नेता प्रतिपक्ष लालमुनी यादव ने प्रशासन को दी सूचना, पेयजल,सड़क,सफाई,स्ट्रीट लाइट और कथित भ्रष्टाचार समेत आठ सूत्रीय मांगों को लेकर राजीव चौक में होगा आंदोलन
-संवाददाता-
शिवपुर-चरचा/कोरिया, 25 जुलाई 2026 (घटती-घटना)। शिवपुर-चरचा नगर पालिका क्षेत्र की विभिन्न जनसमस्याओं को लेकर नगर पालिका की नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष लालमुनी यादव ने 26 जुलाई को एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन का ऐलान किया है, इस संबंध में उन्होंने अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) बैकुंठपुर को विधिवत पत्र सौंपकर आंदोलन की सूचना दी है,प्रस्तावित धरना-प्रदर्शन रविवार 26 जुलाई को सुबह 10 बजे से शाम 7 बजे तक राजीव गांधी चौक,शिवपुर-चरचा में आयोजित किया जाएगा, जारी सूचना के अनुसार,यह आंदोलन नगर पालिका क्षेत्र में लंबे समय से बनी हुई मूलभूत नागरिक समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर किया जा रहा है,नेता प्रतिपक्ष ने नगरवासियों से भी बड़ी संख्या में आंदोलन में शामिल होकर अपनी आवाज बुलंद करने की अपील की है।
आठ सूत्रीय मांगों को लेकर होगा प्रदर्शन
अनुविभागीय अधिकारी को दिए गए पत्र में नगर पालिका की कार्यप्रणाली और जनसुविधाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाया गया है,इनमें सबसे प्रमुख समस्या पेयजल संकट को बताया गया है,जिसे पत्र में‘विकराल रूप’ धारण कर चुकी समस्या बताया गया है,इसके अलावा मुख्य मार्गों और विभिन्न वार्डों में स्ट्रीट लाइट की खराब व्यवस्था,जर्जर सड़कें, नालियों की समस्या,सफाई व्यवस्था में कथित लापरवाही, वार्डों में नियमित फॉगिंग एवं कीटनाशक दवाओं का छिड़काव नहीं होना,नगर पालिका में कथित भ्रष्टाचार तथा कर्मचारियों को समय पर वेतन भुगतान नहीं होने जैसे मुद्दों को भी आंदोलन का आधार बनाया गया है,नेता प्रतिपक्ष का कहना है कि ये सभी समस्याएं लंबे समय से बनी हुई हैं, लेकिन नगर पालिका प्रशासन द्वारा इनके समाधान के लिए अपेक्षित कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
सड़क,नाली और स्ट्रीट लाइट व्यवस्था पर भी सवाल…
आंदोलन की प्रमुख मांगों में नगर पालिका क्षेत्र की सड़क,नाली और स्ट्रीट लाइट व्यवस्था को भी शामिल किया गया है,पत्र में आरोप लगाया गया है कि मुख्य मार्गों के अलावा कई वार्डों में स्ट्रीट लाइटें बंद पड़ी हैं,जिससे रात के समय लोगों को आवागमन में परेशानी होती है,इसी प्रकार कई स्थानों पर सड़क और नालियों की खराब स्थिति के कारण नागरिकों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है,बरसात के दौरान जलभराव और कीचड़ की समस्या भी बढ़ जाती है, जिससे लोगों की परेशानियां और बढ़ जाती हैं।
पेयजल और सफाई व्यवस्था बनी प्रमुख चिंता
धरना-प्रदर्शन की प्रस्तावित मांगों में पेयजल संकट को सबसे गंभीर समस्या बताया गया है,आरोप है कि कई वार्डों में नियमित पेयजल आपूर्ति प्रभावित है,जिससे लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए परेशान होना पड़ रहा है,इसके साथ ही सफाई व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। पत्र में कहा गया है कि कई क्षेत्रों में नियमित सफाई नहीं होने और फॉगिंग व कीटनाशक दवाओं का छिड़काव नहीं होने से नागरिकों में संक्रामक बीमारियों का खतरा बना हुआ है, बरसात के मौसम में यह समस्या और अधिक गंभीर हो सकती है।
कथित भ्रष्टाचार और कर्मचारियों के वेतन का भी उठाया मुद्दा…
नेता प्रतिपक्ष लालमुनी यादव ने नगर पालिका में कथित भ्रष्टाचार का मुद्दा भी उठाया है,पत्र में इस संबंध में जांच और आवश्यक कार्रवाई की मांग की गई है,इसके साथ ही नगर पालिका कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिलने का मुद्दा भी प्रमुखता से शामिल किया गया है,उनका कहना है कि कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिलने से उनका मनोबल प्रभावित होता है और इसका असर नगर पालिका की सेवाओं पर भी पड़ता है।
प्रशासन को पहले ही दी गई आंदोलन की सूचना
धरना-प्रदर्शन को लेकर अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को विधिवत सूचना पत्र सौंपा गया है,इसकी प्रतिलिपि थाना प्रभारी चरचा तथा मुख्य नगर पालिका अधिकारी, शिवपुर-चरचा को भी भेजी गई है,इससे स्पष्ट है कि आंदोलन की पूरी प्रक्रिया प्रशासनिक नियमों के तहत अपनाई गई है,जारी पोस्टर में भी नगरवासियों से अधिक से अधिक संख्या में आंदोलन में शामिल होने और अपनी समस्याओं के समाधान के लिए एकजुट होकर आवाज उठाने की अपील की गई है,पोस्टर में‘आपकी समस्या,हमारी आवाज’और‘एकजुट होकर आवाज उठाएं’ जैसे संदेश भी दिए गए हैं।
अब नगर पालिका प्रशासन की प्रतिक्रिया पर नजर…
26 जुलाई को प्रस्तावित इस एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन को लेकर अब नगर पालिका प्रशासन की प्रतिक्रिया पर नजर रहेगी,यदि आंदोलन से पहले प्रशासन मांगों पर सकारात्मक पहल करता है तो स्थिति बदल सकती है,अन्यथा नगरवासियों की भागीदारी के साथ यह प्रदर्शन स्थानीय स्तर पर एक महत्वपूर्ण जनआंदोलन का रूप ले सकता है, फिलहाल नगर पालिका क्षेत्र में पेयजल,सड़क, नाली,स्ट्रीट लाइट,सफाई व्यवस्था और कर्मचारियों के वेतन जैसे मुद्दे एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गए हैं,अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इन मांगों के समाधान के लिए क्या कदम उठाता है और 26 जुलाई को प्रस्तावित धरना-प्रदर्शन का स्थानीय प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों पर क्या प्रभाव पड़ता है।
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