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एमसीबी@ 1200 सालाना संपत्ति कर का आदेश निरस्त, विरोध के बाद भरतपुर जनपद ने लिया यू-टर्न

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पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने जताई थी आपत्ति,‘घटती-घटना’ ने भी ग्रामीणों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ का मुद्दा उठाया था
-संवाददाता-
एमसीबी,10 अगस्त 2026 (घटती-घटना)।
ग्रामीण क्षेत्रों में भवन/मकान के नाम पर प्रतिमाह 100 यानी 1200 वार्षिक संपत्ति कर की प्रस्तावित वसूली को लेकर उठे विरोध के बीच जनपद पंचायत भरतपुर ने अपने पूर्व आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है,जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा 8 अगस्त 2026 को जारी ज्ञापन के बाद फिलहाल संपत्ति कर से संबंधित पूर्व निर्धारित प्रक्रिया पर रोक लग गई है। इस मामले को लेकर पिछले दिनों राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर सवाल उठाए गए थे,पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने ग्रामीण परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने का आरोप लगाते हुए सरकार और प्रशासन से इस व्यवस्था पर पुनर्विचार की मांग की थी, वहीं स्थानीय समाचार पत्र ‘घटती-घटना’ ने भी ग्रामीणों पर पड़ने वाले संभावित आर्थिक दबाव और पंचायत स्तर पर कर वसूली को लेकर बन रही स्थिति को प्रमुखता से उठाया था।
8 अगस्त को जारी हुआ निरस्तीकरण आदेश-कार्यालय जनपद पंचायत भरतपुर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा जारी ज्ञापन क्रमांक 1115/पं.शाखा/ज.पं./2026-27, दिनांक 08/08/2026 में पूर्व में जारी आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने की जानकारी दी गई है,ज्ञापन के अनुसार कार्यालय द्वारा जारी पत्र क्रमांक 627/ पं.शाखा/ ज.पं./ 2025-26, दिनांक 01/07/2026 को निरस्त किया गया है,उक्त पत्र का विषय ‘वित्तीय वर्ष 2025-26 हेतु SAMARTH Panchayat Portal एवं ग्राम संपदा में संपत्ति कर संबंधी समस्त कार्यवाही शत-प्रतिशत पूर्ण किए जाने बाबत’ था,8 अगस्त को जारी नए आदेश में स्पष्ट किया गया है कि पूर्व में जारी उक्त पत्र को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाता है, निरस्तीकरण आदेश की प्रतिलिपि कलेक्टर एमसीबी,मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत एमसीबी,उप संचालक पंचायत,अनु विभागीय अधिकारी राजस्व भरतपुर सहित संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी गई है।
100 प्रतिमाह कर को लेकर उठे थे सवाल-भवन/मकान के नाम पर प्रस्तावित 100 प्रतिमाह अथवा 1200 वार्षिक कर की व्यवस्था सामने आने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में इसके प्रभाव को लेकर सवाल उठे थे,पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने कहा था कि ग्रामीण पहले से ही महंगाई, बेरोजगारी और बढ़ते बिजली बिल जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं, ऐसे समय में मकान या भवन पर अतिरिक्त कर का बोझ ग्रामीण परिवारों की आर्थिक परेशानियां बढ़ा सकता है,उन्होंने यह भी सवाल उठाया था कि कर वसूली को लेकर ग्राम पंचायत सचिवों पर कितना दबाव बनाया जा रहा है और वसूली नहीं होने की स्थिति में वेतन रोकने अथवा अनुशासनात्मक कार्रवाई जैसी चेतावनियों का आधार क्या है।
‘घटती-घटना’ ने भी उठाया था मुद्दा-इस मामले को स्थानीय समाचार पत्र ‘घटती-घटना’ ने भी प्रमुखता से प्रकाशित किया था,‘100 महीना मकान कर पर गरमाई सियासतः गुलाब कमरो ने भाजपा सरकार पर साधा निशाना’ शीर्षक से प्रकाशित खबर में ग्रामीणों पर पड़ने वाले संभावित आर्थिक बोझ,कर वसूली की प्रक्रिया और राजनीतिक विरोध को सामने रखा गया था,अब जनपद पंचायत भरतपुर द्वारा पूर्व आदेश निरस्त किए जाने के बाद यह मुद्दा एक नए मोड़ पर पहुंच गया है,हालांकि निरस्तीकरण आदेश में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि पूर्व आदेश किन कारणों से वापस लिया गया,इसलिए इसे केवल राजनीतिक विरोध का परिणाम मानना या किसी एक पक्ष के प्रयास से जोड़ना उचित नहीं होगा,उपलब्ध आदेश से फिलहाल इतना स्पष्ट है कि 1 जुलाई 2026 को जारी संपत्ति कर संबंधी पत्र को 8 अगस्त 2026 को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया है।
फिलहाल ग्रामीणों को राहत,आगे क्या होगा-निरस्तीकरण के बाद ग्रामीणों और पंचायत स्तर पर इस प्रक्रिया से जुड़े कर्मचारियों को फिलहाल राहत मिली है, 100 प्रतिमाह अथवा 1200 वार्षिक संपत्ति कर की जिस प्रक्रिया को लेकर चर्चा और विरोध शुरू हुआ था, उस पर अब तत्काल प्रभाव से विराम लग गया है,अब बड़ा सवाल यह है कि भविष्य में शासन या पंचायत विभाग की ओर से संपत्ति कर को लेकर कोई नया आदेश जारी किया जाता है या नहीं,साथ ही यदि नई व्यवस्था आती है तो उसकी दर,दायरा,लागू होने की प्रक्रिया और ग्रामीण परिवारों के लिए किसी संभावित छूट अथवा राहत को लेकर क्या प्रावधान होंगे,यह भी महत्वपूर्ण होगा, फिलहाल 8 अगस्त 2026 का निरस्तीकरण आदेश यह जरूर स्पष्ट करता है कि भरतपुर जनपद पंचायत ने 1 जुलाई को जारी संपत्ति कर संबंधी अपने पूर्व निर्देश को वापस ले लिया है और प्रस्तावित 1200 वार्षिक कर की पूर्व प्रक्रिया पर फिलहाल रोक लग गई है।


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