंजीयन,विकास अनुमति और स्वीकृत ले-आउट की जांच करें : जिला प्रशासन
-संवाददाता-
सूरजपुर,21 अगस्त 2026 (घटती-घटना)। नगरीय क्षेत्रों में अवैध कॉलोनियों के निर्माण पर प्रभावी अंकुश लगाने तथा नागरिकों के हितों की सुरक्षा के लिए छत्तीसगढ़ नगरपालिका अधिनियम,1961 एवं छत्तीसगढ़ नगरपालिका (कॉलोनाइजर का रजिस्ट्रीकरण, निर्बन्धन तथा शर्तें) नियम, 1998 के तहत विभिन्न प्रावधान किए गए हैं,जिला प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी कॉलोनी में भूखंड अथवा भवन खरीदने से पहले संबंधित कालोनाइजर और निर्माण से जुड़े आवश्यक दस्तावेजों की जांच अवश्य करें। अधिनियम की धारा 339-क के तहत नगरपालिका परिषद अथवा नगर पंचायत क्षेत्र में भूमि को भूखंडों में विभाजित कर कॉलोनी विकसित करने वाले व्यक्ति के लिए कॉलोनाइजर के रूप में पंजीयन कराना अनिवार्य है,इसी प्रकार भवन अथवा अपार्टमेंट का निर्माण कर उसका विक्रय या अंतरण करने वाले भवन निर्माता के लिए भी नियमानुसार पंजीयन प्रमाण-पत्र प्राप्त करना आवश्यक है।
भूखंड खरीदने से पहले दस्तावेजों की करें जांच– जिला प्रशासन ने नागरिकों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है, प्रशासन के अनुसार किसी भी कॉलोनी में भूखंड अथवा भवन खरीदने से पहले संबंधित नगरीय निकाय से कालोनाइजर का पंजीयन, विकास अनुमति, स्वीकृत ले-आउट तथा संबंधित भूखंड की बंधक स्थिति की जानकारी प्राप्त करनी चाहिए,प्रशासन ने कहा कि कई बार नागरिक आकर्षक दरों अथवा बेहतर सुविधाओं का दावा करने वाले विज्ञापनों के आधार पर भूखंड खरीद लेते हैं और बाद में कॉलोनी के अवैध होने अथवा आवश्यक अनुमतियां नहीं होने की जानकारी सामने आती है,ऐसी स्थिति में खरीदार को आर्थिक और कानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
अवैध कॉलोनी निर्माण पर कड़ी सजा का प्रावधान
जिला प्रशासन के अनुसार अवैध व्यपवर्तन अथवा अवैध कॉलोनी निर्माण के मामलों में अधिनियम की धारा 339-ग के तहत तीन से सात वर्ष तक के कारावास तथा न्यूनतम एक लाख रुपये के जुर्माने का प्रावधान है, इसके अलावा न्यायालय द्वारा प्रतिकर राशि के भुगतान का आदेश भी दिया जा सकता है,ऐसे में बिना आवश्यक अनुमति और पंजीयन के कॉलोनी विकसित करना कॉलोनाइजर के साथ-साथ भूखंड खरीदने वाले लोगों के लिए भी परेशानी का कारण बन सकता है।
पांच वर्ष के लिए वैध होता है पंजीयन
नियमों के अनुसार कालोनाइजर का पंजीयन प्रमाण-पत्र पांच वर्ष के लिए वैध होता है, प्रत्येक कॉलोनी के विकास कार्य और भूखंडों के विक्रय के लिए सक्षम प्राधिकारी से पृथक विकास अनुमति लेना आवश्यक है, केवल कालोनाइजर का पंजीयन होना ही पर्याप्त नहीं है,बल्कि संबंधित कॉलोनी के लिए विकास अनुमति और स्वीकृत ले-आउट की स्थिति की भी जांच जरूरी है, आवासीय कॉलोनियों के मामले में कुल भूमि का 15 प्रतिशत क्षेत्र आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए आरक्षित रखना आवश्यक है, इसके साथ ही निर्धारित भूखंडों को कॉलोनी के विकास कार्य पूर्ण होने तक नगरपालिका के पास बंधक रखना भी अनिवार्य है।
नियमों के पालन की अपील
जिला प्रशासन ने सभी कालोनाइजरों एवं भवन निर्माताओं से नगरपालिका अधिनियम और संबंधित नियमों के तहत निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन करने की अपील की है,साथ ही नागरिकों से भी कहा गया है कि भूखंड या भवन खरीदने में जल्दबाजी न करें और सभी आवश्यक दस्तावेजों की पुष्टि संबंधित नगरीय निकाय से करने के बाद ही निर्णय लें,प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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