मुख्यमंत्री के बधाई संदेश और सरकारी प्रचार को लेकर पूर्व विधायक ने उठाए सवाल,जल-जंगल-जमीन के मुद्दे पर भी घेरा
-संवाददाता-
एमसीबी,10 अगस्त 2026 (घटती-घटना)। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ की राजनीति में आदिवासी सम्मान और सरकारी प्रचार को लेकर एक बार फिर सियासत गरमा गई है,पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से भाजपा सरकार और मुख्यमंत्री पर तीखा हमला बोला है,उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता में आने के बाद भाजपा सरकार आदिवासी समाज को भूल गई है और विश्व आदिवासी दिवस जैसे महत्वपूर्ण अवसर पर भी प्रदेशभर में अपेक्षित सरकारी प्रचार और मुख्यमंत्री का बधाई संदेश नजर नहीं आया।
गुलाब कमरो ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में सवाल उठाते हुए लिखा कि‘सत्ता मिलते ही आदिवासियों को भूल गए,मुख्यमंत्री जी…?’उन्होंने कहा कि अन्य पर्व और महत्वपूर्ण अवसरों पर पूरे छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री के बड़े-बड़े पोस्टर लगाए जाते हैं तथा सरकारी प्रचार पर भारी राशि खर्च की जाती है, लेकिन विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर न तो मुख्यमंत्री का बधाई संदेश दिखाई दिया और न ही प्रदेशभर में उसी स्तर का सरकारी प्रचार नजर आया।
आदिवासी चेहरा आगे,सत्ता का खेल कोई और खेल रहा-पूर्व विधायक ने अपने बयान में भाजपा की आदिवासी राजनीति पर भी सवाल खड़े किए,उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा एक ओर आदिवासी समाज के नाम और चेहरे को राजनीतिक रूप से आगे रखती है,लेकिन दूसरी ओर आदिवासियों के मूल अधिकारों और उनके हितों से जुड़े मुद्दों पर अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई जा रही, कमरो ने जल, जंगल और जमीन के मुद्दे को उठाते हुए आरोप लगाया कि आदिवासियों के प्राकृतिक संसाधनों को उद्योगपतियों के हवाले किया जा रहा है और इसके बदले आदिवासी समाज को उपेक्षा का सामना करना पड़ रहा है, उन्होंने इसे भाजपा के कथित‘आदिवासी प्रेम’ की वास्तविकता से जोड़ते हुए सरकार पर निशाना साधा,हालांकि,जल-जंगल-जमीन को लेकर लगाए गए इन राजनीतिक आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस बयान से नहीं होती है, ये आरोप पूर्व विधायक गुलाब कमरो द्वारा सरकार के खिलाफ लगाए गए हैं।
सम्मान के दो शब्द तक नहीं निकले-गुलाब कमरो ने अपने पोस्ट में आदिवासी समाज के सम्मान और पहचान को लेकर भी सवाल उठाया,उन्होंने कहा कि जिस समाज की पहचान और गौरव को सामने रखकर सत्ता की राजनीति की जाती है,उसी समाज के गौरव के दिन सम्मान के दो शब्द तक नहीं निकलना सामान्य भूल नहीं मानी जा सकती,उन्होंने इसे पूरे प्रदेश के आदिवासी समाज के सम्मान से जोड़ते हुए कहा कि विश्व आदिवासी दिवस पर सरकारी स्तर पर अपेक्षित संदेश और गतिविधियां नहीं होना आदिवासी समाज की उपेक्षा का संकेत है।
पोस्ट के साथ सरकार पर राजनीतिक हमला- गुलाब कमरो द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किए गए पोस्ट में मुख्यमंत्री की तस्वीर और भाजपा सरकार की आदिवासी राजनीति पर सवाल उठाने वाली सामग्री भी दिखाई गई है। पोस्ट में सरकार पर आदिवासी समाज को केवल राजनीतिक उपयोग के लिए सामने रखने का आरोप लगाया गया है, पूर्व विधायक ने अपने संदेश के अंत में कहा कि आदिवासी चेहरा आगे कर सत्ता का खेल कोई और खेल रहा है—अब सच सामने है, विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर सामने आया यह बयान ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब छत्तीसगढ़ की राजनीति में आदिवासी समाज की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है, कमरो के बयान से साफ है कि कांग्रेस इस मुद्दे को सरकार के खिलाफ राजनीतिक बहस का हिस्सा बनाने की कोशिश कर रही है, अब देखना होगा कि भाजपा या राज्य सरकार की ओर से गुलाब कमरो के इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आती है या नहीं, क्योंकि विश्व आदिवासी दिवस के बहाने उठाया गया यह राजनीतिक सवाल केवल मुख्यमंत्री के बधाई संदेश तक सीमित नहीं है, बल्कि आदिवासी समाज के अधिकार, संसाधनों और राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़े व्यापक मुद्दों को भी सामने ला रहा है।
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