- सीधी भर्ती छोड़ प्रमोशन क्यो…फूड सेफ्टी ऑफिसर पदोन्नति पर वैधानिकता के सवाल,मुख्यमंत्री से जांच की मांग…
- फूड सेफ्टी ऑफिसर पदोन्नति पर नया विवाद,नमूना सहायकों को प्रमोशन के खिलाफ मुख्यमंत्री से शिकायत,नई सूची पर रोक की मांग
- क्या फूड सेफ्टी ऑफिसर पदोन्नति नियमों के दायरे में…केंद्रीय कानून का हवाला देकर मुख्यमंत्री से स्वतंत्र जांच की मांग…
- खाद्य विभाग में फिर ‘विवादित प्रमोशन’ की आहट! नमूना सहायकों को एफएसओ बनाने पर फिर सवाल, नई सूची जारी होने से पहले जांच की मांग
- फूड सेफ्टी ऑफिसर पदोन्नति पर फिर बवाल केंद्रीय नियमों के विपरीत प्रमोशन का आरोप,मुख्यमंत्री से स्वतंत्र जांच और पदोन्नति पर रोक की मांग
- पहले भी ‘नमूना सहायकों को पदोन्नति’ को लेकर उठा था विवाद,अब मुख्यमंत्री को भेजी गई शिकायत में केंद्रीय कानून और नियमों का हवाला

न्यूज डेस्क
रायपुर,26 जुलाई 2026 (घटती-घटना)। छत्तीसगढ़ के खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग में फूड सेफ्टी ऑफिसर (एफएसओ) के पद पर नमूना सहायकों को पदोन्नति दिए जाने का विवाद एक बार फिर चर्चा में है,विभाग में नई विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की प्रक्रिया पूरी होने और नई पदोन्नति सूची कभी भी जारी होने की संभावना के बीच मुख्यमंत्री को विस्तृत शिकायत भेजकर पूरी प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच कराने तथा आगामी पदोन्नति आदेशों पर रोक लगाने की मांग की गई है,यह पहला अवसर नहीं है जब विभाग की इस पदोन्नति प्रक्रिया पर सवाल उठे हों,दैनिक घटती-घटना ने पूर्व में भी प्रमुखता से समाचार प्रकाशित कर नमूना सहायकों को फूड सेफ्टी ऑफिसर पद पर पदोन्नति देने,पदोन्नति कोटा बढ़ाने तथा भर्ती नियमों में किए गए बदलावों को लेकर गंभीर प्रश्न उठाए थे,अब एक बार फिर वही मुद्दा शिकायत के रूप में शासन तक पहुंच गया है।
मुख्यमंत्री को भेजी गई
शिकायत में क्या कहा गया है?
मुख्यमंत्री को भेजे गए आवेदन में शिकायतकर्ताओं ने कहा है कि खाद्य सुरक्षा अधिकारी का पद खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 की धारा 37 तथा खाद्य सुरक्षा एवं मानक नियम,2011 के नियम 2.1.3 के अंतर्गत एक वैधानिक पद है, इस पद के लिए आवश्यक शैक्षणिक योग्यता संसद द्वारा पारित अधिनियम तथा भारत सरकार द्वारा अधिसूचित नियमों से निर्धारित होती है, शिकायत में भारत सरकार के 16 जनवरी 2023 के राजपत्र का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि नियम 2.1.2 में अभिहित अधिकारी के लिए शैक्षणिक योग्यता और पांच वर्ष के खाद्य सुरक्षा अधिकारी के अनुभव का स्पष्ट प्रावधान किया गया है,जबकि नियम 2.1.3 में खाद्य सुरक्षा अधिकारी के लिए आवश्यक शैक्षणिक योग्यताओं का उल्लेख है। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि इन प्रावधानों में नमूना सहायक से खाद्य सुरक्षा अधिकारी पद पर पदोन्नति का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं है।
पदोन्नति कोटा
बढ़ाने पर भी उठे सवाल
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि छत्तीसगढ़ राजपत्र दिनांक 05 मई 2026 के माध्यम से पदोन्नति कोटा 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर दिया गया, शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यह जांच का विषय है कि यह संशोधन केंद्रीय अधिनियम और नियमों के अनुरूप है या नहीं तथा इसका सीधी भर्ती पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
शैक्षणिक योग्यता और
डिग्रियों की जांच की मांग…
मुख्यमंत्री को भेजे गए आवेदन में मांग की गई है कि वर्तमान में पदोन्नति प्राप्त सभी खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की शैक्षणिक योग्यताओं की जांच कराई जाए,विशेष रूप से यह परीक्षण किया जाए कि संबंधित विषयों में निर्धारित डिग्रियां उपलब्ध हैं या नहीं,दूरस्थ शिक्षा से प्राप्त डिग्रियों की वैधानिक मान्यता क्या है,यूजीसी की मान्यता प्राप्त है या नहीं, विभागीय अनापत्ति प्रमाणपत्र लिया गया था या नहीं।
वर्ष 2021 से लगातार हो रही पदोन्नति पर सवाल
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2021 से लगातार नमूना सहायकों को पदोन्नति देकर फूड सेफ्टी ऑफिसर बनाया जा रहा है,इसके लिए वर्ष 2021, 2024, 2025 और 2026 में अलग-अलग पदोन्नति आदेश जारी किए गए। इतना ही नहीं, 02 जून 2026 को पुनः विभागीय पदोन्नति समिति का गठन किया गया, जिसके आधार पर एक और पदोन्नति सूची जारी होने की संभावना जताई जा रही है, शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि पूरी प्रक्रिया की वैधानिकता पर पहले से सवाल उठ रहे हैं,तो नई सूची जारी करने से पहले स्वतंत्र जांच आवश्यक है।
सीधी भर्ती की जगह पदोन्नति क्यों?
मामले का दूसरा बड़ा पहलू रोजगार से जुड़ा है,शिकायतकर्ताओं का कहना है कि राज्य में बड़ी संख्या में योग्य युवा फूड सेफ्टी ऑफिसर की सीधी भर्ती का इंतजार कर रहे हैं,यदि रिक्त पदों को लगातार पदोन्नति से भरा जाएगा तो नई भर्ती के अवसर कम हो जाएंगे और योग्य अभ्यर्थियों के लिए प्रतिस्पर्धा का अवसर ही समाप्त हो सकता है, इसी कारण शिकायत में कहा गया है कि जहां सीधी भर्ती संभव है, वहां बार-बार पदोन्नति को प्राथमिकता देने के औचित्य की भी जांच होनी चाहिए।
बार-बार डीपीसी क्यों?
शिकायतकर्ताओं ने यह भी प्रश्न उठाया है कि दिसंबर 2025 और फरवरी 2026 में पदोन्नति आदेश जारी होने के बाद कुछ ही महीनों में पुनः जून 2026 में डीपीसी बुलाने की आवश्यकता क्यों पड़ी,उनका कहना है कि यदि रिक्तियां पहले से उपलब्ध थीं तो एक ही प्रक्रिया में उन्हें भरा जा सकता था,ऐसे में लगातार डीपीसी आयोजित करने के कारणों की भी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।
फूड सेफ्टी ऑफिसर का पद क्यों है महत्वपूर्ण?
शिकायत में उल्लेख किया गया है कि फूड सेफ्टी ऑफिसर केवल निरीक्षण करने वाला अधिकारी नहीं होता, बल्कि खाद्य सुरक्षा अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन,खाद्य नमूनों की जांच,अभियोजन की कार्रवाई और सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाता है,विशिष्ट अवसरों पर उच्च संवैधानिक पदाधिकारियों के भोजन की गुणवत्ता एवं सुरक्षा सुनिश्चित करने में भी इस पद की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है,इसी कारण शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इस पद पर नियुक्ति पूरी तरह विधिसम्मत,पारदर्शी और नियमों के अनुरूप होनी चाहिए।
स्वतंत्र जांच की मांग
– प्रस्तावित एवं लंबित सभी पदोन्नति आदेशों और जॉइनिंग पर जांच पूरी होने तक अंतरिम रोक लगाई जाए।
– पूरी पदोन्नति प्रक्रिया की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए।
– नमूना सहायकों को फूड सेफ्टी ऑफिसर पद पर पदोन्नति देने की वैधानिकता की जांच की जाए।
– पदोन्नति कोटा 10 प्रतिशत से 25 प्रतिशत किए जाने के निर्णय का विधिक परीक्षण कराया जाए।
– यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन अथवा अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
पहले भी उठा था विवाद,अब फिर वही सवाल-दैनिक घटती-घटना ने पूर्व में प्रकाशित समाचारों में भी यह मुद्दा उठाया था कि विभाग में तकनीकी पदों पर भर्ती व्यवस्था के बजाय पदोन्नति को प्राथमिकता दिए जाने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं, अब मुख्यमंत्री को भेजी गई शिकायत में वही मुद्दे विस्तृत रूप से उठाए गए हैं और केंद्रीय कानून, नियमों तथा राजपत्रों का हवाला देते हुए पूरे मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की गई है, अब निगाहें राज्य शासन पर हैं कि शिकायत में उठाए गए बिंदुओं की जांच कराई जाती है या प्रस्तावित पदोन्नति सूची जारी की जाती है,यदि जांच से पहले नई पदोन्नति होती है, तो इस पूरे मामले के न्यायालय तक पहुंचने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
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